Shivpuri News: पुलिस की कहानी कोर्ट में बिखरी, पंचायत सचिव हत्याकांड में चारों आरोपित बरी

Lalit Mudgal
0
shivpuri-samachar

शिवपुरी।
करीब चार वर्ष पुराने बहुचर्चित पंचायत सचिव हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने ऐसा फैसला सुनाया जिसने पुलिस की पूरी जांच और अभियोजन की कहानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। जिला एवं सत्र न्यायाधीश एके सिंह ने मामले में चारों आरोपितों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अपने विस्तृत फैसले में न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि अभियोजन पक्ष हत्या का आरोप संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है। इतना ही नहीं, अदालत ने जांच अधिकारी की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर टिप्पणियां करते हुए जांच में कई महत्वपूर्ण खामियां गिनाईं।

यह था पूरा मामला
अभियोजन के अनुसार 23 जून 2022 की रात करीब 8 बजे बदरवास थाना क्षेत्र के ग्राम सेमरी में मरघट शाला के पास स्थित कुएं के समीप पंचायत सचिव रिंकू उर्फ लखन जाट की हत्या कर दी गई थी। पुलिस का दावा था कि सचिव ने आरोपी धर्मेंद्र धाकड़ का प्रधानमंत्री आवास (कुटीर) योजना की सूची से नाम हटा दिया था। इसी रंजिश में धर्मेंद्र ने कथित रूप से गला दबाकर हत्या की, जबकि अन्य आरोपी कप्तान सिंह धाकड़, विजय सिंह धाकड़ और संजीव धाकड़ ने शव को कुएं में फेंककर साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया। इस आधार पर थाना बदरवास में हत्या का प्रकरण दर्ज किया गया था।

कोर्ट को पुलिस की कहानी में मिले कई विरोधाभास
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि अभियोजन की कहानी उपलब्ध साक्ष्यों से मेल नहीं खाती। फैसले में उल्लेख किया गया कि जहां एफआईआर में गला दबाकर हत्या की बात कही गई, वहीं उपलब्ध चिकित्सीय साक्ष्य और परिस्थितियां मौत का कारण डूबना दर्शाती हैं। इस विरोधाभास का अभियोजन संतोषजनक जवाब नहीं दे सका।

मोटिव भी साबित नहीं कर सकी पुलिस
अभियोजन का पूरा मामला इस कथित रंजिश पर आधारित था कि मृतक ने आरोपी धर्मेंद्र धाकड़ का कुटीर योजना से नाम काट दिया था। लेकिन अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी अमित भदौरिया ऐसा एक भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके, जिससे यह साबित हो सके कि धर्मेंद्र के नाम कोई कुटीर स्वीकृत या प्रस्तावित थी अथवा मृतक ने उसका नाम सूची से हटाया था। ऐसे में हत्या का कथित कारण भी न्यायालय में साबित नहीं हो सका।

जांच अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल
अदालत ने विवेचना अधिकारी अमित भदौरिया की जांच पर भी सवाल उठाए। प्रतिपरीक्षण में सामने आया कि घटना स्थल के आसपास रहने वाले लोगों से न तो पूछताछ की गई और न ही उन्हें गवाह बनाया गया। न्यायालय ने माना कि इस तरह की जांच से अभियोजन का मामला कमजोर हुआ और घटनाक्रम की निष्पक्ष तस्वीर सामने नहीं आ सकी।

बचाव पक्ष ने रखा मृतक का आपराधिक रिकॉर्ड
बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता विजय तिवारी और गिरीश गुप्ता ने अदालत के समक्ष मृतक का आपराधिक इतिहास भी प्रस्तुत किया। रिकॉर्ड के अनुसार मृतक रिंकू उर्फ लखन जाट के खिलाफ थाना बदरवास में 14 आपराधिक मामले दर्ज थे तथा वर्ष 2019 में जिला मजिस्ट्रेट द्वारा उसे जिलाबदर भी किया गया था। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि मृतक की कई लोगों से दुश्मनी थी और ऐसे में केवल इन आरोपितों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।

संदेह का लाभ मिला, चारों हुए बरी
अभियोजन द्वारा हत्या, रंजिश और आरोपितों की संलिप्तता संदेह से परे साबित नहीं किए जाने के कारण जिला एवं सत्र न्यायालय ने चारों आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया। यह फैसला एक बार फिर पुलिस विवेचना की गुणवत्ता और आपराधिक मामलों में ठोस साक्ष्य जुटाने की आवश्यकता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

Post a Comment

0Comments

प्रतिक्रियाएं मूल्यवान होतीं हैं क्योंकि वो समाज का असली चेहरा सामने लातीं हैं। अब एक तरफा मीडियागिरी का माहौल खत्म हुआ। संपादक जो चाहे वो जबरन पाठकों को नहीं पढ़ा सकते। शिवपुरी समाचार आपका अपना मंच है, यहां अभिव्यक्ति की आजादी का पूरा अवसर उपलब्ध है। केवल मूक पाठक मत बनिए, सक्रिय साथी बनिए, ताकि अपन सब मिलकर बना पाएं एक अच्छी और सच्ची शिवपुरी। आपकी एक प्रतिक्रिया मुद्दों को नया मोड़ दे सकती है। इसलिए प्रतिक्रिया जरूर दर्ज करें।

Post a Comment (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!