शिवपुरी। पुलिस विभाग में पांच वर्षों से लंबित नियमित पदोन्नति का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। आरक्षण संबंधी विवाद के कारण वर्षों से कार्यवाहक पदों पर काम कर रहे पुलिसकर्मियों के लिए नई पदोन्नति सूची जारी कर दी गई है। इस बदलाव में जहां 221 सिपाहियों को सीधे हेड कांस्टेबल (प्रधान आरक्षक) बनाया गया है, वहीं 75 कार्यवाहक प्रधान आरक्षकों को दोबारा सिपाही बना दिया गया है। नई व्यवस्था से कई पुलिसकर्मियों के चेहरे खिले हैं तो कई के अरमानों पर पानी फिर गया है।
पुलिस विभाग में पदोन्नति को लेकर लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता अब खत्म होने लगी है। आरक्षण संबंधी कानूनी विवाद के कारण वर्ष 2021 में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को नियमित पदोन्नति देने के बजाय कार्यवाहक (ऑफिसिएटिंग) पदों पर जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब विधिक परामर्श और शासन के नए दिशा-निर्देशों के आधार पर नियमित पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया ने जिले में पदस्थ 221 आरक्षकों (सिपाहियों) को सीधे प्रधान आरक्षक (हेड कांस्टेबल) के पद पर नियमित पदोन्नति प्रदान की है। हालांकि इसी प्रक्रिया में 75 कार्यवाहक प्रधान आरक्षकों को वापस उनके मूल पद आरक्षक पर भेज दिया गया है, जिससे विभाग में मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
वर्गवार जारी हुई पदोन्नति सूची
जारी आदेश के अनुसार सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग के 150 कार्यवाहक प्रधान आरक्षकों को नियमित रूप से प्रधान आरक्षक बना दिया गया है। वहीं इसी वर्ग के 13 पुलिसकर्मियों को प्रतीक्षा सूची में रखा गया है। अनुसूचित जाति वर्ग के 23 कार्यवाहक प्रधान आरक्षकों को नियमित पदोन्नति दी गई है, जबकि 4 पुलिसकर्मी प्रतीक्षा सूची में शामिल किए गए हैं। अनुसूचित जनजाति वर्ग के 4 कार्यवाहक प्रधान आरक्षकों को नियमित प्रधान आरक्षक बनाया गया है। इसके अलावा इसी वर्ग के 44 आरक्षकों को सीधे प्रधान आरक्षक पद पर पदोन्नत किया गया है, जबकि 3 पुलिसकर्मियों को प्रतीक्षा सूची में रखा गया है।
पांच साल पहले मिली थी कार्यवाहक पदोन्नति
फरवरी 2021 में शिवपुरी जिले के करीब 292 आरक्षकों को कार्यवाहक प्रधान आरक्षक बनाया गया था। उस समय आरक्षण संबंधी विवाद और न्यायालयीन प्रक्रिया के चलते नियमित पदोन्नति संभव नहीं हो सकी थी। इसलिए विभाग ने कार्यवाहक व्यवस्था लागू की थी। अब कानूनी राय के बाद नियमित पदोन्नति प्रक्रिया शुरू होने से कार्यवाहक व्यवस्था समाप्त की जा रही है। इसी कारण कई पुलिसकर्मियों की वरिष्ठता और पात्रता के आधार पर नई सूची तैयार की गई, जिसमें कुछ को नियमित पदोन्नति मिली तो कुछ को मूल पद पर लौटना पड़ा।
एएसआई, एसआई और टीआई की पदोन्नति भी प्रक्रिया में
पदोन्नति का असर केवल प्रधान आरक्षक स्तर तक सीमित नहीं है। जिले में 77 प्रधान आरक्षकों को पहले कार्यवाहक सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) बनाया गया था। नए प्रावधानों के तहत अब इनकी नियमित पदोन्नति डीआईजी स्तर से की जाएगी। इसी तरह जिले के 17 कार्यवाहक थाना प्रभारी (टीआई) और 16 कार्यवाहक उप निरीक्षकों (एसआई) की नियमित पदोन्नति का अंतिम निर्णय पुलिस मुख्यालय भोपाल स्तर पर लिया जाएगा।
75 पुलिसकर्मियों में मायूसी
नई पदोन्नति सूची में सबसे अधिक निराशा उन 75 कार्यवाहक प्रधान आरक्षकों को हुई है, जिन्हें नियमित पदोन्नति नहीं मिल सकी और उन्हें वापस आरक्षक बना दिया गया। वर्षों से उच्च पद पर जिम्मेदारी निभा रहे इन पुलिसकर्मियों को अब अपने मूल पद पर लौटना पड़ेगा। वहीं दूसरी ओर 221 पुलिसकर्मियों के लिए यह आदेश बड़ी राहत लेकर आया है। नियमित पदोन्नति मिलने से उन्हें न केवल पद की स्थिरता मिलेगी, बल्कि भविष्य में उच्च पदों पर पदोन्नति का रास्ता भी साफ होगा।
पुलिस विभाग के इस फैसले को वर्षों से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को पटरी पर लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब विभाग की नजर एएसआई, एसआई और टीआई स्तर की नियमित पदोन्नति प्रक्रिया को भी जल्द पूरा करने पर है।

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