शिवपुरीं। शिवपुरी जिले की बाढ़ आपदा प्रबंधन की बात करे तो भोपाल के भरोसे है,शिवपुरी होमगार्ड कार्यालय से बाढ़ आपदा प्रबंधन का पत्र सरकारी बीमारी सिस्टम की आपदा में फस गया है। मानसून सिर पर है,कभी भी आसमान से बादल वर्षा कर सकते और जिले की सीमा से निकली सिंधि नदी कोहराम मचा सकती है,सिंध के अतिरिक्त जिले के सैकड़ों नाले किसी जिंदा जिंदगी को निगल सकते है,एसे मे बाढ आपदा प्रबंधन के पास संसाधनों की भारी कमी है। बाढ़ आपदा में सबसे पहले जाने वाली SDRF की टीम के पास केवल 4 जवान है,संसाधन भी सीमित है,ऐसे मे बाढ आपदा प्रबंधन केवल भगवान के भरोसे ही चल रहा है।
आंकड़े जो हैरान करते हैं
पूरे शिवपुरी जिले की 5 तहसीलों को बाढ़ जैसी गंभीर आपदा से बचाने का जिम्मा जिन कंधों पर है, उनके पास संसाधनों के नाम पर सिर्फ निराशा है। होमगार्ड कमांडेंट कार्यालय के आंकड़े डराने वाले हैं,शिवपुरी जिले के लिए मात्र 3 (2 रबर बोट और 1 प्लास्टिक बोट) है और इन नावों को चलाने के लिए सिर्फ 2 ओवीएम इंजन,अग बचाव सामग्री की बात करे तो 60 लाइफ जैकेट, 30 लाइफ बॉय और 2 आस्का लाइट हैं। सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति मैनपावर की है। एसडीआरएफ (SDRF) में महज 4 जवान तैनात हैं, जबकि नियमों के मुताबिक एक रेस्क्यू टीम में कम से कम 8 जवान होने चाहिए।
खौफनाक यादें और ग्रामीणों का दर्द
हर साल बारिश के मौसम में सिंध, महुअर और पार्वती नदियां अपना रौद्र रूप दिखाती हैं। बदरवास, कोलारस, रन्नौद, नरवर और पोहरी तहसीलों के दर्जनों गांव टापू में तब्दील हो जाते हैं। लोगों के जेहन में 2023 की वो खौफनाक यादें आज भी ताजा हैं, जब कोलारस के 12 और बदरवास के 8 गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से पूरी तरह कट गया था। उस समय भी नावों की कमी के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में 18 घंटे से ज्यादा का समय लग गया था। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि प्रशासन हर साल बाढ़ आने पर ही नींद से जागता है।
भोपाल के भरोसे अटका है जिले का बचाव
आखिर इतनी बड़ी लापरवाही का जिम्मेदार कौन है? दरअसल, पहले आपदा प्रबंधन के लिए कलेक्टर स्तर पर 10 लाख रुपए का बजट मिलता था, जिससे तुरंत सामग्री आ जाती थी। लेकिन अब सिस्टम बदल गया है। अब हर सामग्री भोपाल स्तर से आती है। शिवपुरी होमगार्ड कार्यालय ने कम से कम 10 नई नावों, 5 ओवीएम इंजन और 40 अतिरिक्त जवानों का प्रस्ताव वरिष्ठ कार्यालय को भेज दिया है, लेकिन फाइल कहां अटकी है और सामान कब मिलेगा, यह किसी को नहीं पता।
तहसीलों में नाव नहीं, 2 घंटे दूर है मदद
आपदा प्रबंधन का नियम कहता है कि हर तहसील स्तर पर एक नाव और ओवीएम इंजन होना अनिवार्य है, ताकि आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके। लेकिन शिवपुरी की 9 तहसीलों में से किसी के पास खुद की नाव नहीं है। तीनों नावें जिला मुख्यालय पर रखी हैं। ऐसे में अगर पोहरी या नरवर में अचानक बाढ़ आ जाए, तो नाव को वहां तक पहुंचने में ही 1 से 2 घंटे का समय लग जाएगा, जो किसी की जान जाने के लिए काफी है।
अब स्वयंसेवकों का सहारा
संसाधनों और जवानों की इस भारी कमी के बीच जिला प्रशासन ने अब आम नागरिकों का सहारा लिया है। आपदा प्रबंधन को सशक्त बनाने के लिए 'सिविल डिफेंस वॉलिंटियर्स' का गठन किया जा रहा है। होमगार्ड कार्यालय द्वारा 23 जून से 25 जून तक ऐसे सेवाभावी लोगों का पंजीयन किया जा रहा है, जो स्वेच्छा से बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं में मदद करना चाहते हैं।
इस पूरी स्थिति पर होमगार्ड कार्यालय शिवपुरी के प्लाटून कमांडर मनीष श्रीवास्तव का कहना है कि संसाधनों की कमी को लेकर वरिष्ठ कार्यालय को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। फिलहाल जो संसाधन और जवान उपलब्ध हैं, उन्हीं की टीमें बनाकर बेहतर काम करने का प्रयास किया जाएगा।
इस मामले में अपने राम का तो यही कहना है कि बाढ आपदा भगवान भरोसे है,जनता अपनी सुरक्षा स्वयं करें,शिवपुरी जिले की विकास की गंगा बहाने वाली नेतागिरी भी इस ओर ध्यान नहीं देती है,सरकारी स्तर से शिवपुरी का होमगार्ड कार्यालय पत्राचार कर रहा है,लेकिन नेतागिरी को भी इस ओर सक्रिय होना चाहिए,लेकिन जनता की मूलभूत सुविधाओं का इस शहर और जिले के जिम्मेदारों का ध्यान नहीं है।

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