शिवपुरी, सुरक्षा गार्ड को जानबूझकर कुचलकर मारने वाले सुरेंद्र को 10 साल का कारावास

vikas
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शिवपुरी।
पूरनखेड़ी टोल प्लाजा पर ड्यूटी कर रहे टोल गार्ड को इनोवा कार से जानबूझकर कुचलकर मौत के घाट उतारने के छह साल पुराने मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश रितु वर्मा कटारिया की अदालत ने आरोपी सुरेंद्र सिंह गुर्जर (30), निवासी ग्राम खिरावली, जिला मुरैना को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 के तहत दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये के अर्थदंड** की सजा सुनाई है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अर्थदंड जमा नहीं करने पर आरोपी को छह माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।

अभियोजन के अनुसार घटना 24 जनवरी 2020 की है। सुरेंद्र सिंह गुर्जर अपनी यूपी-79 टी-6993 नंबर की इनोवा कार को तेज गति और लापरवाही से चला रहा था। पड़ोरा चौराहे के पास उसने पहले राहगीर लालाराम को टक्कर मार दी। इसके बाद भी उसने वाहन नहीं रोका और तेजी से भाग निकला। घटना की सूचना मिलते ही आगे स्थित पूरनखेड़ी टोल प्लाजा पर कर्मचारियों को वाहन रोकने के निर्देश दिए गए।

टोल प्लाजा के बूथ नंबर-4 पर ड्यूटी कर रहे हरिवंश परिहार ने स्टॉपर और बूम बैरियर लगाकर कार रोकने का प्रयास किया, लेकिन आरोपी सुरेंद्र सिंह गुर्जर ने रुकने के बजाय वाहन की रफ्तार और बढ़ा दी। उसने पहले बूम बैरियर तोड़ा और फिर हरिवंश परिहार को सीधी टक्कर मारते हुए उन्हें कुचल दिया। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया।

इस भयावह घटना में गंभीर रूप से घायल हरिवंश परिहार को अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। वहीं, ड्यूटी पर मौजूद अन्य टोल गार्ड अजय परिहार और राकेश गोस्वामी ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई।

सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों का परीक्षण करते हुए माना कि यह महज लापरवाही से हुई दुर्घटना नहीं थी। आरोपी सुरेंद्र सिंह गुर्जर ने वाहन रोकने के स्पष्ट संकेत मिलने के बावजूद जानबूझकर उसे नहीं रोका और टोल गार्ड पर वाहन चढ़ा दिया। इसी आधार पर अदालत ने मामले को धारा 304ए (लापरवाही से मृत्यु) के बजाय धारा 304 (गैर-इरादतन हत्या) के दायरे में माना और आरोपी को 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।

अदालत का यह फैसला उन मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनमें सड़क पर लापरवाही और जानबूझकर किए गए कृत्य के बीच की कानूनी सीमा तय होती है। यह निर्णय संदेश देता है कि वाहन को हथियार की तरह इस्तेमाल कर किसी की जान लेने वाले दोषियों के प्रति कानून सख्त रुख अपनाएगा।

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