शिवपुरी। एक चपरासी के कारण कंगाल हुआ शिवपुरी का जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मे हुए 80 करोड के घोटाले का असर खाता धारको की निजी जिंदगी पर पड रहा है। खाताधरको को लाखो रूपए जमा है लेकिन उनकी इमरजेंसी मे उनका पैसा नही मिलता है। जनसुनवाई, सीएम हेल्पलाइन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाने के बाद भी राहत नहीं मिलने पर 17 खाताधारकों ने सामूहिक रूप से ग्वालियर हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने 7 जुलाई 2026 की सुनवाई में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक से सात दिन के भीतर बैंक की पूरी वित्तीय स्थिति का ब्यौरा मांगा है। अदालत ने पूछा है कि बैंक के पास वर्तमान में कितनी राशि उपलब्ध है, कुल देनदारियां कितनी हैं और ग्राहकों को भुगतान करने की क्या नीति अपनाई जा रही है।
चार साल पहले हुआ था 80.56 करोड़ का गबन
जानकारी के अनुसार वर्ष 2022 में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की कोलारस शाखा में चपरासी राकेश पाराशर पर तत्कालीन महाप्रबंधक और सीबीएस प्रभारी की कथित मिलीभगत से 80.56 करोड़ रुपए के गबन का आरोप लगा था। मामला आज भी पुलिस जांच में लंबित है। इस घोटाले के बाद बैंक की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती चली गई। इसका सबसे बड़ा नुकसान उन हजारों खाताधारकों को उठाना पड़ रहा है, जिनकी जीवनभर की जमा पूंजी बैंक में फंसी हुई है।
अपना ही पैसा निकालने के लिए भटक रहे लोग
बैंक के सामने सबसे बड़ी समस्या नकदी की कमी है। खाताधारकों का आरोप है कि उन्हें सप्ताह में सिर्फ एक दिन सीमित राशि दी जाती है। कई बार तो एक-एक या दो-दो हजार रुपए देकर वापस लौटा दिया जाता है। इससे इलाज, बच्चों की पढ़ाई, शादी और कारोबार जैसे जरूरी काम बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
बीमारी के लिए मिले थे 5 लाख, बाकी पैसा आज भी बैंक में फंसा
खाताधारक दौलत राठौर बताते हैं कि बीमारी के इलाज के लिए उन्हें बड़ी मुश्किल से 5 लाख रुपए मिले थे, जबकि आज भी उनके खाते में 15 से 16 लाख रुपए जमा हैं।उन्होंने बताया कि अब बैंक सोमवार को केवल एक-एक हजार रुपए दे रहा है। जनसुनवाई में शिकायत करने और नेताओं को आवेदन देने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला।
बेटी की शादी भी बैंक के भरोसे अटक गई
एक अन्य खाताधारक वीरेंद्र जैन ने बताया कि बेटी की शादी के लिए बैंक से बड़ी मशक्कत के बाद 5 लाख रुपए मिल सके। उसके बाद कभी 40 हजार, तो कभी 50 हजार रुपए दिए गए। उन्होंने बताया कि उनके खाते में अभी भी करीब 10 लाख रुपए जमा हैं। 17 खाताधारकों का दो करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान बैंक पर बकाया है, इसलिए सभी ने मिलकर हाईकोर्ट की शरण ली।
कारोबार ठप, परिवार चलाना मुश्किल
महेंद्र रावत का कहना है कि पहले वे कपड़े का कारोबार करते थे। उनके बैंक खाते में दो लाख रुपए जमा हैं, लेकिन जरूरत के समय बैंक भुगतान नहीं कर रहा। उन्होंने बताया कि सप्ताह में किसी एक दिन सिर्फ एक या दो हजार रुपए मिलते हैं, जिससे परिवार का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है।
355.88 करोड़ किसानों पर बकाया, बैंक पर बढ़ा दबाव
बैंक अधिकारियों के अनुसार जिले की सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को खाद और नगद ऋण दिया गया था, लेकिन किसानों पर अभी भी 355.88 करोड़ रुपए की वसूली बाकी है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसान समय पर ऋण जमा करना शुरू करें तो बैंक की वित्तीय स्थिति सुधर सकती है और खाताधारकों को भी भुगतान मिलने लगेगा। जानकारों का मानना है कि चुनावी वर्षों में बार-बार होने वाली कर्जमाफी की घोषणाओं के कारण भी कई किसानों ने ऋण चुकाने में रुचि नहीं दिखाई, जिससे बैंक पर आर्थिक दबाव बढ़ता गया।
68 करोड़ की वसूली, दूसरी किस्त का इंतजार
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के महाप्रबंधक आर.एस. भदौरिया ने बताया कि किसानों को ऋण चुकाने की समय-सीमा अब 12 माह कर दी गई है। अब तक 68.21 करोड़ रुपए की वसूली हो चुकी है, जबकि 355.88 करोड़ रुपए अभी भी बकाया हैं। इस वर्ष 6.04 करोड़ रुपए का नया ऋण भी वितरित किया गया है। उन्होंने बताया कि शासन से 50 करोड़ रुपए की दूसरी आर्थिक सहायता जारी करने के लिए पत्र भेजा जा चुका है।
दूसरी किस्त नहीं मिलने से फिर बिगड़े हालात
प्रदेश सरकार ने मार्च 2025 में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक को 50 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता दी थी। इसी राशि से बैंक ने किसानों को ऋण वितरण किया और कुछ खाताधारकों को भुगतान भी किया। बैंक प्रबंधन के अनुसार मार्च 2026 में 50 करोड़ रुपए की दूसरी किस्त मिलनी थी, लेकिन अब तक राशि जारी नहीं हुई। इसी कारण बैंक की नकदी व्यवस्था फिर चरमरा गई और खाताधारकों को भुगतान प्रभावित हो गया।
अब हाईकोर्ट की निगरानी में होगी पड़ताल
अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। यदि बैंक अदालत के सामने संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया तो मामले में आगे और सख्त निर्देश जारी हो सकते हैं। दूसरी ओर, वर्षों से अपनी जमा पूंजी के लिए भटक रहे खाताधारकों को उम्मीद है कि न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद उन्हें आखिरकार उनका अपना पैसा वापस मिल सकेगा।

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