शिवपुरी कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देर्शो को फॉलो नही करते यह पटवारी, क्या है मिल लो का अर्थ

vikas
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शिवपुरी।
शिवपुरी कलेक्टर अर्पित वर्मा अपन ​बैठको मे अपने अधीनस्थ अधिकारियो और कर्मचारियो को लगतार निर्देश दे रहे है कि किसानो का काम बिना किसी परेशानी के हो समय पर सीमाकन के मामले निबटाए जाए,लेकिन शिवपुरी जिले के कुछ पटवारी  कलेक्टर अर्पिेत वर्मा के निर्देशो को फ्लो नही कर रहे है,किसानो के सीमाकंन के आदेश के बाद भी 20 दिनो तक सीमाकंन नही हुआ है,वही इस लेट ततीफी के पीछे मिल लो शब्द समाने आया हैं। 

तहसीलदार का आदेश हवा में, 20 दिन बाद भी नहीं जागी नींद
जानकारी के अनुसार, नेगमा और धंधेरा जरिया के कई किसानों ने अपने निजी खेतों के सीमांकन (नाप-जोख) के लिए तहसीलदार रन्नौद को आवेदन दिया था। चूंकि खेतों में इस समय कोई फसल नहीं थी, इसलिए तहसीलदार महोदय ने मामले की गंभीरता को समझते हुए पटवारियों को तुरंत सीमांकन करने और 3 जून 2026 तक अपनी रिपोर्ट सौंपने का लिखित आदेश दिया था। किसानों ने शासन द्वारा तय की गई फीस भी जमा कर दी। लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि सीमांकन की आखिरी तारीख बीते 20 दिन से ज्यादा का समय हो चुका है, पर हल्के के पटवारी मृगेंद्र राजपूत और आलोक कुमार दोहरे के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी है।

मिल लो, तो काम हो जाएगा,क्या है इस मिलने का मतलब
पीड़ित किसान सुनील गुर्जर ने मीडिया के सामने आकर अपना दर्द बयां किया है। किसान का कहना है कि मेरे पिता सुगर सिंह, माता विद्या बाई और मेरे खेतों के सीमांकन का आदेश 22 मई 2026 को ही हो गया था। पटवारी आलोक कुमार दोहरे और मृगेंद्र राजपूत को 3 जून तक काम पूरा करना था। जब हम पटवारी से कहते हैं, तो उनका सीधा जवाब होता है कि एक बार आकर मिल लो, फिर काम कर देंगे। अब इस मिलने का सीधा और साफ मतलब तो यही निकाला जाएगा कि जब तक पटवारी महोदय को ऊपर की दान-दक्षिणा (रिश्वत) नहीं मिलेगी, तब तक वो कदम आगे नहीं बढ़ाएंगे।

बारिश सिर पर, अगली फसल पर भी संकट
किसानों की चिंता जायज है। मानसून की दस्तक के साथ ही खेतों में बुआई का काम शुरू होने वाला है। अगर एक बार बारिश हो गई और किसानों ने बीज बो दिए, तो अगली फसल कटने तक सीमांकन का काम ठप हो जाएगा। ऐसे में सवाल उठता है कि जब किसानों ने सारी कागजी कार्रवाई पूरी कर दी, फीस भर दी, तो फिर इन दो हल्कों के पटवारी क्यों कुंडली मारकर बैठे हैं? धंधेरा जरिया के ग्रामीणों का तो यहाँ तक आरोप है कि पटवारी मृगेंद्र राजपूत की दादागिरी के चलते वहाँ आज तक एक भी सीमांकन ठीक से नहीं हो पाया है।

किसान सुनील गुर्जर निवासी नेगमा का कहना है कि तहसीलदार महोदय के आदेश के बाद भी हमारी फाइलें दबी पड़ी हैं। पटवारी मृगेंद्र राजपूत और आलोक दोहरे हमें बेवजह परेशान कर रहे हैं। बारिश सिर पर है, हमें बुआई करनी है। ऐसा लगता है कि वरिष्ठ अधिकारियों का अपने मातहतों पर कोई कंट्रोल ही नहीं रह गया है।

इधर पटवारी आलोक कुमार दोहरे, पटवारी नेगमा हल्का-119 का कहना हैं कि मेरे पास करीब 40 किसानों के सीमांकन के आदेश हैं और मैं हर रोज सीमांकन का काम कर रहा हूँ। अब किसान क्यों शिकायत कर रहे हैं, यह मेरी समझ से परे है।

अब देखना दिलचस्प होगा...
पटवारी भले ही अपने बचाव में दलीलें दे रहे हों, लेकिन सवाल यह है कि अगर काम रोज़ हो रहा है, तो 3 जून की समय सीमा निकलने के बाद भी किसान दफ्तरों के चक्कर क्यों काट रहे हैं? अब देखना यह होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद जिम्मेदार उच्च अधिकारी क्या एक्शन लेते हैं और परेशान किसानों को न्याय कब तक मिलता है।

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