शिवपुरी। शहर और जिले में वर्षों से खेती की जमीन पर बिना अनुमति काटी गई अवैध कॉलोनियों के खिलाफ प्रशासन ने अब कार्रवाई शुरू कर दी है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के दो दिन पहले दिए गए निर्देश के बाद कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देश पर एडीएम कार्यालय ने शहर और जिले के 40 से अधिक कॉलोनाइजरों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।
इन कॉलोनाइजरों ने मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था किए बिना, जमीन का डायवर्सन कराए बिना और नगर पालिका सहित संबंधित विभागों से जरूरी अनुमति लिए बिना कॉलोनियां काटकर प्लॉट बेचे। नोटिस में संबंधित कॉलोनाइजरों से सात दिन के भीतर जवाब मांगा गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर सहित अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।
सिंधिया बोले थे- गलत काम करने वाला कोई भी हो, कार्रवाई करो
यह कार्रवाई इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दो दिन पहले शिवपुरी प्रवास के दौरान कलेक्टर अर्पित वर्मा और एसपी यांगचेन डोलकर भूटिया से जिले में अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करने को कहा था। उन्होंने भू-माफिया, शराब माफिया और रेत माफिया सहित गलत काम करने वालों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। सिंधिया ने अधिकारियों से यह भी कहा था कि यदि कोई उनका करीबी या परिचित भी गलत काम करता है तो उसे भी नहीं छोड़ा जाए और किसी गलत काम करने वाले व्यक्ति को राजनीतिक संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। इसके बाद प्रशासन की ओर से अवैध कॉलोनियों के मामले में नोटिस जारी किए जाने को इसी कार्रवाई की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
खास बात- आज नहीं, 10 से 15 साल पहले काटी गई थीं कई कॉलोनियां
इस पूरी कार्रवाई में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन कॉलोनाइजरों को नोटिस दिए गए हैं, उनमें कई ने आज या हाल में नहीं, बल्कि करीब 10 से 15 साल पहले कॉलोनियां काटी थीं। यानी वर्षों पहले काटी गई कॉलोनियां अब प्रशासन की जांच के दायरे में आई हैं। तहसीलदार और एसडीएम से प्राप्त प्रतिवेदनों के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। प्रशासन अब दस्तावेज और संबंधित पक्षों का पक्ष सुनने के बाद आगे की कार्रवाई करेगा।
अपर कलेक्टर दिनेश चंद्र शुक्ला के अनुसार, यदि कोई कॉलोनी पुरानी है तो निर्धारित प्रक्रिया और शुल्क के माध्यम से उसे वैध कराने का प्रावधान हो सकता है। फिलहाल सभी संबंधित लोगों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है। सुनवाई के बाद जो दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
21 शहर के, 20 जिले के कॉलोनाइजरों को नोटिस
एडीएम कार्यालय से जारी नोटिसों में शहर के 21 और जिले के 20 कॉलोनाइजर शामिल हैं। इनमें मनियर, नोहरी खुर्द, फतेहपुर और झींगूरा सहित अलग-अलग क्षेत्रों में कॉलोनियां काटने वाले लोग शामिल बताए गए हैं। नोटिस पाने वालों में रेखा राय पत्नी भजनलाल निवासी ग्वालियर द्वारा मनियर में कॉलोनी काटने, सतीश पुत्र सुल्तान धाकड़ निवासी बैंक कॉलोनी शिवपुरी द्वारा नोहरी खुर्द में कॉलोनी काटने, रहीश पुत्र आजम खान निवासी पुरानी शिवपुरी और रामसिंह पुत्र तुलसीराम चिढ़ार निवासी फतेहपुर द्वारा फतेहपुर क्षेत्र में कॉलोनी काटने तथा उस्मान पुत्र नन्हें खान निवासी ब्यावरा, राजगढ़ द्वारा झींगूरा क्षेत्र में कॉलोनी काटने सहित अन्य मामले शामिल हैं।
अनुमति और सुविधाएं छोड़ीं, सीधे प्लॉट बेच दिए
नियमों के अनुसार किसी कॉलोनी को विकसित करने के लिए संबंधित विभागों से अनुमति, जमीन का डायवर्सन और जरूरी विकास कार्य कराना होता है। कॉलोनी में सड़क, बिजली, पानी, सुरक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था भी जरूरी होती है। अवैध कॉलोनी काटने वाले कुछ लोग इन प्रक्रियाओं और खर्चों से बचने के लिए खेती की जमीन पर ही प्लॉट काटकर लोगों को बेच देते हैं। कम कीमत का लालच देकर प्लॉट बेचने के बाद खरीदारों को बाद में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
प्लॉट खरीदा, अब नामांतरण में अटक रहा है
अवैध कॉलोनियों पर प्रशासन द्वारा कार्रवाई होने के बाद सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को होती है जिन्होंने यहां प्लॉट खरीदे हैं। नियमों के विपरीत विकसित कॉलोनियों में क्रय-विक्रय पर रोक लगने की स्थिति में खरीदारों को नामांतरण और अन्य राजस्व प्रक्रियाओं में परेशानी आती है। अब प्रशासन के नोटिस के बाद यह भी सामने आएगा कि वर्षों पहले काटी गई इन कॉलोनियों में से कितनी नियमानुसार वैध हो सकती हैं और कितने मामलों में कॉलोनाइजरों के खिलाफ आपराधिक या अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
अब जांच का अगला चरण महत्वपूर्ण
फिलहाल प्रशासन ने नोटिस जारी कर पहला कदम उठा दिया है। सात दिन में आने वाले जवाब और उसके बाद होने वाली सुनवाई से तय होगा कि इन 40 से अधिक मामलों में कितनों को राहत मिलती है और कितनों पर कार्रवाई आगे बढ़ती है। साथ ही यह भी सवाल बना हुआ है कि वर्षों पहले काटी गई इन कॉलोनियों की निगरानी और कार्रवाई अब तक क्यों नहीं हुई।
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