चुनाव से पहले राठौर समाज की फूट सामने आई

shailendra gupta
शिवपुरी-शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक माखन लाल राठौर के लिए गत दिनों बांकड़े हनुमान मंदिर पर हुआ सामूहिक विवाह सम्मेलन परेशानी का सबब बन गया है। इस सम्मेलन में जिस प्रकार से राठौर समाज के कुछ लोगों द्वारा भाजपा विधायक  और अपने सजातीय माखन लाल राठौर की उपेक्षा की गई उससे राठौर समाज की फूट सबके सामने आ गई।

विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही महीने शेष है और चुनाव से पहले राठौर समाज की यह फूट भाजपा विधायक माखन लाल राठौर के लिए सिरदर्द भरी साबित हो रही है। सूत्र बताते हैं कि माखन लाल राठौर की कार्यप्रणाली से राठौर समाज के ही कई लोग खुश नहीं है। कारण यह है कि राठौर समाज का होते हुए भी माखन लाल राठौर ने अपने कुछ सजातीय लोगों की उपेक्षा की। इसी का परिणाम है कि माखन लाल राठौर के कई विरोधी उनके ही समाज में खड़े हो गए हैं और उनके खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे है। 

चुनाव से पहले आक्रोश के ये स्वर भाजपा के लिहाज से ठीक नहीं है। सूत्र बताते हैं कि एक रणनीति के तहत बांकड़े हनुमान मंदिर पर सामूहिक विवाह सम्मेलन में माखन लाल राठौर की जगह पूर्व विधायक और कांग्रेसी नेता वीरेन्द्र रघुवंशी को मंच पर स्थान दिया गया था। जिस प्रकार से राठौर समाज के सम्मेलन में एक दूसरी जाति के पूर्व विधायक और कांग्रेसी नेता को सम्मान दिया गया उससे यह बात साफ हो गई कि राठौर समाज में माखन लाल राठौर की पकड़ कमजोर हो गई है। 

राठौर समाज में बड़े स्तर पर माखन लाल का विरोध है और आने वाले समय में विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा के लिए माखन लाल का यह विरोध नुकसानदायक होगा। सूत्रों का कहना है कि माखन लाल राठौर की पूर्व पार्षद मानकचन्द्र राठौर से बिल्कुल नहीं पटती है इसके अलावा भी राठौर समाज के कई लोग माखन लाल राठौर के विरोधी है। समाज में यह विरोध कई दिनों से चल रहा है मगर सामूहिक विवाह सम्मेलन में आक्रोश सबके सामने आ गया। 

माखन लाल राठौर अब अपनी इस कमी को छुपाने के लिए बैनर से अपना नाम हटाने की बात कहकर पल्ला झाड़कर इस सम्मेलन से दूरी बनाने की कोशिश कर रहे है मगर समाज के ही कई लोग नेताओं की आपसी प्रतिद्वंदता को ठीक नहीं मान रहे है। राठौर समाज के एक व्यक्ति ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि नेताओं की आपसी गुटबाजी और कलह के कारण समाज का यह कार्यक्रम बदनामी का दाग बन गया। समाज के एक व्यक्ति ने अच्छे भले के लिए सामूहिक विवाह का कार्यक्रम किया था मगर राजनीति इस कार्यक्रम में हावी रही। समाज के ही कुछ नेताओं की आपसी गुटबाजी और कलह ने अच्छे मंसूबों पर पानी फेर दिया। 

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