करैरा नपं चुनाव: साहू को दोनो दलो से आस, कांग्रेस और भाजपा में मंथन जारी

shailendra gupta
शिवपुरी। लगभग 10 सालों से नगर पंचायत करैरा के अध्यक्ष पद पर काबिज साहू दंपत्ति की इस बार भी महत्वाकांक्षा जोर पकड़ रही है। पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष तथा अध्यक्ष पति रजनी साहू के पति कोमल साहू टिकिट के लिये जोर आजमाइश कर रहे हैं, वहीं टिकिट न मिलने पर वे निर्दलीय रूप से मैदान में उतरने के लिये तत्पर हैं।

सूत्र बताते हैं कि भाजपा में अरविंद बेडर और कोमल साहू के बीच टिकिट का फैसला होगा जबकि कांग्रेस में ब्लॉक अध्यक्ष रवि गोयल और वीनस गोयल के बीच टिकिट की दौड़ सीमित है और दोनों ही उ मीदवार टिकिट के लिये हाथ-पैर मार रहे हैं।

भाजपा हल्कों से छन-छनकर आ रही खबरों के अनुसार पार्टी ने अरविंद बेडर को टिकिट देने का मन बना लिया है। उनके नाम की पैरवी जिलाध्यक्ष रणवीर सिंह रावत कर रहे हैं। श्री बेडर का जातिगत आधार भी इस क्षेत्र में काफी प्रबल है। उनकी गहोई वैश्य जाति के लगभग तीन हजार मतदाता हैं। लेकिन यशोधरा खेमे को उनकी उ मीदवारी रास नहीं आ रही है।

 इसी कारण बेडर की उ मीदवारी को रोकने के लिये अचानक पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष कोमल साहू का नाम उभरकर सामने आ गया। हालांकि श्री साहू और उनकी पत्नी रजनी साहू दोनों ही निर्दलीय रूप से चुनाव जीते थे। सूत्रों के अनुसार श्री साहू टिकिट के लिये इतने लालायित हैं कि वह कांग्रेस और भाजपा में से किसी भी दल से टिकिट मिल जाये तो लेने के लिये तत्पर हैं।

यह तय माना जा रहा है कि वह मैदान में उतरेंगे चाहे किसी दल के बैनर तले या फिर निर्दलीय रूप से। लेकिन दस साल तक नगर पंचायत अध्यक्ष रहने के बाद उनके खिलाफ इलाके में एंटीइंक बनसी फेक्टर भी काफी प्रबल है और साहू दंपत्ति का नगर पंचायत अध्यक्ष का कार्यकाल भी कोई खास उल्लेखनीय नहीं रहा तथा जनमानस पर अध्यक्ष के रूप में वह कोई अपनी छाप नहीं छोड़ पाये। ऐसी स्थिति में भले ही वह भाजपा से टिकिट के लिये दावा कर रहे हैं, लेकिन उनके टिकिट मिलने की कुछ संभावना अवश्य है, भले ही उनकी तुलना में श्री बेडर की संभावनाएं अधिक प्रबल हैं।

कांग्रेस में ब्लॉक अध्यक्ष रवि गोयल की उ मीदवारी काफी सशक्त है। इलाके में उनका अच्छा खासा प्रभाव है और वह चुनाव जीतने की क्षमता रखते हैं। वह यदि चुनाव मैदान में उतरे तो तीन हजार से अधिक अल्पसं यक मत जो अभी तक साहू दंपत्ति के खाते में जाते रहे हैं उन्हें मिलेंगे। उनका नकारात्मक पक्ष सिर्फ यह है कि वह दिग्विजय सिंह खेमे से जुड़े हुए हैं और उनकी पैरवी विधायक केपी सिंह कर रहे हैं।

जबकि वीनस गोयल सिंधिया समर्थक हैं, लेकिन उन्हें अपेक्षाकृत कमजोर प्रत्याशी माना जा रहा है। वीनस गोयल को टिकिट मिला तो चुनाव में भाजपा की संभावनाएं काफी प्रबल हो जायेंगी। कल शाम तक यह तय होने की उ मीद है कि अंतत: कांग्रेस और भाजपा से किसे टिकिट मिलता है।

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