शिवपुरी। पोहरी के एसडीएम जेपी गुप्ता और पटवारी अशोक वर्मा के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने अब अगला बड़ा कदम उठाया है। दोनों अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज होने के बाद ईओडब्ल्यू के पुलिस अधीक्षक ने शिवपुरी कलेक्टर को पत्र भेजकर दोनों को वर्तमान पदस्थापना से हटाने की मांग की है। एजेंसी का कहना है कि यदि दोनों अधिकारी अपने वर्तमान पद पर बने रहे तो वे जांच को प्रभावित कर सकते हैं।
29 जून को दर्ज हुई थी एफआईआर
जानकारी के अनुसार, शिवपुरी निवासी गोविंद शिवहरे ने अपनी खरीदी गई जमीन की इंद्राज दुरुस्ती (नामांतरण संबंधी सुधार) कराने के लिए राजस्व विभाग में आवेदन दिया था। आरोप है कि इस कार्य के बदले उनसे 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई। इसके बाद गोविंद शिवहरे ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू), ग्वालियर में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के सत्यापन के लिए 28 जून को ईओडब्ल्यू की टीम ने शिकायतकर्ता को एक गुप्त ऑडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस के साथ भेजा। जांच के दौरान कथित रूप से एसडीएम द्वारा 5 हजार रुपये रिश्वत मांगने की बातचीत रिकॉर्ड हुई। इस रिकॉर्डिंग के आधार पर 29 जून को एसडीएम जेपी गुप्ता और पटवारी अशोक वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध दर्ज किया गया।
सूचना लीक होने से नहीं हो सकी ट्रैप कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, ईओडब्ल्यू ने आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ने की तैयारी भी की थी, लेकिन कार्रवाई से पहले ही इसकी सूचना लीक हो गई। इसी वजह से **29 और 30 जून को प्रस्तावित ट्रैप कार्रवाई सफल नहीं हो सकी** और दोनों आरोपी रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार नहीं किए जा सके।
जांच प्रभावित होने की आशंका
ईओडब्ल्यू के एसपी ने 3 जुलाई को शिवपुरी कलेक्टर को भेजे पत्र में कहा है कि दोनों आरोपी अभी भी पोहरी में पदस्थ हैं। ऐसे में वे अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर साक्ष्यों या गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। इसी आशंका के चलते जांच पूरी होने तक दोनों अधिकारियों को वर्तमान पदस्थापना से हटाने अथवा स्थानांतरित करने का अनुरोध किया गया है।
आरोपों को बता चुके हैं साजिश
वहीं दूसरी ओर, एसडीएम जेपी गुप्ता और अन्य राजस्व अधिकारियों ने इस पूरे मामले को साजिश करार दिया है। इस संबंध में उन्होंने पहले ही शिवपुरी कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर दावा किया है कि उन्हें सुनियोजित तरीके से फंसाया गया है। अब इस मामले में प्रशासन और ईओडब्ल्यू के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हैं। फिलहाल, रिश्वत प्रकरण में एफआईआर दर्ज होने के बाद ईओडब्ल्यू की ओर से आरोपित अधिकारियों को हटाने की मांग ने इस मामले को नया मोड़ दे दिया है।

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