शिवपुरी। शहर में निवासरत एक युवक को परेशान करना एम्स दिल्ली के अकाउण्ट ऑफीसर को उस समय महंगा पड़ा जब युवक ने कोर्ट के जरिये एम्स दिल्ली के अकाउण्टेंट के खिलाफ चैक बाउंस का मामला दर्ज कराया है।
जानकारी के अनुसार परिवादी राजेन्द्र कुमार वर्मा की पुत्री अंजली वर्मा बीते कई वर्षो से स्पाईनल नामक बीमारी से ग्रसित थी। जिसके ऑपरेशन के लिए राजेन्द्र वर्मा ने 15 हजार रूपये न्यूरो सर्जन पेंसेंट अकाउण्ट में रसीद क्रमांक 36916 दिनांक 23 मई 2014 को चैक के द्वारा जमा करा दिए गए थे। उक्त बीमारी के ईलाज के लिए एम्स द्वारा राजेन्द्र को कई तिथियां दी गई। परंतु कुछ समय बाद एम्स ने ईलाज करने से इंकार कर दिया। इस इंकारी के बाद राजेन्द्र ने एम्स के अकाउण्ट सेक्शन से जमा 15 हजार रूपये वापस मांगे नगद राशि नहीं देने का हवाला देते हुए टालते रहे।
उसके बाद जब फरियादी ने उक्त बात की शिकायत एम्स में उच्च अधिकारीयों से की तो उन्होंने राजेन्द्र को 6 फरवरी 2016 को चैक क्रमांक 220721 भारतीय स्टेट बैंक अंसारी नगर दिल्ली के चैक से भुगतान के लिए दे दिया। जब राजेन्द्र ने उक्त चैक को क्लीयर कराने बैंक में लगाया तो बैंक ने चैक पर हस्ताक्षर का मिलान नहीं होने की कहकर चैक बापिस कर दिया।
एक्स द्वारा उक्त चैक के बदले दूसरा चैक दिया गया। जब राजेन्द्र ने उक्त चैक को भी क्लीयर कराने बैक में लगाया तो उक्त चैक भी बाउंस हो गया। इसके बाद राजेन्द्र ने बकील के माध्यम से बाउण्स चैक की जानकारी एम्स को भेजी लेकिन एम्स की और से कोई भी जबाब नहीं मिलने पर राजेन्द्र ने कोर्ट की शरण लेते हुए जेएमएफसी कोर्ट में परिवाद प्रस्तुत किया। जिसपर जेएमएफसी मुकेश गुप्ता ने प्रथम दृष्टता चैक बाउण्स का दोषी मानते हुए धारा 138 नेगोसियेबल इंस्टूमेंट एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
