शिवपुरी। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की शिक्षा अब केवल किताबों और पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगी। बच्चों को जीवन की वास्तविक चुनौतियों का सामना करने, सही निर्णय लेने और मानसिक रूप से मजबूत बनने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। राज्य शिक्षा केंद्र ने उमंग हेल्थ एंड वेलनेस कार्यक्रम के तहत कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए जुलाई 2026 से जनवरी 2027 तक का गतिविधि कैलेंडर जारी किया है। इसके तहत प्रत्येक शनिवार विद्यालयों में जीवन कौशल आधारित विशेष कक्षाएं आयोजित की जाएंगी।
इन कक्षाओं की अवधि लगभग 40 से 45 मिनट होगी, जिसमें विद्यार्थियों को तनाव प्रबंधन, भावनात्मक संतुलन, आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच, निर्णय लेने की क्षमता, नशे से बचाव और सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी जाएगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि बदलते सामाजिक और डिजिटल परिवेश में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए ऐसी शिक्षा बेहद आवश्यक है।
जुलाई से जनवरी तक विषयवार होंगे विशेष सत्र
जारी कैलेंडर के अनुसार विद्यार्थियों को स्व-जागरूकता, भावनाओं का प्रबंधन, समानुभूति, पारस्परिक संबंध, प्रभावी संवाद, तनाव प्रबंधन, रचनात्मक चिंतन, समस्या समाधान तथा निर्णय क्षमता विकसित करने से जुड़े सत्रों में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा स्वास्थ्य, स्वच्छता, पोषण, संतुलित आहार और सकारात्मक व्यवहार जैसे विषयों पर भी गतिविधियां आयोजित होंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन विषयों की जानकारी बच्चों को केवल बेहतर विद्यार्थी ही नहीं बल्कि जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनने में भी मदद करेगी। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे अपने व्यक्तिगत तथा सामाजिक जीवन में बेहतर निर्णय लेने में सक्षम बनेंगे।
आरोग्य दूत निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए विद्यालयों में प्रशिक्षित शिक्षकों को आरोग्य दूत की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। ये शिक्षक बच्चों के साथ संवाद, समूह गतिविधियों और व्यवहारिक अभ्यासों के माध्यम से जीवन कौशल विकसित करने का कार्य करेंगे। आरोग्य दूत विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य, सकारात्मक सोच और सामाजिक व्यवहार से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन देंगे।
मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास पर रहेगा फोकस
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों का मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास सुनिश्चित करना है। आज के समय में बढ़ते शैक्षणिक दबाव, प्रतिस्पर्धा और डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के कारण बच्चों में तनाव और व्यवहार संबंधी चुनौतियां बढ़ रही हैं। ऐसे में जीवन कौशल आधारित शिक्षा उन्हें इन परिस्थितियों से बेहतर तरीके से निपटने में सक्षम बनाएगी।
यह पहल सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे बच्चों को न केवल पढ़ाई में बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में सफल होने के लिए आवश्यक कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा।

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