सिंधिया जी भीड तो आपने बुला ली अब जनता की सुध भी ले लो

Updesh Awasthee
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शिवपुरी। जनाक्रोश रैली के बाद स्थानीय कांग्रेस संगठन के पैर जमीन पर नहीं पड़ रहे। प्रबंधन कर लार्ई गई पांच-सात हजार लोगों की भीड़ को 25 हजार का विस्तारित रूप बताकर रैली की सफलता का पैमाना बताया जा रहा है।

यह जाहिर किया जा रहा है कि भाजपा के खिलाफ माहौल तैयार हो चुका है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष से लेकर शहर अध्यक्ष और नपाध्यक्ष सभी आत्म मुग्ध हैं और रैली में उपस्थिति को लेकर प्रत्येक अपनी पीठ ठोक रहा है।

सिंधिया जी भी पीठ थपथपा गये हैं। अब किसे जनता तथा कार्यकर्ता की परवाह है। रैली कराकर संगठन निश्चिंत हो चुका हैं और अपनी कमियों पर काबू पाने की अब किसको जरूरत हैं।

कांग्रेस की यहां सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि सिंधिया के समक्ष उसका चेहरा कुछ होता है और बाद में कुछ अलग। जनाक्रोश रैली में अपने-अपने नम्बर बढ़वाने के लिए संगठन के अलावा बैजनाथ सिंह यादव, रविन्द्र शिवहरे, हरिवल्लभ शुक्ला, भूपेन्द्र यादव आदि ने खूब पसीना बहाया लेकिन इनकी मेहनत को संगठन के खाते में जोड़कर देखा गया।

रैली के लिए जिला कांग्रेस अध्यक्ष के लिए आर्थिक सहयोग नपा अध्यक्ष ने भी किया। इस कारण जनाक्रोश रैली की एक पूरी सफल फिल्म बन गई।

लेकिन धरातल की सच्चाई कुछ अलग है। पिछले कुछ समय से कांग्रेस का स्थानीय संगठन न तो कार्यकर्ताओं और न ही जनता के साथ संवाद कर रहा है। संवाद करे भी तो क्यों? जिला कांग्रेस अध्यक्ष रामसिंह यादव अब उस दौर से ऊपर उठ चुके हैं जब जिलाध्यक्ष पद उन्हें अपनी साख बचाने का एक मात्र माध्यम लग रहा था।

अब तो वह कोलारस के विधायक है। जनपद भी उनके हाथ में हैं। बदरवास जनपद में अध्यक्ष पद पर उनकी सुपुत्री मिथलेश यादव काबिज हैं। ऐसे में संगठन की परवाह कौन करेगा। संगठन में अब रखा ही क्या है सिवाय अपनी गांठ की पूंजी के धन को खर्च करने के।

कई बार वह पद छोडऩे की इच्छा व्यक्त कर चुके हैं। यही हाल शहर कांग्रेस अध्यक्ष राकेश जैन का है। श्री जैन को भी अब यह पद कांटों का ताज लगने लगा है। जिला और शहर संगठन की निष्क्रियता के चलते पार्टी के कार्यकर्ता हताशा की मुद्रा में है। उनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

नगर पालिका भले ही कांग्रेस की है लेकिन नपा के कारण सबसे ज्यादा परेशान कांग्रेस कार्यकर्ता ही बने हुए हैं। नपा की कार्यप्रणाली से हारे हुए पार्षद प्रत्याशियों की बात तो छोडिय़े जीते हुए कांग्रेस पार्षद भी परेशान और त्रस्त हैं तथा कई बार वह अपना आक्रोश जाहिर भी कर चुके है।

यहां तक कि कांग्रेस के पीआईसी सदस्यों में से शायद ही कोई एकाध होगा जो अध्यक्ष से संतुष्ठ हो। कई बार पीआईसी सदस्य इस्माईल खां और आकाश शर्मा बखेड़ा खड़ा कर चुके हैं। नपा अध्यक्ष कुशवाह से जिला कांग्रेस अध्यक्ष रामसिंह यादव की जन संपर्क यात्रा के दौरान सार्वजनिक रूप से तगड़ी भिडंत भी हो चुकी है।

सच्चाई यह है कि नगर पालिका चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मुन्ना लाल कुशवाह इसलिए विजयी हुए थे क्योंकि उस समय की भाजपा परिषद से जनता को नाराजी थी, लेकिन कांग्रेस के सत्ता संभालने के बाद नाराजी की वह खाई और गहरी हुई है।

ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आगे चलकर लोकसभा और विधानसभा चुनाव में इसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ सकता है। लोकसभा चुनाव में शहर से कांग्रेस को 15 हजार मतों से पराजय मिली थी।

इस पराजय के अंतर को कम करने का अभी तक कोई प्रयास हुआ हो ऐसा दूर-दूर तक नजर नहीं आता। कुल मिलाकर जनाक्रोश रैली की सफलता के मुगालते ने अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस की समस्या को बढ़ाने का काम ही किया है। 
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