शिवपुरी का पारा 43 डिग्री पर अटका,शहर अर्बन हीट आइलैंड मे कन्वर्ट,पढ़िए क्यों

vikas
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शिवपुरी।
शिवपुरी जिले में गर्मी अब सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि मुसीबत बनती जा रही है। सूरज की तपिश ने जनजीवन को बेहाल कर दिया है। मंगलवार को जिले का अधिकतम तापमान लगातार दूसरे दिन 43 डिग्री सेल्सियस पर अटका रहा, जबकि न्यूनतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। खास बात यह रही कि बीते 24 घंटे में रात के तापमान में 2 डिग्री की बढ़ोतरी हुई, जिससे लोगों को रात में भी राहत नहीं मिल सकी। हालात ऐसे हैं कि दिन में सड़कें सूनी नजर आने लगी हैं और रात में घरों के भीतर उमस लोगों की नींद छीन रही है।

सुबह 6 बजे सूरज निकलते ही गर्मी अपने तेवर दिखाने लगती है। सुबह 9 बजे तक हालात इतने खराब हो जाते हैं कि लोग घरों से निकलने से बचने लगे हैं। दोपहर होते-होते सड़कें वीरान और बाजार खाली दिखाई देने लगते हैं। तेज धूप और लू के थपेड़ों ने मजदूरों, किसानों और राहगीरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कूलर और पंखे भी अब राहत देने में नाकाम साबित हो रहे हैं।

आखिर क्यों बढ़ रही है इतनी गर्मी

एंटी-चक्रवात (Anticyclone) और शुष्क हवाएं: इस समय मध्य भारत के ऊपर एक उच्च वायुदाब का क्षेत्र बना हुआ है। इसके कारण राजस्थान और पाकिस्तान के बलूचिस्तान के रेगिस्तानी इलाकों से आने वाली बेहद सूखी और गर्म पछुआ हवाएं बिना किसी रुकावट के सीधे शिवपुरी क्षेत्र में दाखिल हो रही हैं,वही आसमान मे बादल नही होने से आसमान साफ है और सूरज की गर्मी सीधे जमीन पर पड रही है,यह भी एक कारण है तापमान ऊपर जाने का। 

कंक्रीट का जंगल और घटती हरियाली: शिवपुरी शहर और आसपास के क्षेत्रों में तेजी से हुए शहरीकरण ने 'अर्बन हीट आइलैंड' (Urban Heat Island) का रूप ले लिया है। कंक्रीट की सड़कें और इमारतें दिनभर गर्मी को सोखती हैं और रात में उसे वापस छोड़ती हैं, यही वजह है कि रात का पारा ३० डिग्री से नीचे नहीं उतर रहा है।

25 मई से शुरू होंगे नौतपा 

विशेषज्ञ वीके राय के अनुसार आगामी दिनों में तापमान और बढ़ सकता है। 25 मई से शुरू होने वाले नौतपा का असर अभी से दिखाई देने लगा है। नौतपा के दौरान सूर्य की किरणें पृथ्वी पर अधिक सीधी पड़ती हैं, जिससे तापमान में तेज उछाल आता है। यदि मौसम का यही रुख बना रहा तो आने वाले दिनों में हीट वेव और अधिक खतरनाक रूप ले सकती है।

युवाओं पर असर, थकान और डिहाइड्रेशन बढ़ा

भीषण गर्मी का असर युवाओं पर भी तेजी से दिखाई दे रहा है। लगातार पसीना निकलने से शरीर में पानी की कमी हो रही है। बाइक चलाने वाले, डिलीवरी बॉय, मजदूर और खुले में काम करने वाले युवा चक्कर, सिरदर्द और कमजोरी की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। लंबे समय तक धूप में रहने से हीट स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ गया है।

बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा खतरे में

डॉक्टरों का कहना है कि बच्चे और बुजुर्ग इस मौसम में सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं। बच्चों में डिहाइड्रेशन, उल्टी-दस्त और बुखार जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं, जबकि बुजुर्गों में ब्लड प्रेशर, सांस लेने में परेशानी और हार्ट से जुड़ी दिक्कतें बढ़ने लगी हैं। कई बुजुर्गों को रात में उमस के कारण नींद नहीं आ रही, जिससे उनकी सेहत पर असर पड़ रहा है।

जानवर भी गर्मी से बेहाल

इस तपिश का असर सिर्फ इंसानों पर ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों पर भी दिखाई दे रहा है। तालाब और पोखर सूखने लगे हैं, जिससे मवेशियों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। दोपहर में सड़क किनारे गाय, कुत्ते और अन्य जानवर छांव तलाशते नजर आते हैं। पक्षियों की संख्या भी खुले आसमान में कम दिखाई दे रही है। पशु चिकित्सकों के अनुसार गर्मी बढ़ने से दूध देने वाले पशुओं की क्षमता भी प्रभावित होती है।

डॉक्टरों की सलाह

डॉक्टरों ने लोगों को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक अनावश्यक रूप से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी है। अधिक पानी पीने, नींबू पानी, छाछ और ओआरएस लेने के साथ हल्के सूती कपड़े पहनने की हिदायत दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि लू से बचाव ही इस समय सबसे बड़ा उपचार है।

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