खुला खत: श्रीमंत महाराज साहब अधिकारी तो परदेशी है, 200 मीटर सफर मौत का ट्रेक बना दिया हैं

Lalit Mudgal
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शिवपुरी,जहां आपका एक बूंद पसीना टपकेगा, वहां मैं सौ बूंद पसीना बहाउंगा, अगर खून की जरूरत पड़ी तो मैं उसके लिए भी हाजिर हूं। श्रीमंत महाराज साहब आपका यह भावुक संवाद शिवपुरी की जनता के दिलों में बसता है। आपके और हमारे 250 साल पुराना पारिवारिक रिश्ते है। लेकिन महाराज, आपकी उसी लाडली जनता के साथ शिवपुरी का सिस्टम आज क्रूर मजाक कर रहा है। श्रीमंत महाराज साहब शहर के अधिकारी तो परदेशी हैं, नौकरी करने आए हैं और ट्रांसफर होते ही अपना बोरिया-बिस्तर समेट कर चले जाएंगे। 

लेकिन आपकी जनता तो यहीं है, जो आज अफसरों की लापरवाही के कारण सड़क के नाम पर बिछाए गए मौत के ट्रैप से गुजरने को मजबूर है। सिस्टम को न जनता की जान की फिक्र है और न ही उनके गाढ़े पसीने की कमाई से खरीदे गए वाहनों की।

आपकी लाडली जनता का शहर इन दिनों सिस्टम की घोर लापरवाही का शिकार है। पोहरी रोड पर बन रहा ओवरब्रिज लोगों के लिए सुविधा से ज्यादा एक खौफनाक सजा बन गया है। रेलवे गेट से लेकर सेंट चार्ल्स स्कूल तक महज 200 मीटर का टुकड़ा है, लेकिन इसे पार करना किसी स्टंट शो में हिस्सा लेने से कम नहीं रह गया है।

शुक्रवार सुबह प्रशासन की इस अनदेखी का खौफनाक नजारा देखने को मिला। इसी मौत के ट्रैप में दो कारें कीचड़ भरे गहरे गड्ढे में बुरी तरह धंस गईं। हालात इतने बदतर थे कि बीच सड़क दलदल में फंसे एक यात्री ऑटो को निकालने के लिए बाकायदा जेसीबी मशीन बुलानी पड़ी। दुपहिया वाहन चालक तो हर पल अपनी जान हथेली पर रखकर इस रास्ते को पार कर रहे हैं।

सिस्टम की लापरवाही का आलम यह है कि पुल के दोनों तरफ सड़क का काम अधूरा छोड़ दिया गया है। सड़क के नाम पर अब सिर्फ गहरे और चौंड़े गड्ढे बचे हैं, जिनमें कीचड़ वाला गंदा पानी भरा है। गहराई का अंदाजा न लग पाने के कारण वाहन सीधे इनमें समा रहे हैं। रही-सही कसर दोनों तरफ आड़ी-तिरछी खोदी गई नालियों ने पूरी कर दी है। इन नालियों ने सड़क को इतना संकरा कर दिया है कि एक यात्री बस भी बमुश्किल निकल पाती है। बरसात का पानी नाली से निकलने की बजाय सीधा सड़क के गड्ढों में भर रहा है, जिसने इसे एक खतरनाक दलदल बना दिया है।

महाराज साहब यह कोई आम गली-मोहल्ले का रास्ता नहीं है। यहीं से पोहरी, बैराड़, और श्योपुर रूट पर जाने वाली दर्जनों यात्री बसें रोजाना निकलती हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसी रास्ते पर तीन बड़े स्कूल स्थित हैं, जिनकी बसें रोज इसी कीचड़ और जानलेवा गड्ढों से होकर मासूम बच्चों को लेकर गुजरती हैं। ग्रामीण इलाकों से आने वाले लोगों के लिए भी यही एकमात्र मुख्य सड़क है।

प्रशासन ने पूरी तरह से अपनी आंखें मूंद रखी हैं। अफसर मूकदर्शक बने बैठे हैं। अगर जल्द ही यहां रास्ता दुरुस्त नहीं किया गया, तो किसी बड़े और दर्दनाक हादसे का होना तय है। सवाल यह है कि जब कोई हादसा होगा, तब उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? उस कीचड़ की या संवेदनहीन हो चुके इस सिस्टम की? महाराज, आपकी लाडली जनता अब आपसे ही इस सिस्टम को जगाने की आस लगाए बैठी है।

शिवपुरी शहर की जनता की ओर से 
कलमवीर ललित मुदगल 
date 19-09-2026

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