Shivpuri News: गौमाता कहने वाले सड़क पर छोड़ रहे गाय, अब कलेक्टर नियमों का डंडा लेकर आए

Lalit Mudgal
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शिवपुरी।
शिवपुरी जिले में हर दिन सड़कों पर घूमते आवारा गौवंश न सिर्फ यातायात में बाधा बन रहे हैं, बल्कि सड़क हादसों में इंसानों और गौवंश दोनों की जान भी जा रही है। ऐसे में जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए आवारा पशु छोड़ने वालों के खिलाफ एफआईआर, जुर्माना और गौशाला का खर्च वसूलने जैसे कड़े प्रावधान लागू किए हैं। शिवपुरी मे मानसून काल में सडको पर बैठा गौवंश दुर्घटना का कारण बनता है। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए कलेक्टर अर्पित वर्मा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 163 के तहत पूरे जिले में प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

अब सड़क पर छोड़ा गौवंश तो होगी एफआईआर
कलेक्टर के आदेश के अनुसार यदि कोई व्यक्ति या पशुपालक जानबूझकर अथवा लापरवाही से अपने गौवंश को सार्वजनिक सड़क पर छोड़ता है तो उसके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। यदि आवारा पशु को पकड़कर गौशाला भेजा जाता है तो उसके परिवहन और रखरखाव का पूरा खर्च भी संबंधित पशुपालक से भू-राजस्व की तरह वसूला जाएगा।

नगर पालिका में पशुओं का पंजीयन अनिवार्य
प्रशासन ने नगर पालिका क्षेत्र में पाले जाने वाले प्रत्येक पशु का पंजीयन अनिवार्य कर दिया है। यदि कोई पशुपालक पंजीयन नहीं कराता है तो उससे निर्धारित शुल्क का 10 गुना तक जुर्माना वसूला जाएगा। इसका उद्देश्य आवारा पशुओं की पहचान कर उनके मालिकों की जवाबदेही तय करना है।

अब सड़क एजेंसियां भी होंगी जवाबदेह
आदेश में केवल पशुपालकों पर ही नहीं, बल्कि सड़क निर्माण और रखरखाव करने वाली एजेंसियों की जिम्मेदारी भी तय की गई है। एनएचएआई, पीडब्ल्यूडी, एमपीआरडीसी और पीएमजीएसवाई को अपनी सड़कों पर नियमित पेट्रोलिंग करनी होगी। यदि किसी सड़क हादसे में गौवंश की मौत होती है तो उसके शव के तत्काल निस्तारण और घायल पशु के उपचार की व्यवस्था संबंधित विभाग को करनी होगी।

पुलिस भी करेगी निगरानी
रात्रि गश्त और पेट्रोलिंग के दौरान यदि पुलिस को सड़क पर आवारा मवेशी मिलते हैं तो उनकी फोटो लेकर संबंधित निकाय को सूचना दी जाएगी, ताकि उन्हें तत्काल गौशाला पहुंचाया जा सके।

सिर्फ आदेश नहीं, सोच बदलने की भी जरूरत
प्रशासन का यह आदेश निश्चित रूप से सड़क हादसों को कम करने की दिशा में बड़ा कदम है, लेकिन केवल नियमों और कार्रवाई से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। जब तक पशुपालक अपने मवेशियों को बेसहारा छोड़ने की प्रवृत्ति नहीं बदलेंगे, तब तक सड़कों पर आवारा गौवंश की समस्या बनी रहेगी। गाय भारतीय संस्कृति में आस्था का प्रतीक मानी जाती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि गाय वास्तव में गौमाता है, तो उसकी जिम्मेदारी केवल सरकार और गौशालाओं की क्यों रहे? उसकी देखभाल की पहली जिम्मेदारी तो उसी व्यक्ति की है, जिसने उसे पाला है।

आम नागरिक भी दे सकते हैं सूचना
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि यदि सड़क पर घायल या मृत गौवंश दिखाई दे तो पशुपालन विभाग, एनएचएआई हेल्पलाइन 1033 या चलित पशु चिकित्सा सेवा 1962 पर सूचना दें, ताकि समय पर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

सबसे बड़ा सवाल:क्या इस बार कलेक्टर का यह आदेश कागजों से निकलकर जमीन पर दिखाई देगा, या पहले की तरह कुछ दिनों बाद फिर सड़कों पर आवारा गौवंश और हादसों का सिलसिला जारी रहेगा?

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