लोगों ने गांव के सरपंच अतर सिंह लोधी के नेतृत्व में सुबह-सुबह सड़क पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। विरोध उस समय और भी चर्चाओं में आ गया जब सरपंच खुद सड़क पर लेट गए और ग्रामीणों ने सिरसौद-पिछोर मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। करीब तीन घंटे तक चले इस आंदोलन से सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। हालांकि प्रदर्शन के दौरान मानवता का परिचय देते हुए ग्रामीणों ने एम्बुलेंस को बिना रोके रास्ता दिया।
रविवार सुबह करीब छह बजे शुरू हुए इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। लोगों का कहना था कि पिछले कई दिनों से बिजली विभाग लोड सेटिंग के नाम पर रोजाना 10 से 12 घंटे बिजली काट रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी रात के समय हो रही है, जब घंटों बिजली गुल रहने से लोग उमस और गर्मी में जागकर रात बिताने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली की आंख-मिचौली ने सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। बच्चों की पढ़ाई, किसानों का काम और घरेलू दिनचर्या सभी प्रभावित हो रहे हैं। बार-बार बिजली जाने से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी खराब होने का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही में अंधेरे के कारण एक महिला छत से गिरकर घायल हो गई थी, लेकिन इसके बावजूद विभाग ने व्यवस्था सुधारने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
चक्काजाम की सूचना मिलते ही अमोला थाना प्रभारी योगेंद्र सिंह सेंगर पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी बिजली विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे। काफी देर बाद बिजली विभाग के अधिकारी घटनास्थल पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा कर समस्या के जल्द समाधान का आश्वासन दिया। इसके बाद सुबह करीब नौ बजे चक्काजाम समाप्त हुआ और यातायात दोबारा शुरू हो सका।
15 गांवों में एक जैसी परेशानी सरपंच अतर सिंह लोधी ने बताया कि सिरसौद ही नहीं, बल्कि आसपास के करीब 15 गांवों के लोग इसी समस्या से जूझ रहे हैं। उनका कहना है कि एक घंटे बिजली दी जाती है और अगले ही घंटे फिर सप्लाई बंद कर दी जाती है। इस तरह की लोड सेटिंग से लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कई बार बिजली विभाग से शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।
करैरा और गांवों में भेदभाव का आरोप सरपंच ने बिजली विभाग पर भेदभाव का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि सिरसौद से महज पांच किलोमीटर दूर करैरा कस्बे में लोड सेटिंग के नाम पर इस तरह की कटौती नहीं की जाती, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बिजली काटी जा रही है। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है और वे खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
फिर आंदोलन की चेतावनी बिजली विभाग के अधिकारियों के आश्वासन के बाद भले ही रविवार का प्रदर्शन समाप्त हो गया, लेकिन ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि यदि जल्द ही बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ और लोड सेटिंग के नाम पर कटौती जारी रही तो वे एक बार फिर सड़क पर उतरेंगे। सरपंच अतर सिंह लोधी ने कहा कि कुछ महीने पहले भी इसी मुद्दे को लेकर आंदोलन किया गया था, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। अब यदि विभाग ने वादे पूरे नहीं किए तो ग्रामीण और बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
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