शिवपुरी। बदरवास थाना क्षेत्र के ग्राम दीगोद में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बन रही सड़क अब राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद का केंद्र बन गई है। हाईवे से चितारा आदिवासी बस्ती तक बनाई जा रही करीब साढ़े तीन किलोमीटर लंबी डामर सड़क के निर्माण को लेकर एक ओर मारपीट और धमकी का मामला दर्ज हुआ है, तो दूसरी ओर बदरवास नगर परिषद के पार्षद सुमित यादव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में पार्षद ने सड़क निर्माण में नियम बदलने और राजनीतिक दबाव में झूठी एफआईआर दर्ज कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
दरअसल, ग्राम ककरवाया निवासी वीरू पुत्र कल्लू रावत ने बदरवास थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि सड़क निर्माण के दौरान मिट्टी डालने को लेकर विवाद हुआ, जिसमें कोलारस जनपद उपाध्यक्ष आशा यादव के बेटे एवं बदरवास नगर परिषद पार्षद सुमित यादव तथा उनके भाई जीएसटी इंस्पेक्टर अमित यादव ने उसके साथ मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया।
एफआईआर दर्ज होने के बाद पार्षद सुमित यादव का एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर बहुप्रचारित हो गया, जिसमें उन्होंने सड़क निर्माण एजेंसी के ठेकेदार सूरज बंसल और निर्मल बंसल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सुमित यादव का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान पूरे गांव के किसानों ने नियमानुसार अपनी-अपनी फेंसिंग करीब 25-25 फीट पीछे कर ली, लेकिन जब सड़क कोलारस विधायक महेंद्र सिंह यादव के जीजा एवं पूर्व जनपद अध्यक्ष मिथिलेश यादव के पति राजेश यादव के खेत तक पहुंची, तब ठेकेदार ने नियम बदल दिए।
सुमित यादव का आरोप है कि राजेश यादव के खेत को बचाने के लिए सड़क की दिशा दूसरी तरफ से समायोजित करने का प्रयास किया गया। उनका कहना है कि सड़क के दूसरी ओर भी राजेश यादव की ही जमीन है, इसलिए उनके खेत को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए विशेष व्यवस्था की जा रही थी।
पार्षद ने वीडियो में दावा किया कि उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए अपनी फेंसिंग पीछे करने से मना कर दिया था। इसी बात से नाराज होकर राजनीतिक दबाव में उनके और उनके भाई के खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराया गया। उनका कहना है कि यह कार्रवाई उन्हें दबाव में लेने और विरोध की आवाज दबाने के लिए की गई है।
दान नहीं, सरकारी जमीन छोड़ी गई
विवाद के बीच सुमित यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि किसानों ने सड़क निर्माण के लिए अपनी निजी जमीन दान नहीं दी है। उनके अनुसार कई वर्ष पहले यहां नहर निर्माण के लिए किसानों की लगभग 40-40 फीट जमीन का अधिग्रहण हुआ था और उसका मुआवजा भी दिया गया था। बाद में नहर बंद हो गई और उसमें मिट्टी भर दी गई, जिसके बाद किसानों ने उस जमीन पर कब्जा कर लिया। अब सड़क निर्माण के दौरान उसी सरकारी जमीन से किसानों ने अपनी फेंसिंग पीछे हटाई है।
सुमित यादव का कहना है कि जब सभी किसानों ने समान रूप से कब्जा हटाया है, तो राजेश यादव को भी नियमानुसार ऐसा करना चाहिए। लेकिन उनके मामले में अलग नियम लागू करने की कोशिश की जा रही है, जिससे गांव में नाराजगी बढ़ रही है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
यह मामला अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया है। वायरल वीडियो के बाद लोग सड़क निर्माण में कथित पक्षपात और राजनीतिक प्रभाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं। वहीं कुछ लोग इसे स्थानीय राजनीति और आपसी विवाद का परिणाम भी बता रहे हैं।
विधायक ने क्या कहा?
इस पूरे मामले पर कोलारस विधायक महेंद्र सिंह यादव ने कहा कि वे फिलहाल भाजपा के प्रशिक्षण वर्ग में व्यस्त हैं और उन्हें पूरे घटनाक्रम की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण वर्ग से लौटने के बाद मामले की जानकारी लेकर ही कुछ कह पाएंगे।

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