शिवपुरी। शिवपुरी शहर का निवासी शिवपुरी शहर को महानगर जैसा बनने का सपना देखता है,वह सरकार और नेताओ से उम्मीद करता है कि शिवपुरी महानगर जैसा दिखे,लेकिन शिवपुरी मे संचालित एक योजना का एक्सरे करे तो इसमे दिखाई देता है कि शिवपुरी शहर के लोगो की सोच महानगर जैसी अभी नही हुई है। 35 हजार रसोई गैस सिलेंडरो के कनेक्शन वाले शहर में मात्र 1 हजार घरो मे पीएनजी गैस कनेक्शन हुए है। बार बार प्रशासन निवेदन कर रहा है लेकिन आमजन पीएनजी कनेक्शन की ओर नही जा रहा हैं। शिवपुरी में पीएनजी गैस परियोजना इसी मानसिकता और विकास के बीच खड़ी चुनौती की कहानी बयां कर रही है।
शिवपुरी में पिछले चार वर्षों से घर-घर पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) पहुंचाने का काम चल रहा है, लेकिन अब तक यह योजना लोगों की पहली पसंद नहीं बन सकी है। शहर में करीब 35 हजार घरेलू एलपीजी सिलेंडर उपभोक्ता हैं, जबकि पीएनजी कंपनी अब तक केवल 3400 घरों में कनेक्शन दे पाई है। इनमें भी महज करीब 1000 परिवार ही नियमित रूप से पीएनजी गैस का उपयोग कर रहे हैं। बाकी उपभोक्ताओं ने या तो कनेक्शन लेने के बाद रिचार्ज नहीं कराया या फिर गैस सप्लाई शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं।
सुविधा घर तक आई, लेकिन अपनाने में हिचक
पीएनजी गैस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सिलेंडर खत्म होने, बुकिंग कराने या डिलीवरी का इंतजार करने जैसी परेशानी नहीं रहती। कंपनी के अनुसार जहां 14.2 किलो का घरेलू गैस सिलेंडर करीब 1021 रुपए का पड़ रहा है, वहीं उतनी ही गैस पीएनजी से करीब 850 रुपए में उपलब्ध हो सकती है। यानी हर सिलेंडर पर लगभग 140 रुपए की बचत संभव है। इसके बावजूद लोगों का रुझान अपेक्षा के अनुरूप नहीं दिख रहा।
विकास की सबसे बड़ी दुश्मन-अफवाह
विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों की हिचक के पीछे सिर्फ मानसिकता नहीं, बल्कि पुराने अनुभव भी जिम्मेदार हैं। करीब तीन वर्ष पहले फतेहपुर क्षेत्र में हुए गैस विस्फोट के बाद पीएनजी को लेकर कई तरह की आशंकाएं फैल गई थीं। हालांकि बाद की जांच में हादसे का कारण पीएनजी कनेक्शन साबित नहीं हुआ, लेकिन अफवाहों ने लोगों के मन में ऐसा डर बैठा दिया, जो आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया है।
कंपनी की धीमी रफ्तार भी सवालों में
दूसरी ओर परियोजना की गति भी सवालों के घेरे में है। वर्ष 2022 से पाइपलाइन बिछाने का काम चल रहा है, लेकिन चार साल बाद भी शहर के सीमित हिस्सों तक ही यह सुविधा पहुंच सकी है। कुछ कॉलोनियों में कनेक्शन देने के बावजूद अभी तक मुख्य लाइन से गैस सप्लाई शुरू नहीं हो सकी। सिटी सेंटर कॉलोनी इसका प्रमुख उदाहरण है, जहां तीन साल पहले कनेक्शन दिए गए, लेकिन आज तक गैस नहीं पहुंची।
प्रशासन की अपील भी नहीं बदली तस्वीर
ईरान-अमेरिका तनाव के दौरान गैस सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। उस समय जिला प्रशासन ने भी जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन बिछ चुकी है, वहां लोगों से पीएनजी कनेक्शन लेने की अपील की थी। खाद्य विभाग को जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए, लेकिन इसका व्यापक असर दिखाई नहीं दिया।
आखिर सवाल किससे
इस पूरी तस्वीर में केवल जनता को दोष देना भी उचित नहीं होगा और केवल सिस्टम को जिम्मेदार ठहराना भी पर्याप्त नहीं है। एक तरफ कंपनी की धीमी कार्यप्रणाली, अधूरी सप्लाई और पुराने हादसे से पैदा हुआ अविश्वास है, तो दूसरी ओर नई सुविधाओं को लेकर लोगों की झिझक भी है।
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