शिवपुरी,न्यायालय ने ठोका थानेदार साहब पर 5 हजार का अर्थदंड, पढिए मामला

vikas
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शिवपुरी।
न्यायालयीन कार्यों में लापरवाही और तारीखों पर अनुपस्थित रहने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। एक ऐसे ही मामले में द्वितीय अपर सत्र न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए लंबित सत्र प्रकरण में घोर लापरवाही बरतने पर गोवर्धन थाना प्रभारी सौरभ तोमर पर 5,000 रुपये का जुर्माना (कास्ट) लगाया है।

खास बात यह है कि न्यायालय ने इस जुर्माने की वसूली की जिम्मेदारी पोहरी अनुविभागीय अधिकारी पुलिस (SDOP) आनंद राय को सौंपी है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि SDOP संबंधित थाना प्रभारी से इस राशि की वसूली करवाकर इसे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा करवाएं और इसकी रसीद आगामी 10 जून 2026 तक अनिवार्य रूप से न्यायालय के समक्ष पेश करें।

यह है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, द्वितीय अपर सत्र न्यायालय में सत्र प्रकरण क्रमांक 128/23 (मध्य प्रदेश राज्य बनाम आरक्षी केंद्र, गोवर्धन) का मामला लंबित है। इस मामले में आरोपी पक्ष की ओर से 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' (BNSS) की धारा 346 के तहत एक आवेदन न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था। इस महत्वपूर्ण आवेदन पर सुनवाई नियत थी, जिसमें थाना प्रभारी गोवर्धन सौरभ तोमर को उपस्थित रहना था।

कोर्ट ने जताई गहरी नाराजगी, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान जब थाना प्रभारी न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए, तो कोर्ट ने उनकी अनुपस्थिति पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। माननीय न्यायाधीश ने पुलिस की इस लचर कार्यप्रणाली पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि न्यायालयीन समय और प्रक्रिया का सम्मान किया जाना बेहद जरूरी है।

कोर्ट ने अपने आदेश में देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) के ऐतिहासिक फैसले राजेश प्रसाद बनाम प्रकाशराज 2011 का विशेष रूप से हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारियों द्वारा अदालती आदेशों और तारीखों को हल्के में लेना न्याय प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करता है।

तय समय में रिपोर्ट पेश करने के आदेश
कड़ी फटकार लगाने के बाद न्यायालय ने थाना प्रभारी पर 5 हजार रुपये का अर्थदंड आरोपित किया। पोहरी एसडीओपी आनंद राय को निर्देशित किया गया है कि वे अपने अधीनस्थ थाना प्रभारी से इस राशि को रिकवर (वसूल) करवाएं। इसके साथ ही कोर्ट ने चेताया है कि निर्धारित तिथि 10 जून 2026 तक हर हाल में जुर्माना जमा होने की रसीद अदालत के रिकॉर्ड पर आ जानी चाहिए। 

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