माफियाओं का फॉरेस्ट टीम पर हमला, मारपीट कर बंधक बनाया और मामला दर्ज भी करवा दिया

vikas
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Forest department employees attacked
शिवपुरी। शिवपुरी जिले के सुभाषपुरा थाना सीमा मे करसेना गांव मे वन क्षेत्र मे अवैध उत्खनन रोकने गई वन विभाग की टीम पर खनन माफियाओं ने हमला कर दिया,वन​कर्मियों की मारपीट की गई उन्हें बंधक बनाया मोबाइल तक छीन लिए और रात भर  बंधक बनाया। अब उल्टा वन विभाग के कर्मचारियों पर मामला दर्ज कर लिया है। हरिजन एक्ट का मामला दर्ज होने के बाद कर्मचारियों ने शिवपुरी पुलिस अधीक्षक सहित वन मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा है।

घटना के विरोध में मध्यप्रदेश वन कर्मचारी संघ खुलकर मैदान में उतर आया है। संघ ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर वन कर्मियों पर दर्ज एफआईआर निरस्त करने और हमला करने वाले आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो कर्मचारी आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

रात के अंधेरे में चल रहा था अवैध उत्खनन
जानकारी के अनुसार 9 मई की रात करीब 12 बजे वन विभाग को सूचना मिली थी कि करसेना बीट के जंगल क्षेत्र में अवैध रूप से मिट्टी का उत्खनन किया जा रहा है। सूचना मिलने पर बीट गार्ड प्रदीप कुमार, कार्यवाहक वनपाल जुल्फिकार शिवानी, कर्मचारी खुमान सिंह, चौकीदार सतनाम सिंह जाटव और चिरौंजी आदिवासी मौके पर पहुंचे। वन कर्मियों के अनुसार जंगल क्षेत्र में तेज रोशनी के बीच जेसीबी मशीन से खुदाई चल रही थी और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से मिट्टी का परिवहन किया जा रहा था। जैसे ही टीम ने वाहनों को रोकने का प्रयास किया, ट्रैक्टर चालक भागने लगे और विवाद की स्थिति बन गई।

ग्रामीणों ने हमला कर मोबाइल छीने
वन कर्मचारी संघ द्वारा दिए गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने अंधेरे का फायदा उठाकर वन कर्मियों पर हमला कर दिया। कर्मचारियों को डंडों और लाठियों से पीटा गया, जिससे कई कर्मचारी घायल हो गए। संघ का आरोप है कि हमलावरों ने कर्मचारियों के मोबाइल फोन भी छीन लिए और उन्हें बेहोशी की हालत में छोड़कर फरार हो गए। घटना की शिकायत उसी रात सुभाषपुरा थाना में दर्ज कराई गई थी। बाद में पुलिस मौके पर पहुंची और वनकर्मियों को वहां से सुरक्षित बाहर निकाला।

अब वन कर्मियों पर ही दर्ज हुई एफआईआर
घटना के अगले ही दिन यानी 10 मई को वन विभाग के कर्मचारियों पर हरिजन एक्ट और अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया। इस कार्रवाई से वन कर्मचारी संघ में भारी नाराजगी है। संघ का कहना है कि जो कर्मचारी शासकीय कार्य करते हुए घायल हुए, उन्हीं पर उल्टा मामला दर्ज कर दिया गया, जो पूरी तरह गलत है। संघ ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर वन कर्मियों पर दर्ज एफआईआर तत्काल निरस्त की जाए और शासकीय कार्य में बाधा डालने तथा हमला करने वाले लोगों को गिरफ्तार किया जाए।

कर्मचारी संघ ने दी आंदोलन की चेतावनी
पुरुषोत्तम शर्मा ने कहा कि यदि दोषियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई नहीं हुई और वन कर्मियों पर दर्ज मामले वापस नहीं लिए गए तो कर्मचारी आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। संघ का कहना है कि लगातार बढ़ते अवैध उत्खनन और खनन माफियाओं के दबाव के बीच वन कर्मचारी भय के माहौल में काम कर रहे हैं। ऐसे में यदि कार्रवाई करने वाले कर्मचारियों पर ही मुकदमे दर्ज होंगे तो भविष्य में कोई भी कर्मचारी अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई करने से डरेगा।

खनन माफियाओं के बढ़ते नेटवर्क पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने जिले में सक्रिय अवैध उत्खनन नेटवर्क और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जंगल क्षेत्रों में रात के समय जेसीबी और ट्रैक्टरों से खुलेआम उत्खनन होना यह दर्शाता है कि खनन माफियाओं के हौसले कितने बुलंद हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध उत्खनन का खेल जारी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभाई जाती रही हैं। अब वन कर्मियों पर हमला और उसके बाद उन्हीं पर एफआईआर दर्ज होने से मामला और ज्यादा संवेदनशील बन गया है। इस मामले मे सुभाषपुरा थाना प्रभारी से संपर्क करने का प्रयास किया तो उन्होंने अपना मोबाइल नहीं उठाया। 

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