शिवपरी। शिवपुरी जिले में शराब माफियाओं का कानून चलता है,अवैध शराब तो गांव गांव बिक ही रही है वही अधिकृत शराब की दुकानो पर भी सरेआम लूट चल रही है। आबकारी विभाग आंखो पर पट्टी बांधकर धृतराष्ट्र बना बैठा है और पब्लिक को लूटने के लिए छोड दिया है। शराब की दुकानों पर एमआरपी से अधिक रेट में शराब बिकने,बिल नहीं दिए जाने और ब्रांडेड कंपनी की शराब मे मिलावट करने की शिकायत लगातार मिल रही है।
जिले की शराब दुकानों पर उपभोक्ताओं से एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने, बिना बिल शराब बेचने और निर्धारित समय के बाद भी बिक्री किए जाने के आरोपों को लेकर एक अधिवक्ता ने मोर्चा खोल दिया है। जिला न्यायालय शिवपुरी एवं मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की अधिवक्ता ऋतु शर्मा ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर पूरे जिले की शराब दुकानों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो जनहित याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि जिले की कई शराब दुकानों पर ग्राहकों को खरीदारी के बाद बिल या रसीद नहीं दी जाती, जिससे उपभोक्ता यह साबित नहीं कर पाते कि उनसे वास्तविक रूप से कितनी राशि वसूली गई। इसके चलते एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने की शिकायतों की जांच भी प्रभावित होती है।
अधिवक्ता ने यह भी कहा है कि आम लोगों के बीच यह धारणा बनी हुई है कि कई स्थानों पर शराब की बिक्री निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से अधिक दरों पर की जा रही है। इसके अलावा कुछ दुकानों पर तय समय समाप्त होने के बाद भी शराब बिक्री जारी रहने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं।
ज्ञापन में एक और गंभीर मुद्दा उठाया गया है। इसमें मांग की गई है कि जिले की सभी शराब दुकानों के आवंटन, लाइसेंसधारकों की स्थिति, भागीदारी संरचना और वास्तविक संचालन की स्वतंत्र जांच कराई जाए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि कहीं प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी एक व्यक्ति या समूह का कई दुकानों पर नियंत्रण तो नहीं है।
अधिवक्ता ने जिला प्रशासन से सभी शराब दुकानों पर कंप्यूटरीकृत बिलिंग व्यवस्था लागू करने, प्रत्येक बिक्री का डिजिटल रिकॉर्ड रखने, सीसीटीवी कैमरों की कार्यशीलता की जांच कराने और कम से कम 90 दिनों तक फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश जारी करने की मांग की है। इसके अलावा शराब दुकानों पर एमआरपी, बिक्री समय, शिकायत हेल्पलाइन नंबर और ऑनलाइन शिकायत के लिए क्यूआर कोड प्रदर्शित करने का सुझाव भी दिया गया है। ज्ञापन की प्रतिलिपि पुलिस अधीक्षक, जिला आबकारी अधिकारी, ग्वालियर संभाग आयुक्त, आबकारी आयुक्त और वाणिज्यिक कर एवं आबकारी विभाग के प्रमुख सचिव को भी भेजी गई है।

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