शिवपुरी,डाक विभाग ने पब्लिक की डाक को बारातियों में गिफ्ट बांट दिया, फिर रिकवर की, पढिए मामला

vikas
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फरहान काजी रन्नौद @ कोलारस।
शिवपुरी जिले के कोलारस अनुविभाग के रन्नौद स्थित डाकघर की डाक से भरी बोरियों के अपहरण का मामला सामने आया है। सरकारी बोरिया गायब होते ही डाक विभाग के अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए और हड़कंप मच गया,हालांकि डाक विभाग ने खोज कर अपना माल बरामद कर लिया,लेकिन इस जांच में विभाग के साथ बस वाले की लापरवाही सामने आई है। डाक की बोरिया बारातियों से बरामद की गई,इसमें गलती बारातियों की नहीं निकली हैं,पढ़िए 8 दिन तक इस घटनाक्रम की पूरी खबर,इस मामले मे पुलिसिया रजिस्टर नहीं रंगा गया है।  

रन्नौद से शिवपुरी और ग्वालियर भेजी जाने वाली भारतीय डाक विभाग की सरकारी डाक अचानक गायब हो गई। मामला थाने तक पहुंचने ही वाला था कि अचानक ऐसा खुलासा हुआ जिसने सबको चौंका दिया। पता चला कि प्राइवेट बस स्टाफ ने डाक की बोरी गलती से बारातियों को सौंप दी थी।

जानकारी के अनुसार 4 और 5 मई को रन्नौद डाकघर से रोज की तरह स्पीड पोस्ट और अन्य सरकारी डाक प्राइवेट बस के जरिए शिवपुरी भेजी गई थी। वहां से यह डाक ग्वालियर सहित अन्य क्षेत्रों में पहुंचाई जानी थी, लेकिन अगले दिन तक डाक अपने गंतव्य तक नहीं पहुंची। जब डाक नहीं पहुंची तो डाक विभाग में हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने तत्काल पड़ताल शुरू की। पहले तो किसी को समझ नहीं आया कि आखिर सरकारी डाक गई कहां। मामला पुलिस थाने तक पहुंचने की स्थिति में आ गया था।

बताया जा रहा है कि जिस बस से डाक भेजी गई थी, वह बीच रास्ते से बारात में चली गई थी। इसी दौरान बस स्टाफ ने बंद बोरी को सामान्य सामान समझते हुए बारातियों को सौंप दिया। बाद में जब बस चालक और मालिक से पूछताछ हुई तो डाक चोरी का पूरा मामला सामने आया। आनन-फानन में बस चालक ने बस मालिक से संपर्क किया और फिर बारात में शामिल लोगों तक पहुंच बनाई गई। काफी खोजबीन के बाद डाक की बोरियां वापस मंगाई गईं। इसके बाद 13 मई को जाकर शिवपुरी और ग्वालियर की डाक का वितरण हो सका।

इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर सरकारी और संवेदनशील डाक को रोजाना प्राइवेट बसों के भरोसे क्यों भेजा जा रहा है? यदि डाक में किसी की जरूरी फाइल, बैंक दस्तावेज, कानूनी कागजात, गहने या नकदी होती तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

मामले में बस स्टाफ, बस मालिक और डाक विभाग-तीनों की भूमिका सवालों के घेरे में है। यह केवल एक “अनदेखी” नहीं मानी जा सकती, क्योंकि सरकारी डाक की सुरक्षा और समय पर वितरण दोनों ही संवेदनशील जिम्मेदारियां हैं। उप डाकपाल अधिकारी रन्नौद राकेश ओझा ने बताया कि रोजाना रन्नौद से प्राइवेट बस के माध्यम से डाक शिवपुरी भेजी जाती है। इस बार ऐसी स्थिति कैसे बनी, यह समझ से परे है। हालांकि डाक मिल गई और उसका वितरण कर दिया गया है।

फिलहाल मामला पुलिस एफआईआर तक नहीं पहुंचा, लेकिन इस घटना ने डाक व्यवस्था की सुरक्षा और विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब देखना होगा कि इसे केवल “गलती” मानकर भुला दिया जाएगा या फिर भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए कोई ठोस व्यवस्था बनाई जाएगी।

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