शिवपुरी, आषाढ़ मास का आगाज, हर एक दिन छोड़कर व्रत और त्यौहार, मांगलिक कार्यो पर ब्रेक

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शिवपुरी।
सनातन धर्म में भगवान श्री हरि विष्णु और भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माने जाने वाले आषाढ़ मास का शुभारंभ इस वर्ष 2026 में 30 जून से होगा। पूरे एक माह तक चलने वाले इस धार्मिक काल में देवशयनी एकादशी, जगन्नाथ रथ यात्रा, गुप्त नवरात्र और गुरु पूर्णिमा जैसे कई प्रमुख पर्व मनाए जाएंगे। ज्योतिषाचार्य विकासदीप शर्मा के अनुसार, यह महीना जप, तप, दान, व्रत और आध्यात्मिक साधना का सर्वोत्तम समय माना जाता है, जबकि देवशयनी एकादशी से शुरू होने वाले चातुर्मास के साथ विवाह सहित सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा।

ज्योतिषाचार्य विकासदीप शर्मा के अनुसार कि पंचांग के के गणित से 30 जून से 14 जुलाई तक कृष्ण पक्ष और 15 जुलाई से 29 जुलाई तक शुक्ल पक्ष रहेगा। पूरे माह में 14 से अधिक प्रमुख धार्मिक पर्व और व्रत पड़ेंगे, जिनका सनातन परंपरा में विशेष महत्व है। इन अवसरों पर श्रद्धालु विधि-विधान से भगवान विष्णु और भगवान शिव की आराधना करेंगे।

उन्होंने बताया कि देवशयनी एकादशी आषाढ़ मास का सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु चार माह के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। इसी दिन से चातुर्मास का शुभारंभ होता है। वर्ष 2026 में देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को मनाई जाएगी, जबकि चातुर्मास 25 जुलाई से 20 नवंबर तक रहेगा।

चातुर्मास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। इस अवधि में श्रद्धालु पूजा-पाठ, व्रत, भजन-कीर्तन, सत्संग और धार्मिक अनुष्ठानों में अधिक समय व्यतीत करते हैं। कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवोत्थान एकादशी पर भगवान विष्णु के योग निद्रा से जागृत होने के बाद पुनः सभी मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं।

आषाढ़ मास के प्रमुख व्रत एवं पर्व

30 जून – आषाढ़ मास का शुभारंभ

3 जुलाई – संकष्टी चतुर्थी

10 जुलाई – योगिनी एकादशी

12 जुलाई – मासिक शिवरात्रि एवं प्रदोष व्रत (कृष्ण पक्ष)

14 जुलाई – आषाढ़ अमावस्या

16 जुलाई – जगन्नाथ रथ यात्रा एवं कर्क संक्रांति

22 जुलाई – भड़ली नवमी (अबूझ मुहूर्त)

25 जुलाई – देवशयनी (आषाढी) एकादशी, चातुर्मास प्रारंभ

26 जुलाई – प्रदोष व्रत (शुक्ल पक्ष)

29 जुलाई – गुरु पूर्णिमा एवं आषाढ़ पूर्णिमा व्रत

आषाढ़ मास के आगमन के साथ ही धार्मिक वातावरण और अधिक भक्तिमय हो जाएगा। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, कथा, भजन-कीर्तन और सत्संग के आयोजन होंगे, वहीं श्रद्धालु पूरे श्रद्धाभाव से भगवान विष्णु और भगवान शिव की आराधना कर आध्यात्मिक ऊर्जा और पुण्य की प्राप्ति का प्रयास करेंगे।

ज्योतिषाचार्य की सलाह, इस महीने क्या करें कि चमक जाए भाग्य ?

ज्योतिषाचार्य विकास दीप शर्मा बताते हैं कि आषाढ़ के महीने में किया गया जप, तप, दान और सत्संग कभी निष्फल नहीं जाता। चूंकि इस महीने में गर्मी विदा हो रही होती है और वर्षा ऋतु का आगमन होता है, इसलिए इस समय जल का दान, छतरी का दान, और जरूरतमंदों को अन्न दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

यदि आप मानसिक शांति और जीवन में उन्नति चाहते हैं, तो इस पूरे महीने रोज सुबह विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और शाम को शिव चालीसा का पाठ करें। यह महीना प्रकृति और परमात्मा दोनों से जुड़ने का सर्वश्रेष्ठ अवसर है।

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