शिवपुरी। पोहरी में अप्रैल 2023 में हुई पूजा की आत्महत्या के मामले में न्यायालय ने करीब साढ़े तीन साल बाद फैसला सुनाया है। पंचम अपर सत्र न्यायाधीश, शिवपुरी अरुण कुमार सिंह की अदालत ने मृतका के ससुर रामस्वरूप वर्मा और सास अंगूरी वर्मा को धारा 306 और 498-ए भादंसं के तहत दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। वहीं मामले में नामजद अन्य आरोपियों को आरोप प्रमाणित नहीं होने पर दोषमुक्त किया गया है।
29 अप्रैल 2023 को ससुराल में फांसी लगाकर दी जान
न्यायालय के फैसले के मुताबिक पूजा ने 29 अप्रैल 2023 को पोहरी स्थित अपनी ससुराल में फांसी लगाकर आत्महत्या की थी। प्रकरण में पुलिस थाना पोहरी द्वारा अपराध क्रमांक 150/2023 के तहत धारा 498-ए, 306 भादंसं तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत मामला दर्ज किया गया था। बाद में प्रकरण सत्र न्यायालय के समक्ष विचारण के लिए आया।
पति नौकरी के सिलसिले में मुंबई में था
फैसले में सामने आए तथ्यों के अनुसार पूजा की मौत के समय उसके पति नरेंद्र के मुंबई में नौकरी पर रहने का उल्लेख है। न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह भी माना कि पति सहित कुछ अन्य आरोपियों की घटना के समय मौके पर मौजूदगी प्रमाणित नहीं हुई।
पूजा मानसिक बीमारी से भी जूझ रही थी
मामले की सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि पूजा ऑब्सेसिव कम्पल्सिव डिसऑर्डर (OCD) जैसी मानसिक बीमारी से पीड़ित थी और उसका इलाज चल रहा था। बचाव पक्ष की ओर से इसी आधार पर तर्क दिया गया कि पूजा ने मानसिक परेशानी के कारण आत्महत्या की। न्यायालय ने साक्ष्यों की समीक्षा के बाद हालांकि ससुर रामस्वरूप वर्मा और सास अंगूरी वर्मा के संबंध में अभियोजन का मामला स्वीकार किया। दहेज मांग का आरोप साबित नहीं, लेकिन प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध माना
फैसले में न्यायालय ने स्पष्ट किया कि रामस्वरूप वर्मा और अंगूरी वर्मा द्वारा पूजा से दहेज के रूप में रुपये मांगने का तथ्य प्रमाणित नहीं हुआ, इसलिए दहेज प्रतिषेध अधिनियम के आरोप में उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया। लेकिन न्यायालय ने अभियोजन साक्ष्य के आधार पर माना कि दोनों ने पूजा को प्रताड़ित किया और उसे आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित किया। इसी आधार पर दोनों को धारा 306 और 498-ए भादंसं के तहत दोषी ठहराया गया।
पति नरेंद्र सहित चार आरोपियों को राहत
इस मामले में कुल छह आरोपी न्यायालय के समक्ष थे। अंतिम निर्णय में रामस्वरूप वर्मा और अंगूरी वर्मा को दोषी*ठहराया गया, जबकि अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप प्रमाणित नहीं होने पर उन्हें दोषमुक्त कर दिया गया। फैसले का बड़ा बिंदु यह रहा कि अदालत ने पूजा की आत्महत्या को तो प्रमाणित माना, लेकिन सभी आरोपियों की भूमिका समान नहीं मानी। साक्ष्यों के आधार पर केवल ससुर-सास को धारा 306 और 498-ए के अपराध में दोषी ठहराया गया।

प्रतिक्रियाएं मूल्यवान होतीं हैं क्योंकि वो समाज का असली चेहरा सामने लातीं हैं। अब एक तरफा मीडियागिरी का माहौल खत्म हुआ। संपादक जो चाहे वो जबरन पाठकों को नहीं पढ़ा सकते। शिवपुरी समाचार आपका अपना मंच है, यहां अभिव्यक्ति की आजादी का पूरा अवसर उपलब्ध है। केवल मूक पाठक मत बनिए, सक्रिय साथी बनिए, ताकि अपन सब मिलकर बना पाएं एक अच्छी और सच्ची शिवपुरी। आपकी एक प्रतिक्रिया मुद्दों को नया मोड़ दे सकती है। इसलिए प्रतिक्रिया जरूर दर्ज करें।