शिवपुरी। शिवपुरी जिले के करैरा अनुविभाग के दिनारा थाना पुलिस ने 27 साल से फरार हत्या के आरोपी को पकडने में सफलता हासिल की है। यह आरोपी भेष बदलकर पुलिस की आंखो मे धूल झोंक रहा था। जेल काटने से बचने के लिए इस शातिर आरोपी पीले वस्त्रो मे अपनी जिदंगी काट रहा था,आम जन इस स्थाई फरार वारंटी को साधू समझ कर पूजते रहे वह असल मे एक पुलिस से भागा हुआ हत्या और एससी-एसटी एक्ट के मामले में फरार चल रहा था।
20 बीघा जमीन को लेकर विवाद,आपसी सघंर्ष मे हत्या
1999 में बम्हारी गांव में 20 बीघा जमीन को लेकर खूनी संघर्ष हुआ था। इस विवाद में अजीता जाटव की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। मामले में 13 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से 7 को उम्रकैद हुई, 4 महिलाएं बरी हो गईं, जबकि देवपाल और अजब सिंह फरार चल रहे थे। फरारी के दौरान अजब सिंह की मौत हो चुकी थी और देवपाल ही इस केस का आखिरी जीवित फरार आरोपी बचा था।
उत्तर प्रदेश मे भेष बदल कर रह रहा था
हत्या के बाद देवपाल उत्तर प्रदेश भाग गया। बरेली और शाहजहांपुर के गुरुकुलों में उसने खुद को “आचार्य” के रूप में स्थापित कर लिया। कानून से बचने के लिए उसने अपने नाम से “लोधी” सरनेम हटाया और नया आधार कार्ड बनवाकर खुद को “देवपाल आचार्य” लिखवाया। पीले वस्त्र, धार्मिक वेशभूषा और साधु जैसी दिनचर्या ने उसे 27 साल तक पुलिस की नजरों से दूर रखा।
जमीन बेचते ही पुलिस को मिला सुराग
बताया जा रहा है कि जिस विवादित जमीन पर कभी खून बहा था, उसी जमीन को उसने एक साल पहले करीब 22 लाख रुपए में बेच दिया। इस रकम से वह अपने पैतृक गांव लिधौरा, जिला झांसी में गुरुकुल और स्कूल निर्माण की तैयारी कर रहा था। लेकिन मुखबिर की सूचना ने उसका पूरा खेल बिगाड़ दिया।
दिनारा थाना प्रभारी रविंद्र सिंह कुशवाह और एएसआई शैलेंद्र सिंह चौहान के नेतृत्व में पुलिस टीम ने लिधौरा गांव में घेराबंदी कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। वारदात के समय 35 साल का देवपाल अब 62 वर्ष का हो चुका है, लेकिन 27 साल बाद भी कानून ने उसका पीछा नहीं छोड़ा।

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