शिवपुरी। जिले में इस वर्ष अलनीनो और कमजोर मानसून का सबसे बड़ा असर खेती-किसानी पर देखने को मिल रहा है। समय पर पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसान खरीफ फसलों की बुआई पूरी नहीं कर सके। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में खरीफ फसलों की बोवनी का लक्ष्य 4 लाख 20 हजार 500 हेक्टेयर रखा गया था, लेकिन अब तक केवल 3 लाख 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में ही बोवनी हो सकी है। यानी लक्ष्य के मुकाबले करीब 80 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई नहीं हो पाई, जो लगभग 19 प्रतिशत की कमी दर्शाती है।
बारिश का असमान वितरण किसानों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बना रहा। कहीं आठ-आठ दिन तक बारिश नहीं हुई तो कहीं पांच दिनों तक खेत सूखे पड़े रहे। ऐसे हालात में किसान समय पर खेत तैयार नहीं कर सके और कई क्षेत्रों में बुआई टालनी पड़ी। हालांकि पिछले दो-तीन दिनों से जिले में हो रही अच्छी बारिश खरीफ फसलों के लिए राहत लेकर आई है और किसान अब फसलों की बढ़वार को लेकर उम्मीद लगाए बैठे हैं।
मक्का की फसल सबसे ज्यादा प्रभावित
इस बार सबसे ज्यादा नुकसान मक्का की फसल को हुआ है। कृषि विभाग ने मक्का की 1 लाख 33 हजार 500 हेक्टेयर में बोवनी का लक्ष्य निर्धारित किया था, लेकिन अब तक केवल **90 हजार 352 हेक्टेयर में ही बुआई हो सकी। यानी लक्ष्य का करीब 67.41 प्रतिशत ही पूरा हो पाया और लगभग 32 प्रतिशत क्षेत्र में मक्का की बोवनी नहीं हो सकी। पिछले वर्ष की तुलना में भी इस बार करीब 2 हजार हेक्टेयर कम क्षेत्र में मक्का बोई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मक्का की फसल समय पर बारिश पर सबसे अधिक निर्भर रहती है। शुरुआती दौर में बारिश नहीं मिलने से किसानों ने या तो बुआई टाल दी या फिर दूसरी फसलों का विकल्प चुना।
मूंगफली और अन्य फसलों की स्थिति
मूंगफली की फसल पर बारिश का असर अपेक्षाकृत कम रहा। 1 लाख 33 हजार 500 हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 1 लाख 24 हजार 600 हेक्टेयर में बुआई हो चुकी है, जो लक्ष्य का करीब 93 प्रतिशत है।
इसके अलावा जिले में सोयाबीन की 79 हजार हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 38 हजार 500 हेक्टेयर, धान की 15 हजार 500 हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 22 हजार 447 हेक्टेयर**, जबकि उड़द की 9 हजार हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 5 हजार 101 हेक्टेयर में बोवनी दर्ज की गई है। कम रकबे वाली फसलों में मूंग 2,400 हेक्टेयर, बाजरा 2,341 हेक्टेयर और तिल्ली 850 हेक्टेयर में बोई गई है।
पिछले साल से भी कम हुआ बोवनी का रकबा
कृषि विभाग के अनुसार पिछले वर्ष अधिक बारिश के बावजूद जिले में 3.44 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बोवनी हुई थी। इस बार कम बारिश के कारण यह आंकड़ा घटकर 3.40 लाख हेक्टेयर** रह गया है। यानी पिछले वर्ष की तुलना में करीब 4 हजार हेक्टेयर कम क्षेत्र में खेती हो सकी है। इससे स्पष्ट है कि कमजोर मानसून ने किसानों की योजनाओं पर सीधा असर डाला है।
बारिश के आंकड़ों में भी बड़ा अंतर
भू-अभिलेख शाखा के अनुसार पिछले 24 घंटे में जिले में औसतन 31.14 मिमी बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक 115 मिमी बारिश करैरा में हुई, जबकि खनियाधाना में मात्र 2 मिमी पानी बरसा। इसके अलावा बैराड़ में 44 मिमी, पोहरी में 34 मिमी, नरवर में 31 मिमी, कोलारस में 26 मिमी, शिवपुरी में 13.30 मिमी, बदरवास में 12 मिमी और पिछोर में 3 मिमी बारिश दर्ज की गई।
जिले में अब तक कुल 259.39 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है, जो सामान्य औसत वर्षा का केवल 31.78 प्रतिशत है। वहीं पिछले वर्ष इसी अवधि तक 908.79 मिमी बारिश हो चुकी थी। बारिश के इन आंकड़ों से साफ है कि इस वर्ष मानसून अभी तक सामान्य स्थिति से काफी पीछे चल रहा है।
किसानों की उम्मीद अब अगले दौर की बारिश पर
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों की बारिश खरीफ फसलों के लिए संजीवनी साबित हो सकती है, लेकिन अच्छी पैदावार के लिए अगस्त माह में भी लगातार और संतुलित बारिश जरूरी होगी। यदि आगामी दिनों में मानसून फिर कमजोर पड़ता है, तो फसलों की बढ़वार प्रभावित होने के साथ उत्पादन में भी गिरावट आ सकती है। ऐसे में जिले के हजारों किसानों की नजरें अब मानसून की अगली बारिश पर टिकी हुई हैं।
.webp)
प्रतिक्रियाएं मूल्यवान होतीं हैं क्योंकि वो समाज का असली चेहरा सामने लातीं हैं। अब एक तरफा मीडियागिरी का माहौल खत्म हुआ। संपादक जो चाहे वो जबरन पाठकों को नहीं पढ़ा सकते। शिवपुरी समाचार आपका अपना मंच है, यहां अभिव्यक्ति की आजादी का पूरा अवसर उपलब्ध है। केवल मूक पाठक मत बनिए, सक्रिय साथी बनिए, ताकि अपन सब मिलकर बना पाएं एक अच्छी और सच्ची शिवपुरी। आपकी एक प्रतिक्रिया मुद्दों को नया मोड़ दे सकती है। इसलिए प्रतिक्रिया जरूर दर्ज करें।