शिवपुरी। कई बार जिंदगी की भागदौड़, आर्थिक तंगी या मानसिक असमर्थता के कारण लोग अपने परिजनों के अंतिम संस्कार के बाद उनकी अस्थियों को मुक्तिधाम से ले जाना भूल जाते हैं। समय के साथ ये अस्थियां वहीं लावारिस पड़ी रह जाती हैं, मानो किसी अपने के इंतजार में हों। ऐसे बेसहारा दिवंगतों को सनातन परंपरा के अनुसार आत्मशांति दिलाने के लिए अपना घर आश्रम ने एक बेहद संवेदनशील और मानवीय पहल शुरू की है।
आश्रम के संस्थापक गौरव जैन ने संकल्प लिया है कि अब कोई भी अस्थि मुक्तिधाम में लावारिस नहीं छूटेगी। जिन्हें अपने नहीं ले जा सके, उन्हें आश्रम पूरे सम्मान और धार्मिक विधि-विधान के साथ मां गंगा की गोद तक पहुंचाएगा।
जानकारी के अनुसार आश्रम में रहने वाले प्रभुजी जब अपनी जीवन यात्रा पूरी कर ब्रह्मलीन होते हैं, तो उनकी अस्थियों को गौरव जैन स्वयं श्रद्धापूर्वक हरिद्वार ले जाकर गंगा नदी में विसर्जित करते हैं। लेकिन यह सेवा अब सिर्फ आश्रम तक सीमित नहीं रही। शहर के मुक्तिधामों में छोड़ी गई लावारिस अस्थियों की जिम्मेदारी भी आश्रम ने अपने कंधों पर उठा ली है।
हाल ही में मुक्तिधाम पर ऐसी पांच अस्थियां मिलीं, जिन्हें लेने कोई नहीं आया। इनमें कुछ ऐसे लोग थे, जिनके परिजन उन्हें वहीं छोड़ गए थे। गौरव जैन ने आश्रम के दो दिवंगत प्रभुजियों की अस्थियों के साथ इन पांच लावारिस अस्थियों को भी पूरे सम्मान के साथ हरिद्वार पहुंचाया। वहां मां गंगा में विधिवत विसर्जन किया गया और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए शांतिकुंज में पिंडदान भी कराया गया।
यह पहल सिर्फ धार्मिक परंपरा निभाने भर की नहीं, बल्कि समाज को संवेदनशीलता और मानवता का संदेश देने वाली मिसाल बन रही है। जहां लोग अपनों को भूल जाते हैं, वहां कुछ लोग अनजान दिवंगतों को भी सम्मानपूर्वक विदाई देने का दायित्व निभा रहे हैं।
आश्रम ने आमजन से अपील की है कि यदि कहीं कोई असहाय, बीमार, मानसिक रूप से कमजोर या लावारिस व्यक्ति दिखाई दे, तो उसे नजरअंदाज न करें। तुरंत आश्रम की हेल्पलाइन 6260240600 या 9425136115 पर सूचना दें, ताकि जरूरतमंद को सहारा मिल सके।

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