बदरवास। शिवपुरी जिले के कोलारस अनुविभाग के बदरवास थाना सीमा मे आने वाले बदरवास बायपास पर शनिवार रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सड़क किनारे खड़ी एक इको कार अचानक आग का गोला बन गई। कार सवार पांच लोग चाय पीने के लिए ढाबे पर रुके ही थे कि वाहन से धुआं निकलना शुरू हो गया। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, आग ने पूरी कार को अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते आग की ऊंची लपटों ने पूरी गाड़ी को घेर लिया और कुछ ही मिनटों में कार जलकर पूरी तरह राख हो गई। हालांकि सभी यात्री समय रहते बाहर निकल गए, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
जानकारी के अनुसार उज्जैन निवासी मोहम्मद जकरिया अपने साथियों शोएब अहमद, जुनैद वारसी, खालिद कुरैशी और फरदीन के साथ इको कार से पटना जा रहे थे। उनका उद्देश्य पटना स्थित एक वेयरहाउस से खरीदा गया कबाड़ उठाना था। शनिवार रात करीब 8 बजे जब उनकी कार शिवपुरी-गुना फोरलेन स्थित बदरवास बायपास के पास एक ढाबे पर चाय पीने के लिए रुकी, तभी कार के इंजन की ओर से धुआं उठता दिखाई दिया।
शुरुआत में यात्रियों ने धुआं देखकर स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन कुछ ही क्षणों में आग ने विकराल रूप ले लिया। आग इतनी तेजी से फैली कि किसी को कार से सामान निकालने तक का मौका नहीं मिला। कुछ ही देर में पूरी इको कार आग की लपटों में घिर गई और सड़क पर मौजूद लोग भी सहम गए।
घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। कार पूरी तरह जल चुकी थी और उसमें रखा करीब 50 हजार रुपये नकद, चार बैगों में रखा जरूरी सामान तथा अन्य दस्तावेज भी जलकर राख हो गए।
वेयरहाउस का कबाड़ लेने जा रहे थे पटना
मोहम्मद जकरिया के भाई नीलम ने बताया कि उनका परिवार कबाड़ खरीदने और बेचने का कारोबार करता है। पटना के एक वेयरहाउस के क्षतिग्रस्त होने के बाद टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से वहां का कबाड़ खरीदा गया था। निर्धारित समय सीमा 30 जून से पहले कबाड़ उठाना जरूरी था। इसी कारण जकरिया अपने चार साथियों के साथ पटना रवाना हुए थे, लेकिन रास्ते में हुए इस हादसे ने उनकी पूरी यात्रा और व्यापारिक योजना पर पानी फेर दिया।
गनीमत रही कि कार में सवार सभी पांच लोग समय रहते बाहर निकल आए। यदि आग कुछ मिनट पहले चलती कार में लगी होती तो यह हादसा कहीं अधिक भयावह साबित हो सकता था। फिलहाल प्रारंभिक तौर पर आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है, हालांकि वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है।

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