शिवपुरी। इस साल मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ा कारण अल-नीनो का असर माना जा रहा है, जिसकी वजह से मानसूनी हवाएं कमजोर हो गई हैं। अरब सागर से आने वाली नमी वाली हवाएं भी पर्याप्त ताकत नहीं दिखा रही हैं, जिससे बादलों को पर्याप्त नमी नहीं मिल पा रही है। इसके अलावा अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में कोई मजबूत कम दबाव का क्षेत्र (लो प्रेशर सिस्टम) नहीं बन रहा है, जो मानसून को आगे बढ़ाने में मदद करता है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार बादलों और बारिश की गतिविधियों को प्रभावित करने वाला मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (एमजेओ) भी फिलहाल कमजोर स्थिति में है। वहीं उत्तर-पश्चिम दिशा से आने वाली गर्म और शुष्क हवाएं मानसूनी बादलों की सक्रियता को कम कर रही हैं। इन सभी कारणों से देश के कई हिस्सों में सामान्य से 40 से 50 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है और मानसून की गति भी धीमी बनी हुई है।
अल-नीनो के कारण शिवपुरी जिले में इस वर्ष बादल समय पर नही पहुंचे है,इस कारण बादल बरस नही सके और इससे किसानो की चितांए बढ गई है। जून का अंतिम सप्ताह शुरू होने के बावजूद जिले में प्री-मानसून बारिश भी नहीं हो सकी है, जिससे खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बन पाई और किसान समय पर बोवनी शुरू नहीं कर पा रहे हैं।
स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले वर्ष 24 जून तक जिले में 221.21 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी, जबकि इस वर्ष इसी अवधि तक केवल 33.59 मिमी बारिश हुई है। यानी पिछले साल की तुलना में इस बार करीब छह गुना कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। बारिश की कमी और लगातार बढ़ते तापमान ने किसानों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
खरीफ फसलों की बुवाई पर असर
जिले में इस समय मूंगफली, सोयाबीन, मक्का और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई का प्रमुख समय चल रहा है। इसके साथ ही टमाटर सहित सब्जियों की पौध रोपाई भी इसी अवधि में की जाती है। लेकिन पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण किसान खेत तैयार करने के बावजूद बुवाई शुरू नहीं कर पा रहे हैं। वर्तमान में जिले का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। गर्मी और उमस के कारण खेतों की नमी तेजी से खत्म हो रही है, जिससे फसलों की शुरुआती वृद्धि प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
11 सालों में सबसे कमजोर शुरुआत में शामिल यह सीजन
बारिश के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2025 में 24 जून तक 221.21 मिमी बारिश हुई थी, जबकि वर्ष 2026 में यह आंकड़ा घटकर मात्र 33.59 मिमी रह गया है। पिछले एक दशक के आंकड़ों की तुलना में भी इस बार मानसून की शुरुआत कमजोर मानी जा रही है।
4.20 लाख हेक्टेयर में बोवनी का लक्ष्य
कृषि विभाग ने इस वर्ष खरीफ सीजन में जिले में 4 लाख 20 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र में बोवनी का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसमें प्रमुख रूप से मूंगफली – 1,33,500 हेक्टेयर, मक्का – 1,33,500 हेक्टेयर,धान – 79,000 हेक्टेयर,सोयाबीन – 50,000 हेक्टेयर,उड़द – 15,500 हेक्टेयर शामिल हैं। हालांकि बारिश की कमी के कारण इस लक्ष्य को हासिल करना चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है।
कृषि वैज्ञानिकों ने दी वैकल्पिक फसलों की सलाह
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एम.के. भार्गव ने बताया कि सामान्य तौर पर 20 जून तक मूंगफली और सोयाबीन की बुवाई शुरू हो जाती है। मक्का बोवनी और टमाटर रोपाई का कार्य भी इसी अवधि में होता है। लेकिन इस बार बारिश नहीं होने और तापमान अधिक रहने से फसलों को नुकसान का खतरा है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि वे घबराएं नहीं और वैकल्पिक रूप से कम पानी वाली दलहन एवं तिलहन फसलों जैसे उड़द और तिल की खेती पर भी विचार करें।
कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा
किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के उप संचालक मुनेश शाक्य ने बताया कि कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए किसानों को धान जैसी अधिक पानी वाली फसलों के बजाय उड़द, बाजरा, ज्वार और अन्य कम पानी वाली फसलें अपनाने की सलाह दी जा रही है। इससे कम वर्षा की स्थिति में भी उत्पादन प्रभावित होने की संभावना कम रहेगी।
अगले सप्ताह तक राहत की उम्मीद
आईएमडी भोपाल के मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार मानसून मध्यप्रदेश में प्रवेश कर चुका है और धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। अगले 48 से 72 घंटों में परिस्थितियां अनुकूल होने पर मानसून की सक्रियता बढ़ सकती है। उन्होंने बताया कि अगले 5 से 6 दिनों में मौसम में सुधार की उम्मीद है। फिलहाल 28 जून तक मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने की संभावना है, हालांकि झंझावात के प्रभाव से कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है।
मानसून की इस सुस्ती ने जिले के हजारों किसानों को इंतजार की स्थिति में ला खड़ा किया है। अब सभी की निगाहें आसमान पर टिकी हैं, क्योंकि समय पर अच्छी बारिश ही खरीफ सीजन की सफलता तय करेगी।

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