पिछोर। देश की स्वतंत्रता संग्राम की महान वीरांगना और प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन की अमर नायिका महारानी लक्ष्मीबाई का बलिदान दिवस पूरे देश में श्रद्धा, सम्मान और गौरव के साथ मनाया गया। विभिन्न स्थानों पर उनकी प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया गया, लेकिन पिछोर नगर में उनके सम्मान को लेकर दिखाई गई उदासीनता चर्चा का विषय बन गई है।
नगर के प्रमुख और हृदय स्थल माने जाने वाले महारानी लक्ष्मीबाई चौराहा (डांक बंगला चौराहा) स्थित उनकी प्रतिमा पर बलिदान दिवस के अवसर पर न तो कोई प्रशासनिक कार्यक्रम आयोजित किया गया और न ही किसी जनप्रतिनिधि, राजनीतिक दल अथवा सामाजिक संगठन की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की गई। पूरे दिन प्रतिमा स्थल सूना दिखाई दिया और शाम तक वहां दीप प्रज्ज्वलन जैसी परंपरागत गतिविधि भी नहीं हुई।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि महारानी लक्ष्मीबाई केवल एक ऐतिहासिक चरित्र नहीं, बल्कि साहस, त्याग, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनीं। ऐसे में उनके बलिदान दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर नगर में स्थापित उनकी प्रतिमा की उपेक्षा लोगों को खटक रही है।
नगरवासियों का मानना है कि यदि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से प्रतिमा स्थल की विशेष साफ-सफाई करवाई जाती, फूल-मालाओं से सजावट की जाती तथा प्रकाश व्यवस्था और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाते, तो यह वीरांगना के प्रति सच्चा सम्मान होता। लेकिन पूरे दिन प्रतिमा स्थल पर किसी प्रकार की विशेष गतिविधि नजर नहीं आई, जिससे लोगों में निराशा और नाराजगी देखी गई।
लोगों ने यह भी कहा कि नगर में विभिन्न राष्ट्रीय पर्वों, महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, लेकिन देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाली महारानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर किसी भी स्तर पर आयोजन नहीं होना चिंताजनक है। उनके अनुसार यह केवल एक प्रतिमा की अनदेखी नहीं, बल्कि उस गौरवशाली इतिहास और बलिदान की उपेक्षा है जिसने देश को स्वतंत्रता की राह दिखाई।
इस घटना के बाद नगर में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। नागरिकों ने प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों से मांग की है कि भविष्य में राष्ट्रनायकों और वीरांगनाओं के सम्मान से जुड़े अवसरों पर प्रतिमा स्थलों की नियमित साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और श्रद्धांजलि कार्यक्रम सुनिश्चित किए जाएं। उनका कहना है कि नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करने के लिए ऐसे आयोजन आवश्यक हैं।
महारानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर पिछोर में दिखाई गई यह उदासीनता अब नगरवासियों के बीच चर्चा और असंतोष का विषय बन गई है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने और वीरांगना के सम्मान में गरिमामय आयोजन सुनिश्चित किए जाएं।

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