Shivpuri News - अप्रैल में दिया ऑर्डर, जुलाई खत्म होने को आई, फिर भी नहीं आईं 4 करोड़ की नई मोटरें

Lalit Mudgal
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शिवपुरी।
मानसून का मौसम होने के बावजूद शिवपुरी शहर की दो लाख से अधिक आबादी आज भी पानी की गंभीर किल्लत झेल रही है। शहर के अधिकांश इलाकों में लोगों को नियमित जलापूर्ति नहीं मिल रही। हालात ऐसे हैं कि कई कॉलोनियों में 4 से 5 दिन बाद नलों में पानी आता है और यदि इस बीच कोई मोटर खराब हो जाए तो लोगों को 10 से 12 दिन तक पानी का इंतजार करना पड़ता है। बारिश के मौसम में भी लोग पीने के पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं।

इस विकट स्थिति के पीछे सबसे बड़ा कारण मडीखेड़ा जलावर्धन योजना में लगी 15 साल पुरानी छह बड़ी मोटरों का जर्जर हो जाना है। इन मोटरों की जगह लगाने के लिए करीब 4 करोड़ रुपये की लागत से नई मोटरों का ऑर्डर अप्रैल 2026 में दिया गया था, लेकिन तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी मोटरें नगर पालिका को नहीं मिल सकी हैं। अब कंपनी ने इन्हें तैयार करने के लिए एक महीने का और समय मांगा है।

मडीखेड़ा योजना पर टिकी पूरे शहर की प्यास
शिवपुरी शहर की पेयजल व्यवस्था पूरी तरह मडीखेड़ा जलावर्धन योजना पर निर्भर है। इस योजना के तहत मडीखेड़ा डैम के इंटेकवेल से पानी सतनवाड़ा स्थित फिल्टर प्लांट तक पहुंचाया जाता है और वहां से पूरे शहर में सप्लाई की जाती है। इस व्यवस्था को संचालित करने के लिए मडीखेड़ा इंटेकवेल और सतनवाड़ा फिल्टर प्लांट पर कुल छह बड़ी मोटरें लगी हैं। ये सभी मोटरें करीब 15 वर्ष पुरानी हो चुकी हैं। लगातार उपयोग और समय पर व्यापक मरम्मत नहीं होने के कारण इनकी क्षमता लगातार घटती जा रही है। पिछले छह महीनों में हर 10 से 15 दिन के अंतराल पर कोई न कोई मोटर खराब होती रही है, जिससे पूरे शहर की जलापूर्ति प्रभावित हो रही है।

जरूरत 40 एमएलडी की, मिल रहा सिर्फ 28 से 30 एमएलडी पानी
नगर पालिका के अनुसार शिवपुरी शहर की प्रतिदिन पानी की आवश्यकता लगभग 40 मिलियन लीटर (एमएलडी) है। लेकिन पुरानी मोटरों की क्षमता घटने के कारण वर्तमान में केवल 28 से 30 एमएलडी पानी ही मिल पा रहा है। यानी रोजाना 10 से 12 एमएलडी पानी की कमी बनी हुई है। स्थिति और गंभीर इसलिए हो जाती है क्योंकि पुरानी मोटरें लगातार 10 से 12 घंटे से अधिक नहीं चल पातीं। अधिक गर्म होने पर उन्हें बंद करना पड़ता है। इसका सीधा असर ऊंचाई वाले क्षेत्रों और शहर के अंतिम छोर की कॉलोनियों पर पड़ता है, जहां कई दिनों तक पानी नहीं पहुंच पाता।

बारिश में भी पानी के लिए भटक रहे लोग
बारिश का मौसम आमतौर पर जल संकट से राहत का समय माना जाता है, लेकिन शिवपुरी में हालात इसके बिल्कुल उलट हैं। कई मोहल्लों के लोग पानी भरने के लिए घंटों इंतजार करते हैं, जबकि कुछ परिवार निजी टैंकरों या अन्य स्रोतों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं। अनियमित जलापूर्ति से घरेलू कामकाज के साथ-साथ लोगों की दिनचर्या भी प्रभावित हो रही है।

अप्रैल में दिया ऑर्डर, अब भी नहीं मिली मोटरें
पेयजल संकट से निपटने के लिए नगर पालिका ने अप्रैल 2026 में एक निजी कंपनी को लगभग 4 करोड़ रुपये की लागत से छह नई मोटरें तैयार करने का ऑर्डर दिया था। उम्मीद थी कि दो से तीन महीने में मोटरें मिल जाएंगी, लेकिन तय समय बीतने के बाद भी आपूर्ति नहीं हो सकी। मोटर बनाने वाली कंपनी के मैनेजर प्रशांत कुमार ने बताया कि सभी मोटरें अलग-अलग डिजाइन की हैं, इसलिए निर्माण में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है। उन्होंने दावा किया कि अगले एक महीने में सभी मोटरें तैयार कर नगर पालिका को सौंप दी जाएंगी।

अब उठ रहे कई सवाल
शहर की सबसे बड़ी बुनियादी समस्या पर अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि अप्रैल में ऑर्डर दिया गया था तो अब तक मोटरों की आपूर्ति क्यों नहीं हो सकी? क्या नगर पालिका ने कंपनी से समय पर प्रगति की समीक्षा की? यदि जल संकट पहले से बना हुआ था तो वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? इन सवालों का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है। लेकिन इतना तय है कि जब तक नई मोटरें नहीं लगतीं, तब तक शिवपुरी की दो लाख से अधिक आबादी को अनियमित जलापूर्ति और बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष का सामना करना पड़ता रहेगा।

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