शिवपुरी। सामान्य वन मंडल शिवपुरी की बिरदा बीट के बरेट जंगल में एक तेंदुए की मौत ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खेत से लगे जंगल क्षेत्र में बुधवार को तेंदुआ मृत अवस्था में मिला, जबकि वन अमले ने उसे तीन दिन पहले ही गंभीर रूप से घायल हालत में देखा था। आरोप है कि समय रहते न तो उसका रेस्क्यू किया गया और न ही इलाज की कोई प्रभावी व्यवस्था की गई। परिणामस्वरूप तेंदुआ तीन दिन तक जंगल में तड़पता रहा और आखिरकार उसकी मौत हो गई।
जानकारी के मुताबिक 17 मई को डिप्टी रेंजर बाबूलाल नरवरिया और वन रक्षक सदैव शर्मा ने बिरदा बीट क्षेत्र में तेंदुए को घायल अवस्था में देखा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तेंदुए की हालत बेहद खराब थी। वह अपनी जगह से उठ भी नहीं पा रहा था। उसके एक पैर में गंभीर चोट थी और हड्डी बाहर तक दिखाई दे रही थी। नाक से खून बह रहा था, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वह किसी हादसे या शिकारियों के हमले का शिकार हुआ हो सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि घायल तेंदुआ तीन दिन तक उसी इलाके में पड़ा रहा। इस दौरान वह भूखा-प्यासा तड़पता रहा, लेकिन वन विभाग की ओर से उसे सुरक्षित निकालने या उपचार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बुधवार को जब वन अमला मौके पर पहुंचा तो तेंदुआ मृत मिला।
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब मृत तेंदुए को झाड़ियों से बाहर निकालने के लिए उसके पैर में लोहे का तार बांधकर घसीटने का वीडियो और तस्वीरें सामने आईं। वन्यजीव प्रेमियों और ग्रामीणों ने इसे अमानवीय बताते हुए विभाग की संवेदनहीनता पर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि जिस वन्यजीव की सुरक्षा की जिम्मेदारी विभाग पर है, उसी के साथ मौत के बाद भी लापरवाही बरती गई।
डिप्टी रेंजर बाबूलाल नरवरिया का कहना है कि 17 मई को तेंदुआ दिखाई दिया था और रेस्क्यू टीम को सूचना भी दी गई थी। उनके अनुसार तेंदुआ बाद में जंगल की ओर चला गया था। वहीं रेंजर गोपाल जाटव ने दावा किया कि तेंदुए की मौत उसकी उम्र पूरी होने के कारण हुई है।
हालांकि वन विभाग के इस दावे पर कई सवाल उठ रहे हैं। तेंदुए के शरीर पर गहरी चोटों के निशान, बाहर निकली हड्डी और खून के निशान विभाग की कहानी से मेल नहीं खाते। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते इलाज और रेस्क्यू किया जाता तो संभव है कि तेंदुए की जान बचाई जा सकती थी।
इस घटना के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि जंगलों में वन्यजीवों की सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात बेहद खराब हैं। अब लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठाई है।

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