शिवपुरी। शिवपुरी शहर के जिला कलेक्ट्रेट कार्यायल पर बीते मंगलवार को हुई जनसुनवाई में कुछ आदिवासी अपनी जमीन पर यादवों के कब्जे की शिकायत लेकर पहुंचे। ग्रामीणों का कहना हैं कि हमारी पट्टे की जमीन पर पटवारी की सांठगांठ से गांव के दो यादवों ने उस शासकीय जमीन की रजिस्ट्री करा ली हैं, ग्रामीणों का कहना हैं कि जब हम जमीन की नकल निकलवाने पहुंचे तो हमारी जमीन यादवों के नाम बताई जा रही हैं अब यह कैसे संभव हो सकता हैं कि पट्टे की जमीन की रजिस्ट्री हो जाये,लेकिन ऐसा पटवारी और बड़े—बड़े अधिकारियों की मिली जुली भगत से ऐसा संभव हुआ हैं। हम गरीब आदिवासियों को इसी प्रकार से लूटा जा रहा हैं कोई भी ऐसे दबंग हम पर दबाव बनाकर हमारी जमीन पर खेती करने लगते हैं।
जानकारी के अनुसार पंचू आदिवासी व अमर सिंह आदिवासी ग्राम रेंजाघाट खजूरी, तहसील बदरवास ने बताया कि ग्राम रेंजाघाट में स्थित सर्वे नंबर 179 की कृषि भूमि शासन द्वारा उन्हें पट्टे पर आवंटित की गई थी। नियमतः यह भूमि विक्रय से वर्जित श्रेणी में आती है। इसके बावजूद, गाँव के ही दबंग राजदीप और रामपाल यादव ने कथित रूप से हल्का पटवारी कल्पना परिहार के साथ सांठगांठ की और धोखाधड़ी से इस जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम करवा ली।
पीड़ित ग्रामीणों का कहना है यह जमीन हमारे परिवार के भरण-पोषण का एकमात्र जरिया है। जो भूमि कानून बेची ही नहीं जा सकती, पटवारी महोदय ने नियमों को ताक पर रखकर उसकी रजिस्ट्री कैसे कर दी, इसकी निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है।
निष्पक्ष जांच और कब्जा मुक्त कराने की मांग
पीड़ितों ने 16 जून 2026 को कलेक्टर महोदय के समक्ष गुहार लगाते हुए मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, आरोपी राजदीप और रामपाल यादव के चंगुल से उनकी सर्वे नंबर 179 की भूमि को तत्काल प्रभाव से कब्जा मुक्त कराया जाए। पीड़ित किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
वहीं समस्त आदिवासियों का कहना हैं कि 20 बीघा जमीन हैं, यह इस प्रकार का बड़ा भ्रष्टाचार बिना अधिकारियों की मिली—जुली सांठगांठ के बिना संभव ही नहीं हैं राजदीप और रामपाल यादव ने पटवारी मेडम कल्पना परिहार को मन चाही रिश्वत दे दी हैं,इसी कारण शासकीय जमीन को बेच दिया गया हैं।

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