शिवपुरी के यूआईटी कॉलेज मे 240 स्टूडेंटस के प्रवेश प्रक्रिया पर संकट,गेस्ट फैकल्टी का विरोध

vikas
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शिवपुरी।
यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (यूआईटी) शिवपुरी में गेस्ट फैकल्टी की री-ज्वाइनिंग को लेकर विवाद गहरा गया है। हर छह महीने में अनुबंध के आधार पर सेवाएं देने वाले 26 गेस्ट फैकल्टी इस बार री-ज्वाइनिंग प्रक्रिया में जोड़ी गई नई शर्तों से नाराज हैं। शिक्षकों ने इन शर्तों को मनमाना बताते हुए 2 जुलाई से सामूहिक रूप से ज्वाइनिंग देने से इनकार कर दिया है। इसका सीधा असर संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ पहले चरण में जारी 240 सीटों की प्रवेश प्रक्रिया पर भी पड़ने लगा है।

जानकारी के अनुसार, राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी), भोपाल के अधीन संचालित यूआईटी शिवपुरी में नियमित शिक्षकों की कमी के चलते 26 गेस्ट फैकल्टी से पढ़ाई कराई जाती है। हर छह महीने बाद इनकी सेवाओं का नवीनीकरण कर री-ज्वाइनिंग कराई जाती है, लेकिन इस बार जारी नियुक्ति आदेश में कई नई शर्तें जोड़ दी गई हैं, जिन्हें गेस्ट फैकल्टी ने अनुचित बताया है।

एक महीने में सिर्फ एक आकस्मिक अवकाश, आंदोलन किया तो नियुक्ति निरस्त
गेस्ट फैकल्टी का आरोप है कि नए आदेश में एक महीने में केवल एक आकस्मिक अवकाश की अनुमति दी गई है। इसके अलावा आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि कोई अतिथि शिक्षक निर्धारित शर्तों से हटकर कोई मांग करता है अथवा मांगों को लेकर आंदोलनात्मक गतिविधियों में शामिल होता है तो उसकी नियुक्ति उस दिन से स्वतः निरस्त मानी जाएगी, जिस दिन इसकी जानकारी संस्थान को मिलेगी।

इन शर्तों को असंवैधानिक और एकतरफा बताते हुए सभी 26 गेस्ट फैकल्टी ने 2 जुलाई से री-ज्वाइनिंग नहीं की है। हालांकि ज्वाइनिंग के लिए सात दिन की समय-सीमा निर्धारित की गई है।

हर शनिवार हाजिरी नहीं, हर सप्ताह जेब पर पड़ रही मार
गेस्ट फैकल्टी ने यह भी आरोप लगाया है कि संस्थान में शनिवार को उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं की जाती। इससे उन्हें प्रत्येक शनिवार लगभग 2 हजार रुपये का आर्थिक नुकसान** उठाना पड़ रहा है। शिक्षकों का कहना है कि वे पूरे सप्ताह संस्थान में सेवाएं देते हैं, लेकिन शनिवार की हाजिरी नहीं लगने से उनके मानदेय में कटौती कर दी जाती है।

सरकारी आदेश का हवाला, नियमों की अनदेखी का आरोप
गेस्ट फैकल्टी ने मध्यप्रदेश शासन के तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग द्वारा 27 जनवरी 2022 को जारी आदेश का हवाला दिया है। इस आदेश के अनुसार अतिथि व्याख्याताओं को एक वर्ष में 13 आकस्मिक अवकाश और 3 ऐच्छिक अवकाश** का प्रावधान है। साथ ही शासकीय अवकाश को छोड़कर अन्य सभी कार्य दिवसों में संस्थान में उपस्थित रहकर सौंपे गए कार्यों का निर्वहन करना होता है।

गेस्ट फैकल्टी का आरोप है कि शासन के इन स्पष्ट प्रावधानों के बावजूद संस्थान में अवकाश संबंधी नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है और शनिवार की उपस्थिति भी दर्ज नहीं की जा रही, जिससे आर्थिक और मानसिक दोनों प्रकार की परेशानी झेलनी पड़ रही है।

प्रवेश प्रक्रिया पर भी पड़ रहा असर
गेस्ट फैकल्टी के सामूहिक रूप से री-ज्वाइनिंग नहीं करने का असर अब संस्थान की शैक्षणिक व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। पहले चरण में **240 सीटों पर चल रही प्रवेश प्रक्रिया** प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। यदि विवाद जल्द नहीं सुलझा तो नए सत्र की पढ़ाई समय पर शुरू होने में भी कठिनाई आ सकती है।

प्रबंधन ने VC को भेजी जानकारी
इस पूरे मामले में यूआईटी शिवपुरी के संचालक एस.के. धाकड़ ने बताया कि गेस्ट फैकल्टी की मांगों और आपत्तियों से राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति (Vice Chancellor) को अवगत करा दिया गया है। अब विश्वविद्यालय स्तर पर निर्णय होने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल गेस्ट फैकल्टी अपने अधिकारों की बहाली और शासन के आदेशों के अनुरूप सेवा शर्तें लागू करने की मांग पर अड़ी हुई है, जबकि छात्र और अभिभावक इस विवाद के जल्द समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

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