शिवपुरी। शिवपुरी जिले से शायद इंद्रदेव रूठे हुए हैं,इस कारण किसान टेंशन मे खेतो की कोख में 65 प्रतिशत बीज गिर चुके है,अब मानसून का इंतजार हैं,बीते 1 जून से 12 जुलाई तक जिले में सामान्य बारिश का सिर्फ 25 प्रतिशत पानी ही गिरा है। पिछले साल की तुलना में इस बार 323 मिमी कम बारिश दर्ज होने से खरीफ फसलों पर संकट गहराने लगा है। कृषि विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 10 दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान, सोयाबीन और मक्का जैसी फसलों का अंकुरण प्रभावित होगा और हजारों किसानों की मेहनत पर पानी फिर सकता है।
शिवपुरी जिले में इस बार मानसून की बेरुखी किसानों के लिए बड़ी चिंता बनती जा रही है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 12 जुलाई तक जिले में केवल 158 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 481 मिमी बारिश हो चुकी थी। यानी इस बार अब तक सामान्य बारिश का महज 25 प्रतिशत पानी ही बरसा है और पिछले साल की तुलना में 323 मिमी कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।
बारिश की कमी के कारण खेतों की नमी तेजी से खत्म हो रही है। चार दिन पहले हुई हल्की बारिश से कुछ समय के लिए खेतों में नमी बनी, लेकिन लगातार तेज धूप और उमस के चलते मिट्टी फिर सूखने लगी है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले 10 से 15 दिनों तक अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ की फसल गंभीर संकट में आ सकती है।
65 फीसदी रकबे में हो चुकी है बुवाई
कृषि विभाग ने इस वर्ष खरीफ फसलों के लिए 4 लाख 20 हजार हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके मुकाबले अब तक करीब 2 लाख 67 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई पूरी हो चुकी है, यानी लगभग 65 प्रतिशत रकबे में बीज डाला जा चुका है।
सबसे अधिक बुवाई मक्का की हुई है। इसके अलावा किसानों ने धान, सोयाबीन और मूंगफली की भी बड़े पैमाने पर बुवाई की है। हालांकि इन फसलों को शुरुआती चरण में पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती है। यदि समय पर बारिश नहीं हुई तो बीज का अंकुरण प्रभावित होगा और खेतों में दोबारा बुवाई की नौबत भी आ सकती है।
इन फसलों को सबसे ज्यादा खतरा, कृषि विभाग के लक्ष्य के अनुसार इस वर्ष जिले में
धान–79 हजार हेक्टेयर
मक्का–1 लाख 33 हजार 500 हेक्टेयर
मूंगफली–1 लाख 33 हजार 500 हेक्टेयर
सोयाबीन–50 हजार हेक्टेयर
उड़द–15 हजार 500 हेक्टेयर
मूंग–3 हजार हेक्टेयर
बाजरा–2,500 हेक्टेयर
ज्वार– 200 हेक्टेयर
तिल–3 हजार हेक्टेयर
में खेती का लक्ष्य रखा गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार धान और सोयाबीन सबसे अधिक पानी पर निर्भर फसलें हैं। बारिश में देरी होने पर इनका अंकुरण प्रभावित होगा। वहीं उड़द, मूंग, बाजरा और ज्वार जैसी फसलें कम पानी में भी तैयार हो सकती हैं, लेकिन जिले में इनकी बुवाई का रकबा अपेक्षाकृत कम है।
कर्ज लेकर की बुवाई, अब बारिश का इंतजार
इस बार किसानों ने खाद, बीज और दवाओं पर 20 से 25 हजार रुपए प्रति एकड़ तक खर्च किया है। कई किसानों ने इसके लिए कर्ज भी लिया है। अब बारिश नहीं होने से उनकी चिंता बढ़ती जा रही है। किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो बीज खराब हो जाएगा, खाद का असर खत्म हो जाएगा और दोबारा बुवाई करनी पड़ेगी, जिससे आर्थिक बोझ और बढ़ जाएगा। किसान रामदयाल रघुवंशी बताते हैं कि इस बार बड़ी मुश्किल से खाद और बीज की व्यवस्था कर बुवाई की गई है। अब मानसून साथ नहीं दे रहा है। यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो फसल बचाना मुश्किल होगा और लिया गया कर्ज चुकाना भी कठिन हो जाएगा।
सिंचाई वाले किसान बचा सकते हैं फसल
जिन किसानों के पास ट्यूबवेल, नहर या अन्य सिंचाई के साधन उपलब्ध हैं, वे किसी तरह शुरुआती सिंचाई करके फसल बचा सकते हैं। लेकिन जिले का बड़ा हिस्सा अब भी वर्षा आधारित खेती पर निर्भर है। ऐसे किसानों के सामने सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
नदियां-तालाब भी खाली, आगे और बढ़ सकती है परेशानी
बारिश कम होने का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं है। जिले की अधिकांश नदियों, नालों और तालाबों में अभी तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंचा है। यदि जुलाई के दूसरे पखवाड़े में भी अच्छी बारिश नहीं हुई तो पेयजल और सिंचाई दोनों की समस्या गहरा सकती है।
क्या कहते हैं अधिकारी
मुनेश शाक्य, उप संचालक कृषि ने बताया कि जिले में करीब 65 प्रतिशत बुवाई हो चुकी है। अभी खेतों में कुछ नमी बनी हुई है, लेकिन यदि अगले 10 से 15 दिन बारिश नहीं हुई तो खरीफ की बोवनी और फसल दोनों प्रभावित होंगी। जिन किसानों के पास सिंचाई के साधन नहीं हैं, उन्हें सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
वहीं मौसम वैज्ञानिक बी.के. रायकवार के अनुसार फिलहाल अगले सात दिनों तक अच्छी बारिश के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। आगे की मौसम रिपोर्ट के आधार पर स्थिति स्पष्ट होगी, लेकिन शुरुआती संकेत यही हैं कि इस वर्ष जिले में पिछले साल की तुलना में बारिश कम रहने की संभावना है।

प्रतिक्रियाएं मूल्यवान होतीं हैं क्योंकि वो समाज का असली चेहरा सामने लातीं हैं। अब एक तरफा मीडियागिरी का माहौल खत्म हुआ। संपादक जो चाहे वो जबरन पाठकों को नहीं पढ़ा सकते। शिवपुरी समाचार आपका अपना मंच है, यहां अभिव्यक्ति की आजादी का पूरा अवसर उपलब्ध है। केवल मूक पाठक मत बनिए, सक्रिय साथी बनिए, ताकि अपन सब मिलकर बना पाएं एक अच्छी और सच्ची शिवपुरी। आपकी एक प्रतिक्रिया मुद्दों को नया मोड़ दे सकती है। इसलिए प्रतिक्रिया जरूर दर्ज करें।