पवन पाठक @पिछोर। जनपद पंचायत पिछोर की ग्राम पंचायतों में वित्तीय अनियमितताओं और निर्माण कार्यों में कथित भ्रष्टाचार के आरोप एक बार फिर चर्चा में हैं। ताजा मामला ग्राम पंचायत बाचरौन का है, जहां स्थानांतरित और कार्यमुक्त किए जा चुके पंचायत सचिव द्वारा करीब 10 लाख रुपए की राशि आहरित किए जाने का आरोप सामने आया है। इतना ही नहीं, जिस चेकडैम निर्माण के नाम पर यह भुगतान हुआ, उसकी गुणवत्ता पर भी ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत बाचरौन के सचिव सतीश शर्मा का स्थानांतरण राज्य शासन द्वारा 15 जून को बाचरौन से उमरी खुर्द कर दिया गया था। नियमानुसार स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद सचिव की पंचायत से संबंधित वित्तीय आईडी निष्क्रिय (डी-एक्टिवेट) कर दी जानी चाहिए थी, ताकि वे किसी प्रकार का भुगतान या राशि आहरित न कर सकें। साथ ही उन्हें शीघ्र कार्यमुक्त करने की प्रक्रिया भी पूरी होनी थी।
लेकिन आरोप है कि यह प्रक्रिया समय पर नहीं हुई। सचिव को 3 जुलाई को कार्यमुक्त किया गया और इसके अगले ही दिन 4 जुलाई को उन्होंने करीब 10 लाख रुपए की राशि विभिन्न खातों में आहरित कर दी। बताया जा रहा है कि यह भुगतान 15वें वित्त आयोग की राशि से चेकडैम निर्माण के नाम पर किया गया।
12.50 लाख के चेकडैम में पहले ही निकल चुके थे 2.50 लाख
ग्रामीणों के अनुसार संबंधित चेकडैम की कुल लागत 12.50 लाख रुपए थी। इसमें से करीब 2.50 लाख रुपए पहले ही निकाले जा चुके थे, जबकि शेष लगभग 10 लाख रुपए स्थानांतरण के बाद भुगतान कर दिए गए। यही भुगतान अब विवाद का कारण बन गया है।
निर्माण कार्य पर भी गंभीर आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि जिस चेकडैम के नाम पर भुगतान किया गया, उसका निर्माण बेहद निम्न गुणवत्ता का है। उनका कहना है कि निर्माण में आवश्यक बेस तैयार नहीं किया गया, जहां सीमेंट-कंक्रीट का उपयोग होना चाहिए था वहां बोल्डर डालकर काम पूरा कर दिया गया। इसके अलावा एस्टीमेट के अनुसार खुदाई भी नहीं कराई गई और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की भी समुचित जांच नहीं हुई।
ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य को देखकर स्पष्ट प्रतीत होता है कि सरकारी धन का सही उपयोग नहीं किया गया। उनका आरोप है कि भुगतान की जल्दबाजी इसलिए की गई ताकि मामला सामने आने से पहले पूरी राशि निकाल ली जाए।
ग्रामीणों ने उठाई जांच और निलंबन की मांग
मामले को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर सचिव के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और निलंबन की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे शिवपुरी पहुंचकर आंदोलन करेंगे और सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
लीपापोती के आरोप
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि मामला उजागर होने के बाद संबंधित सचिव और कुछ जिम्मेदार अधिकारी पूरे मामले को दबाने और लीपापोती करने में जुट गए हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो पंचायतों में सरकारी राशि के दुरुपयोग पर रोक लगाना मुश्किल हो जाएगा।
अब इस पूरे मामले में जनपद पंचायत और जिला प्रशासन की भूमिका पर भी नजरें टिकी हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पंचायतों में वित्तीय नियंत्रण व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।

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