Shivpuri News: चीतों के घर कूनो में तेंदुओं का कत्लेआम, विशेष न्यायालय शिवपुरी में पेश किया गया शिकारियो को

Lalit Mudgal
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भोपाल।
चीतों के पुनर्वास के लिए दुनिया भर में पहचान बना चुके कूनो राष्ट्रीय उद्यान और उससे लगे जंगलों में तेंदुओं के लगातार शिकार का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आगरा में 10 तेंदुओं की खाल बरामद होने के बाद शुरू हुई जांच ने मध्यप्रदेश के वन क्षेत्रों में सक्रिय अंतरराज्यीय शिकारी गिरोह का पर्दाफाश कर दिया। जांच में खुलासा हुआ कि बरामद 10 तेंदुओं में से 6 का शिकार कूनो वन्यजीव वन मंडल,2 का श्योपुर सामान्य वन मंडल और 2 का चंबल नेशनल पार्क (मुरैना) क्षेत्र में किया गया था।

मध्यप्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) ने इस मामले में श्योपुर के छह और मुरैना के एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों को विशेष न्यायालय, शिवपुरी में पेश किया गया, जहां से उन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में वन्यजीव तस्करी के बड़े नेटवर्क और अन्य शिकार की घटनाओं का खुलासा हो सकता है।

आगरा से शुरू हुई जांच, श्योपुर के जंगलों तक पहुंची
एसटीएसएफ के अनुसार आगरा में तेंदुओं की 10 खाल बरामद होने के बाद अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी गिरोह के मध्यप्रदेश से जुड़े होने की जानकारी मिली। इसके बाद एसटीएसएफ, कूनो वन्यजीव वन मंडल, श्योपुर वन मंडल और मुरैना वन मंडल की संयुक्त टीमों का गठन किया गया।

30 और 31 जुलाई को आरोपियों की निशानदेही पर अलग-अलग जंगलों में शिकार स्थलों की पहचान की गई। यहां से तेंदुओं की बड़ी मात्रा में हड्डियां, अन्य अवशेष और शिकार में इस्तेमाल होने वाले लेग होल्ड ट्रैप (लोहे के फंदे) बरामद किए गए। इससे स्पष्ट हुआ कि शिकारी लंबे समय से योजनाबद्ध तरीके से वन्यजीवों का शिकार कर रहे थे।

तीन दिन तक गांवों में चला सर्च ऑपरेशन
भोपाल से पहुंची एसटीएसएफ की टीम 28 जुलाई को श्योपुर पहुंची और विजयपुर-कराहल क्षेत्र के कूनो से लगे गांवों में लगातार तीन दिन तक तलाशी अभियान चलाया। संदिग्ध ठिकानों पर दबिश दी गई, ग्रामीणों से पूछताछ की गई और गुप्त सूचनाएं जुटाई गईं। इसके बाद कार्रवाई तेज करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

ये आरोपी हुए गिरफ्तार
पुलिस ने इकराम, लज्जाराम, गोपाल, महेश, प्रकाश और हुन्ना निवासी झार बरोदा (तहसील विजयपुर, जिला श्योपुर) तथा मुरैना जिले के हंसई गांव निवासी गम्बर को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और संभावना है कि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भी गिरफ्तारी हो सकती है।

चार साल से कूनो के जंगलों पर शिकारी गिरोहों की नजर
यह मामला एक बार फिर कूनो राष्ट्रीय उद्यान की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। पिछले चार वर्षों में कूनो और श्योपुर के जंगलों से जुड़े कई शिकारी गिरोह पकड़े जा चुके हैं। इन गिरोहों पर तेंदुआ, चीतल, सांभर सहित अन्य वन्यजीवों के शिकार के आरोप लगे हैं। इसके बावजूद शिकारी लगातार जंगलों में सक्रिय रहे, जिससे वन विभाग की निगरानी और गश्त की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल
कूनो राष्ट्रीय उद्यान देश और दुनिया में अफ्रीकी चीतों के पुनर्वास के लिए जाना जाता है। ऐसे संवेदनशील वन क्षेत्र में यदि तेंदुओं का इतने बड़े स्तर पर शिकार होता रहा और उसका पता तब चला जब आगरा में खाल बरामद हुईं, तो यह केवल वन्यजीव तस्करी का मामला नहीं बल्कि जंगलों की सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी गंभीर चेतावनी माना जा रहा है। अब जांच एजेंसियों की नजर इस बात पर है कि इस अंतरराज्यीय नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है तथा वन्यजीवों की तस्करी का यह कारोबार कितने समय से संचालित हो रहा था।

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