स्वयं के आनंद में जीएं तो पा सकते है अपराध से क्षमा: स्वामी आनंद एकांत

shailendra gupta
शिवपुरी। जीवन का आनंद तो हर जगह लिया जा सकता है वह चाहे जेल में हो या जेल के बाहर, बस आवश्यकता है एकांत वातावरण की और जेल से बेहतर स्थान अन्यत्र कहीं मिल ही नहीं सकता, कैदी कभी ये ना सोचें कि हम जेल में क्यों आए बल्कि यहां आए तो अपना जीवन स्वयं के आनंद में जीऐं, यदि ऐसा करने में सफल रहे तो समझो अपने अपने क्रोध को मार लिया और अपराध से क्षमा भी मांग ली,
इसलिए एक-एक पल खुलकर और प्रसन्न होकर जीऐं। कैदियों को खुलकर जीवन जीने का यह मार्ग बता रहे थे ओशो स्वामी आनंद एकांत जो स्थानीय जिला जेल परिसर में कैदियों के बीच ओशो की वाणी का बखान कर कैदियों के जीवन की मनोदशा बदलने पर अपना व्या यान दे रहे थे। इस दौरान कार्यक्रम में जिला जेल के जेलर वरिष्ठ उपाधीक्षक व्ही.एस.मौर्य ने भी कैदियों को ओशो की वाणी में जीवन जीने का आग्रह किया और ध्यान, साधना कर अपने अपराध से दूर रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम में मौजूद स्वामी प्रेमकृष्ण राजेन्द्र जैन, मॉं आनंद मणी, मॉं आयुषी, मॉं मंजू, स्वामी ध्यान निर्दोष रविन्द्र गोयल, स्वामी अन्तर विकास, स्वामी निखिल आनंद गोपाल जी स्वर संगम, स्वामी कृष्णानंद भूपेन्द्र विकल  आदि मौजूद रहे जिन्होंने कैदियों को ओशो के द्वारा बताए जीवन जीने पर जोर दिया। यहां ओशोप्रेमियों ने संगीत की धुनों पर नृत्य करते हुए कैदियों से उनके अपराध को दूर करने का आग्रह किया और कहा कि हमें स्वयं को पहचानने के लिए आंखे बंद कर परमात्मा का ध्यान करना होगा तो हर प्रकार के अपराध से क्षमा मांगी जा सकती है। जेल परिसर में आयोजित इस ध्यान शिविर में पांच ओशो प्रेमियों को सन्यास दीक्षा प्रदान की गई जिसमें विजय परिहार, लल्ला पहलवान, मेहताब सिंह तोमर, पंडित जी व एक अन्य ओशोप्रेमी शामिल है।



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