शिवपुरी। शिवपुरी जिले में मानसून ने सोमवार को एक बार फिर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। सुबह करीब 10 बजे अचानक मौसम ने करवट ली, तेज झंझावत के साथ घने बादल छा गए और रुक-रुककर करीब तीन घंटे तक बारिश होती रही। दोपहर लगभग एक बजे तक बारिश का सिलसिला जारी रहा। बारिश से लोगों को गर्मी से कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन शहर की बदहाल जल निकासी व्यवस्था भी उजागर हो गई। नालियां उफनाने से गंदा पानी सड़कों पर बहने लगा और कई स्थानों पर कचरा फैल जाने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
मौसम विभाग के अनुसार जिले में 3 जुलाई तक झंझावत और रुक-रुककर बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। हालांकि जिले के अधिकांश क्षेत्रों में अब भी खेती के लिए पर्याप्त वर्षा नहीं हुई है, जिससे किसान चिंतित हैं।
सिर्फ शिवपुरी और कोलारस में बोवनी लायक बारिश
कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि 100 मिमी या उससे अधिक बारिश होने पर ही बोवनी करें। जिले में फिलहाल केवल शिवपुरी तहसील में 118.20 मिमी और कोलारस में 110 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जिससे इन दोनों क्षेत्रों में बोवनी का कार्य शुरू हो गया है।
इसके विपरीत पोहरी, बैराड़, नरवर, करैरा, पिछोर, बदरवास और खनियाधाना तहसीलों में अभी 100 मिमी से कम बारिश हुई है। इनमें सबसे खराब स्थिति पिछोरकी है, जहां अब तक महज 2 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। ऐसे मेंइन क्षेत्रों के किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
तापमान में गिरावट, लेकिन उमस से राहत नहीं
बारिश के कारण दिन के तापमान में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। रविवार को अधिकतम तापमान 35.5 डिग्री सेल्सियस था, जो सोमवार को घटकर 34 डिग्री सेल्सियस रह गया। वहीं न्यूनतम तापमान में मामूली बढ़ोतरी के साथ 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बारिश कम होने के कारण वातावरण में नमी बढ़ी हुई है और लोगों को उमस का सामना करना पड़ रहा है।
पिछले साल की तुलना में 4.74 गुना कम बारिश
जिले में बीते 24 घंटे के दौरान औसतन 0.78 मिमी बारिश दर्ज की गई, जिसमें शिवपुरी शहर में 6 मिमी और बैराड़ में 1 मिमी वर्षा हुई। अब तक जिले में 59.16 मिमी औसत वर्षा रिकॉर्ड की गई है, जो सामान्य औसत वर्षा का केवल 7.25 प्रतिशत है।
यदि पिछले वर्ष से तुलना करें तो स्थिति काफी चिंताजनक नजर आती है। 29 जून 2025 तक जिले में 280.64 मिमी बारिश हो चुकी थी, जबकि इस वर्ष अब तक केवल 59.16 मिमी वर्षा दर्ज हुई है। यानी इस बार जिले में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 4.74 गुना कम बारिश हुई है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है और अब सभी की निगाहें अगले दो दिनों में मानसून की सक्रियता पर टिकी हुई हैं।

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