शिवपुरी। लगभग एक दशक तक चले चेक बाउंस मामले में शिवपुरी की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए हैदराबाद स्थित कंपनी की डायरेक्टर महिला को दोषी ठहराया है। न्यायालय ने निसर्ग बायोसाइंसेज प्राइवेट लिमिटेड की प्रोपराइटर एवं डायरेक्टर अश्विनी गूती को 6 माह के सश्रम कारावास तथा 18 लाख 37 हजार 910 रुपए प्रतिकर राशि अदा करने की सजा सुनाई है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित प्रतिकर राशि जमा नहीं की जाती है तो अभियुक्ता को एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
2015 में हुआ था जड़ी-बूटी का सौदा
मामला वर्ष 2015 का है। शिवपुरी के प्रतिष्ठित जड़ी-बूटी व्यवसायी स्वर्गीय राजकुमार जैन, संचालक महावीर जड़ी-बूटी आयुर्वेद भवन, को हैदराबाद स्थित निसर्ग बायोसाइंसेज प्राइवेट लिमिटेड की ओर से जड़ी-बूटी की आपूर्ति का ऑर्डर प्राप्त हुआ था।
अदालती अभिलेखों के अनुसार कंपनी की डायरेक्टर अश्विनी गूती ने 10 हजार किलोग्राम गम (औषधीय उत्पाद) की मांग करते हुए परचेज ऑर्डर भेजा था और भुगतान के लिए 30 दिनों के भीतर चेक देने का आश्वासन दिया था। इसके बाद राजकुमार जैन ने दिसंबर 2015 में लगभग 9 लाख 30 हजार 302 रुपए मूल्य की 5067 किलोग्राम जड़ी-बूटी ट्रांसपोर्ट के माध्यम से हैदराबाद भेजी थी।
भुगतान के लिए दिया चेक, लेकिन बैंक ने कर दिया निरस्त
माल प्राप्त होने के बाद कंपनी की ओर से भुगतान के लिए चेक जारी किया गया। जब राजकुमार जैन ने चेक को अपने बैंक खाते में जमा कराया तो फरवरी 2016 में बैंक ने उसे राशि अपर्याप्त (Insufficient Funds) बताते हुए वापस लौटा दिया।
इसके बाद नियमानुसार कानूनी नोटिस भेजा गया, लेकिन निर्धारित समय सीमा में भी भुगतान नहीं किया गया। मजबूर होकर व्यवसायी ने वर्ष 2016 में न्यायालय की शरण ली और चेक बाउंस का परिवाद प्रस्तुत किया।
व्यवसायी की मौत के बाद भी परिवार ने नहीं छोड़ी न्याय की लड़ाई
इस मामले का सबसे भावनात्मक पहलू यह रहा कि न्याय की यह लड़ाई परिवादी राजकुमार जैन अपने जीवनकाल में पूरी नहीं देख सके। वर्ष 2025 में उनके निधन के बाद उनकी पत्नी सुलोचना जैन ने कानूनी वारिस के रूप में प्रकरण की पैरवी जारी रखी। उधर, अभियुक्ता अश्विनी गूती भी लंबे समय बाद न्यायालय में उपस्थित हुईं और जमानत कराई। इसके बाद दोनों पक्षों की ओर से साक्ष्य और दस्तावेज प्रस्तुत किए गए।
अदालत ने माना परिवादी पक्ष का दावा
मामले की सुनवाई के दौरान परिवादी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गजेन्द्र सिंह यादव ने दस्तावेजी साक्ष्यों, न्यायिक दृष्टांतों और कानूनी तर्कों के आधार पर अपना पक्ष मजबूती से रखा। उनके साथ अधिवक्ता अशपाक खान और अजय शाक्य ने भी सहयोग किया।
सभी साक्ष्यों और परिस्थितियों का परीक्षण करने के बाद न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी, शिवपुरी ने अभियुक्ता अश्विनी गूती को दोषी करार देते हुए छह माह के सश्रम कारावास और 18.37 लाख रुपए से अधिक प्रतिकर राशि अदा करने का आदेश सुनाया।
कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण संदेश
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उन मामलों में महत्वपूर्ण माना जाएगा, जहां व्यापारिक लेन-देन के बाद चेक जारी किए जाते हैं लेकिन भुगतान नहीं किया जाता। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि चेक जारी करने के बाद भुगतान से बचना कानूनन गंभीर अपराध है और दोष सिद्ध होने पर कारावास के साथ आर्थिक दंड भी भुगतना पड़ सकता है।
करीब दस वर्षों तक चली इस कानूनी जंग का अंत आखिरकार न्यायालय के फैसले के साथ हुआ, जिसने न केवल परिवादी परिवार को राहत दी बल्कि व्यापारिक लेन-देन में विश्वास और कानूनी जवाबदेही का भी एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है।

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