शिवपुरी,कोटा-झांसी हाईवे बना गड्ढों का जाल, 500 मीटर में 25 गड्ढे, हादसों का खतरा बढ़ा

vikas
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अमोला/करैरा।
कोटा-झांसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर सफर अब रफ्तार नहीं, बल्कि खतरे से मुकाबला बन गया है। करैरा विधानसभा का अमोला क्षेत्र के सिरसौद चौराहे पर महज 500 मीटर के दायरे में 25 छोटे-बड़े गड्ढे उभर आए हैं, जबकि अमोला से सुरवाया तक सड़क पर सैकड़ों गड्ढों ने वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालत यह है कि चालक हर कुछ सेकंड में ब्रेक लगाने और गड्ढों से बचने के लिए वाहन इधर-उधर मोड़ने को मजबूर हैं। बीते दिनों एक तेज रफ्तार बाइक गड्ढे में फंसकर फिसल गई, जिससे बाइक सवार दंपती घायल हो गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते स्थाई मरम्मत नहीं हुई तो बारिश के दौरान यह हाईवे किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

शिवपुरी जिले से गुजरने वाला कोटा-झांसी राष्ट्रीय राजमार्ग इन दिनों अपनी बदहाल स्थिति को लेकर चर्चा में है। अमोला क्षेत्र के सिरसौद चौराहे पर सड़क की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि महज आधा किलोमीटर के हिस्से में ही करीब 25 छोटे-बड़े गड्ढे बन गए हैं। यही नहीं, अमोला से सुरवाया तक हाईवे पर जगह-जगह उभरे सैकड़ों गड्ढे वाहन चालकों के लिए रोज नई मुसीबत खड़ी कर रहे हैं।

हाईवे से गुजरने वाले चालकों का कहना है कि उन्हें हर कुछ मीटर पर वाहन की गति कम करनी पड़ती है। गड्ढों से बचने के प्रयास में वाहन इधर-उधर मोड़ने पड़ते हैं, जिससे पीछे चल रहे वाहनों से टक्कर की आशंका भी बनी रहती है। खासकर रात के समय और बारिश के दौरान यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

गड्ढे में फिसली बाइक, दंपती घायल
ग्रामीणों के अनुसार बीते दिनों एक तेज रफ्तार बाइक सिरसौद चौराहे के पास बने गड्ढे में फंसकर फिसल गई। हादसे में बाइक सवार दंपती घायल हो गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है; आए दिन छोटे-बड़े हादसे होते रहते हैं।अमोला क्रेशर के पास बना एक बड़ा गड्ढा भी दोपहिया वाहन चालकों के लिए मुसीबत बना हुआ है। ग्रामीणों के मुताबिक इस गड्ढे में कई बाइक सवार चोटिल हो चुके हैं। दो दिन पहले इसमें गिट्टी डालकर भराव किया गया था, लेकिन भारी वाहनों की आवाजाही के चलते वह गिट्टी जल्दी उखड़ गई और सड़क फिर पहले जैसी हो गई।

पेंचवर्क से नहीं सुलझ रही समस्या
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि सड़क की स्थाई मरम्मत नहीं की जा रही है। गड्ढों को भरने के नाम पर केवल सूखी गिट्टी डालकर खानापूर्ति कर दी जाती है। वाहनों के दबाव से यह गिट्टी एक-दो दिन में उखड़ जाती है और गड्ढे पहले से ज्यादा गहरे हो जाते हैं।ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की मरम्मत तकनीकी मानकों और गुणवत्ता के अनुरूप नहीं होने से समस्या बार-बार लौट आती है। उनका मानना है कि केवल अस्थाई पेंचवर्क की बजाय पूरे क्षतिग्रस्त हिस्से का पुनर्निर्माण आवश्यक है। हर बार थोड़ी-सी गिट्टी डाल दी जाती है, लेकिन कुछ दिनों बाद सड़क फिर गड्ढों में बदल जाती है। अगर बारिश शुरू हो गई तो हालात और खराब हो जाएंगे।

दोपहिया चालकों पर सबसे ज्यादा खतरा
ग्रामीणों के अनुसार सबसे अधिक परेशानी बाइक और स्कूटी चालकों को होती है। रात में गड्ढे दिखाई नहीं देते और अचानक वाहन का संतुलन बिगड़ जाता है। बारिश के दौरान पानी भर जाने से गड्ढों की गहराई का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है। यही कारण है कि अमोला से सिरसौद और आगे सुरवाया तक का यह हिस्सा अब वाहन चालकों के बीच “हादसों वाला पैच” कहलाने लगा है।

ग्रामीणों ने उठाई स्थाई मरम्मत की मांग
रहवासी सतीश खटीक, हेमंत सेन, विनेश विश्वकर्मा, राहुल वंशकार और रामवरन लोधी सहित अन्य ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और हाइवे प्रबंधन से मांग की है कि सिरसौद चौराहे सहित पूरे क्षतिग्रस्त हिस्से की स्थाई मरम्मत कराई जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते सड़क की स्थिति नहीं सुधारी गई तो यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

एनएचएआई ने क्या कहा
हम समय-समय पर हाईवे की मरम्मत का कार्य कराते रहते हैं। यदि अमोला क्षेत्र में फिर से गड्ढे हो गए हैं तो उन्हें जल्द दुरुस्त कराने की कार्रवाई की जाएगी।
राकेश सिन्हा, आरई, एनएचएआई, शिवपुरी

बारिश से पहले चेतावनी
स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी स्थिति चिंताजनक है, लेकिन मानसून की तेज बारिश शुरू होने के बाद यही गड्ढे और गहरे हो जाएंगे। ऐसे में न केवल दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ेगा, बल्कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात भी प्रभावित हो सकता है। लोगों ने प्रशासन और एनएचएआई से जल्द कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि “मरम्मत में देरी अब सीधे लोगों की जान पर भारी पड़ सकती है।

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