ललित मुदगल एक्सरे@ शिवपुरी। शिवपुरी जिला ग्वालियर सिंधिया राजघराने के महाराजा श्रीमंत सरकार ज्योतिरादित्य सिंधिया की कर्म स्थली है उनका संसदीय क्षेत्र है। ज्योतिरादित्य सिंधिया देश की सरकार मे केन्द्रीय मंत्री ओर देश के सबसे प्रभावशाली नेताओ मे उनका नाम लिख सकते है। शिवपुरी मे आयोजित प्रेस वार्ता मे श्रीमंत सरकार ने कहा था कि समस्याओं की बात नहीं, केवल विकास की बात करें। लेकिन शायद विकास की इसी चर्चा के बीच आमजन की बुनियादी समस्याएं कहीं पीछे छूट गईं, और आज स्थिति यह है कि शिवपुरी जिला प्रदेश में शिकायतों के ढेर पर बैठा नजर आ रहा है।यह हम नही कह रहे यह सरकारी आंकडे बता रहे है। शिकायती जिलो की बात करे तो शिवपुरी प्रदेश के चौथे पायदान पर है। इससे साफ स्पष्ट हो रहा है कि शिवपुरी जिले का आमजन समस्याओ का समाधान शिवपुरी स्तर के अधिकारी निबटा नही पा रहे है इस कारण उन्है 181 पर कॉल करना पड रहा है।
कहने को तो शासन की मंशा है कि जनता की समस्याओं का समाधान उनकी चौखट पर ही हो जाए, लेकिन धरातल की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जब गांवों की चौपाल और दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद भी फरियादी की सुनवाई नहीं होती, तब हार मानकर वह मुख्यमंत्री की चौखट यानी सीएम हेल्पलाइन का दरवाजा खटखटाता है।
इसी का नतीजा है कि शिवपुरी जिला अब प्रदेश में शिकायतों के मामले में चौथे पायदान पर जा पहुँचा है। जिले के जागरूक लेकिन परेशान नागरिक अब तक कुल 34,487 शिकायतें दर्ज करा चुके हैं।
सिंधिया की जनसुनवाई में उमड़ा सैलाब
क्षेत्रीय स्तर पर संवादहीनता का आलम यह है कि हाल ही में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की जनसुनवाई में एक साथ 1,500 से अधिक शिकायतें आईं। इतना ही नहीं, कलेक्टर की जनसुनवाई में तो एक जिला पंचायत सदस्य खुद 700 शिकायतों का बंडल लेकर पहुँच गए。 समाजसेवी मनीराम लोधी का कहना है कि यदि स्थानीय स्तर पर ही अधिकारी मिलें और समस्याओं को सुनें, तो लोगों को जिला मुख्यालय या हेल्पलाइन का सहारा ही न लेना पड़े।
क्यों बढ़ रहा है शिकायतों का ग्राफ?
इस बढ़ते आंकड़े के पीछे एक बड़ी वजह अधिकारियों की दफ्तरों से दूरी है। ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात अधिकांश कर्मचारी और अधिकारी शहरों में निवास करते हैं। जब ग्रामीण मीलों दूर से दफ्तर पहुँचते हैं और वहां कुर्सी खाली मिलती है, तो उनका भरोसा टूट जाता है और वे फोन उठाकर 181 डायल कर देते हैं।
शिवपुरी जिले की राजनीति की बात करे तो यहां के सासंद स्वय देश की सरकार मे केन्द्रीय मंत्री है और शिवपुरी विधानसभा की पांच विधानसभा सीटो पर चार सीटो पर भाजपा के माननीय विधायक है। भारतीय जनता पार्टी का सगंठन बूथ स्तर पर मॉनिरिटिंग करता है,बूथ प्रभारी को अपनी सबसे बडी ताकत मानता है उसके बाद भी जनता की नाराजगरी चौथे नंबर पर नोट की गई है। संगठन ओर स्थानीय नेताओ को समझना होगा जनता उनसे कितनी नाराज है इस कारण भोपाल स्तर तक अपनी शिकायत पहुंचा रही है।
श्रीमंत के सरकार के समर्थक भी समझे,चुनौतीपूर्ण है
सरकारी आंकड़े इस कड़वी हकीकत की तस्दीक कर रहे हैं कि शिकायतों के मामले में शिवपुरी पूरे मध्य प्रदेश में चौथे पायदान पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा सीधा संकेत दे रहा है कि जिले के जमीनी स्तर के अधिकारी जनता की समस्याओं को स्थानीय स्तर पर सुलझाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। मजबूर होकर आम आदमी को अपनी फरियाद लेकर मुख्यमंत्री की 181 हेल्पलाइन का सहारा लेना पड़ रहा है। जब जिले के भीतर सुनवाई के दरवाजे बंद नजर आते हैं, तभी शिकायतों का यह पहाड़ खड़ा होता है। शिवपुरी जिले मे जब श्रीमंत सरकार का दौरा होता है तो शिवपुरी जिले के 2 दर्जन नेता उन्है घेरे रहते हैं,अपने राजनीतिक भगवान को वह क्या फीड बैंक देते है यह तो भगवान ही जाने लेकिन इन आकंडो को नजरअंदाज करना अब श्रीमंत सरकार के लिए भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
प्रदेश के टॉप-4 शिकायती जिले
मुरैना 38,396 (प्रथम)
छतरपुर 35,237 (द्वितीय)
सीधी 34,607 (तृतीय)
शिवपुरी 34,487 (चतुर्थ)
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