शिवपुरी,14 साल से भटक रही है स्वर्गवासी शिक्षक की ​पत्नी अनुकंपा नियुक्ति के लिए, क्या वनवास समाप्त होगा

vikas
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शिवपुरी।
शिवपुरी कलेक्टर अर्पित वर्मा की जनसुनवाई में आज एक ऐसा मामला सामने आया जिसे देखकर वह चौक गए और तत्काल जिला​ शिक्षा अधिकारी से इस मामले को लेकर निर्देश दिए। मामला था 14 साल से भटक रही एक विधवा महिला के बेटे की अनुकंपा नियुक्ति का। कोलारस से शिवपुरी आई एक स्वर्गवासी शिक्षक की पत्नी ने बताया कि वह अपने बेटे की अनुकंपा नियुक्ति को लेकर लगातार 15 साल से भटक रही हूं और  सैकडो वार इस कलेक्ट्रेट की चौखट पर आ चुकी हूं लेकिन कोई हल नहीं निकला है। अब विभाग मेरे बेटे की नियुक्ति को नियमों में उलझा रहा है।

कोलारस संत फार्म के पास स्टेशन रोड पर निवास करने वाली ​स्वर्गवासी शिक्षक की पत्नी ने बताया ममता शाक्य अपने बेटे मिलन शाक्य पुत्र स्वर्गीय महेश शाक्य के साथ कलेक्ट्रेट जनसुनवाई में आवेदन पहुंची थी। ममता ने बताया कि मेरे पति महेश कुमार शाक्य ग्राम भदेनी स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर पदस्थ थे। शासकीय सेवा में रहते हुए उनका निधन 2012 में हो गया था। पति के निधन के बाद  परिवार की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई और अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया।

2013 में दिया गया था पहला आवेदन
ममता ने कहा कि पति के निधन के बाद वर्ष 2013 में जिला शिक्षा कार्यालय शिवपुरी में अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया था, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद स्वयं मिलन शाक्य ने 9 फरवरी 2017 को दोबारा आवेदन दिया, लेकिन वह भी लंबित बना हुआ है। कई वर्षों से विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद उसे कोई राहत नहीं मिली है।

परीक्षा नहीं होने से अटका मामला
स्वर्गवासी शिक्षक के पुत्र मिलन शाक्य का कहना है कि अनुकंपा नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित आवश्यक परीक्षाएं लंबे समय तक आयोजित नहीं हुईं। वर्ष 2011 के बाद लंबे समय तक परीक्षा नहीं होने के कारण उसका मामला आगे नहीं बढ़ सका और समय सीमा निकल जाने का हवाला देकर प्रकरण निरस्त कर दिया गया। युवक का कहना है कि इसमें उसकी कोई गलती नहीं थी, क्योंकि भर्ती और परीक्षा आयोजित करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी थी।

नियमों का हवाला देकर मांगा न्याय
अपने आवेदन में मिलन शाक्य ने संभागीय संयुक्त संचालक लोक शिक्षण के एक परिपत्र का उल्लेख करते हुए कहा है कि नियमानुसार सात वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जा सकती है। उन्होंने यह भी दावा किया है कि प्रदेश के अन्य जिलों में ऐसे उदाहरण मौजूद हैं, जहां निर्धारित अवधि के बाद भी पात्र आवेदकों को अनुकंपा नियुक्ति दी गई है। उन्होंने खंडवा जिले के एक मामले का हवाला देते हुए कहा कि वहां एक महिला आवेदक को सात वर्ष बाद भी अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की गई थी।

प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की मांग
मिलन शाक्य ने प्रशासन से मांग की है कि उसके आवेदन की शीघ्र सुनवाई कर लंबित प्रकरण का निराकरण किया जाए। उनका कहना है कि परिवार लंबे समय से रोजगार की उम्मीद लगाए बैठा है और अब उन्हें न्याय मिलने की अपेक्षा है। युवक ने कलेक्टर और शिक्षा विभाग के अधिकारियों से अनुरोध किया है कि नियमों के अनुरूप उसके मामले की समीक्षा कर उसे अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जाए, ताकि परिवार को आर्थिक संबल मिल सके।

वर्षों से लंबित मामलों पर उठे सवाल
यह मामला एक बार फिर सरकारी विभागों में लंबित पड़े अनुकंपा नियुक्ति प्रकरणों को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को त्वरित राहत देने के उद्देश्य से बनाई गई व्यवस्था में वर्षों की देरी परिवारों के लिए बड़ी परेशानी बन जाती है। अब देखना होगा कि प्रशासन मिलन शाक्य के आवेदन पर क्या निर्णय लेता है और उसे कब तक राहत मिल पाती है।

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