शिवपुरी। शिवपुरी की शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था (आईटीआई) मे 14 ट्रेडों की 520 सीटों में से दो चरण की काउंसलिंग पूरी हो चुकी है,लेकिन अभी भी कॉलेज की 63.3 प्रतिशत सीटें खाली है,कुल मिलाकर लिख सकते है कॉलेज की काउंसिलिंग केवल पासिंग मार्कस ही ला पाई हे। अभी केवल 6.7 प्रतिशत सीटों पर ही स्टूडेंटस का प्रवेश हो सका है। 520 सीटों में से 191 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है, जबकि 329 सीटें अब भी खाली हैं। ऐसे में संस्थान के सामने शत-प्रतिशत प्रवेश का लक्ष्य हासिल करना बड़ी चुनौती बन गया है।
स्थिति इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि इस वर्ष छात्राओं के लिए प्रथम वर्ष की प्रवेश फीस में 25 प्रतिशत की छूट, 35 प्रतिशत सीटों का आरक्षण और पहली बार बालिका छात्रावास जैसी सुविधाएं शुरू की गई हैं। इसके बावजूद प्रवेश की रफ्तार उम्मीद से काफी धीमी बनी हुई है।
पिछले साल 92 प्रतिशत सीटें भर गई थीं
संस्थान के प्राचार्य हेमंत डंडोतिया के अनुसार, पिछले सत्र में आईटीआई की करीब 92 प्रतिशत सीटें भर गई थीं, लेकिन इस बार शुरुआती दो चरणों के बाद केवल 191 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। इनमें 66 छात्राएं शामिल हैं। शेष 329 सीटें अब भी खाली हैं, जिन्हें भरने के लिए तीसरे और चौथे चरण की प्रक्रिया जारी है।
25 जुलाई तक मिलेगा मौका
प्रवेश से वंचित विद्यार्थियों के लिए संस्थान ने एक और अवसर दिया है। राउंड-3 और राउंड-4 के तहत 25 जुलाई तक पंजीयन और चॉइस फिलिंग की जा सकेगी। विद्यार्थी आईटीआई परिसर में बनाए गए हेल्प डेस्क या एमपी ऑनलाइन केंद्रों के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
छात्राओं को लुभाने के लिए कई नई सुविधाएं
इस वर्ष सरकार ने छात्राओं को तकनीकी शिक्षा से जोड़ने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। शासकीय आईटीआई में प्रवेश लेने वाली छात्राओं को प्रथम वर्ष की फीस में 25 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। इसके अलावा पहले से 35 प्रतिशत सीटें छात्राओं के लिए आरक्षित हैं।
इतना ही नहीं, इस वर्ष पहली बार बालिका छात्रावास भी शुरू किया जा रहा है। इससे दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं को रहने की सुविधा मिलेगी और उन्हें रोजाना लंबी दूरी तय करने की परेशानी से राहत मिलेगी।
फिर भी नहीं बढ़ी छात्राओं की संख्या
इतनी सुविधाएं मिलने के बावजूद छात्राओं का रुझान अपेक्षा के अनुरूप नहीं बढ़ा है। संस्थान प्रबंधन का कहना है कि लगातार जागरूकता अभियान चलाकर छात्राओं और उनके अभिभावकों को तकनीकी शिक्षा के महत्व के बारे में बताया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक बेटियां आईटीआई में प्रवेश लें।
निजी आईटीआई की छात्राएं नहीं उठा रहीं लाभ
एक बड़ी वजह यह भी मानी जा रही है कि सरकार की 25 प्रतिशत फीस छूट केवल शासकीय आईटीआई में लागू है। जिले के 19 निजी आईटीआई संस्थानों में प्रवेश लेने वाली छात्राओं को यह सुविधा नहीं मिल रही, जिसके कारण आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की छात्राओं के लिए निजी संस्थानों में पढ़ाई महंगी साबित हो रही है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रियायत निजी संस्थानों में भी लागू की जाए तो तकनीकी शिक्षा में छात्राओं की भागीदारी और बढ़ सकती है।
प्रबंधन ने तेज किए प्रयास
प्राचार्य हेमंत डंडोतिया ने बताया कि फिलहाल प्रवेश की संख्या अपेक्षा से कम है, लेकिन तीसरे और चौथे चरण के दौरान अधिक से अधिक विद्यार्थियों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि 25 जुलाई तक पंजीयन और चॉइस फिलिंग जारी रहेगी, इसलिए इच्छुक विद्यार्थी समय रहते आवेदन कर तकनीकी शिक्षा का लाभ उठा सकते हैं।
आईटीआई प्रबंधन को उम्मीद है कि आगामी चरणों में प्रवेश बढ़ेंगे, लेकिन फिलहाल आधे से अधिक सीटों का खाली रहना यह संकेत जरूर देता है कि तकनीकी शिक्षा के प्रति युवाओं की रुचि बढ़ाने के लिए केवल सुविधाएं देना ही नहीं, बल्कि व्यापक जनजागरूकता भी जरूरी है।

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