शिवपुरी। शिवपुरी की सियासत में रविवार को एक ऐसी बैठक हुई जिसने शहर विकास से ज्यादा भाजपा की अंदरूनी राजनीति को चर्चा में ला दिया। शहर विकास की रणनीति बनाने के लिए भाजपा पार्षदों की गोपनीय बैठक बुलाई गई, लेकिन नगर पालिका की प्रथम नागरिक और अध्यक्ष गायत्री शर्मा को ही न्योता नहीं दिया गया। ऊपर से बैठक में शामिल होने वालों के मोबाइल भी बाहर जमा करा लिए गए। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर विकास की इस सीक्रेट मीटिंग में ऐसा क्या था, जिसे सार्वजनिक होने से रोका गया।
शहर के एक निजी होटल में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता भाजपा जिलाध्यक्ष जसवंत जाटव ने की। बैठक का घोषित उद्देश्य शहर विकास पर चर्चा बताया गया, लेकिन नगर पालिका अध्यक्ष की अनुपस्थिति ने पूरे आयोजन को राजनीतिक रंग दे दिया। शहरभर में दिनभर यही चर्चा रही कि जिस व्यक्ति के पास विकास कार्यों की स्वीकृति और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी है, उसे ही विकास की चर्चा से अलग क्यों रखा गया।
बैठक को और रहस्यमयी तब माना गया जब उसमें शामिल होने वाले पार्षदों के मोबाइल फोन बाहर रखवा लिए गए। राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। लोगों का कहना था कि यदि बैठक केवल विकास कार्यों पर केंद्रित थी तो फिर इतनी गोपनीयता की आवश्यकता क्यों पड़ी।
नगर पालिका में अध्यक्ष और भाजपा पार्षदों के बीच खींचतान कोई नई बात नहीं है। करीब चार साल पहले परिषद के गठन के समय शहर हित में मिलकर काम करने का संकल्प लिया गया था, लेकिन कुछ ही महीनों में मतभेद खुलकर सामने आने लगे। पिछले चार वर्षों में कई बार भाजपा संगठन ने दोनों पक्षों के बीच सामंजस्य स्थापित करने की कोशिश की, लेकिन हर प्रयास अधूरा ही साबित हुआ।
सूत्रों के मुताबिक बैठक में भाजपा पार्षदों से उनके वार्डों की समस्याओं और विकास कार्यों पर राय ली गई। इस दौरान कुछ पार्षदों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जनता आज भी सड़क, पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान है। कई विकास कार्य केवल कागजों तक सीमित हैं, जबकि धरातल पर उनका असर दिखाई नहीं दे रहा।
बताया जा रहा है कि संगठन की ओर से पार्षदों को आश्वस्त किया गया कि जल्द ही प्रत्येक वार्ड में प्रारंभिक तौर पर 25-25 लाख रुपये के विकास कार्य कराए जाएंगे। इसके लिए पार्षदों से प्राथमिकता के आधार पर योजनाएं तैयार करने को कहा गया है।
इधर विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि बैठक के बाद पार्षदों को दिल्ली रवाना होने के निर्देश दिए गए हैं, जहां सोमवार सुबह सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ शहर विकास को लेकर चर्चा प्रस्तावित है। खास बात यह बताई जा रही है कि इस प्रतिनिधिमंडल में भी नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा को शामिल नहीं किया गया है।
अब शहर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भाजपा संगठन की यह कवायद वास्तव में विकास की नई शुरुआत साबित होगी या फिर नगर पालिका की गुटबाजी का एक और अध्याय बनकर रह जाएगी।

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