शिवपुरी। राज्य सरकार द्वारा अध्यापकों को छठवें वेतनमान दिये जाने के निर्णय का स्वागत अध्यापकों ने किया है लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जो हाल ही मे छठवें वेतनमान दिये जाने का मसौदा केबिनेट मे प्रस्तुत किया गया है। उससे अध्यापक संवर्ग सकते मे आ गया है। संक्षेपिका के कुछ पेज सोशल मीडिया पर लीक हुये हैं जिसके अनुसार आदेशो में भारी विसंगति होने का अंदेशा है।
अध्यापक संविदा षिक्षक संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष राजकुमार सरैया ने यह खुला खत प्रदेश के मुखिया को शिवपुरी समाचार डाट कॉम के माध्यम से लिखा है। इस खुले खत के माध्यम से वताया कि छठवें वेतनमान के लिये केबिनेट में भेजी गई संक्षेपिका के अनुसार अध्यापक संवर्ग को 1 जनवरी 2016 से दिये जाने वाले छठवे वेतनमान के निर्धारण में भारी विसंगतियां होंगी।
जिससे प्रदेश के सभी अध्यापकों में भारी असंतोष है। संक्षेपिका के अनुसार अध्यापकों ने इसमें कई कमियां गिनाई हैं जिनमें अंतरिम राहत की किस्तों का समायोजन के नाम पर वसूली करना सर्वथा अनुचित है तथा छठवां वेतनमान 1 जनवरी 2016 के स्थान पर दिस बर 2015 से दिया जाना।
सहायक अध्यापकों का वेतनमान 7440 और ग्रेड पे 2400, और वरिष्ठ अध्यापक का वेतनमान 10230 और ग्रेड पे 3600 होना चाहिये जो नही है। क्रमोन्नति पर वरिष्ठ पद का वेतन अन्य शासकीय शिक्षकों के समान उल्लेखित नही है और न ही पदोन्नति पर वेतन निर्धारण शिक्षक संवर्ग के समान किये जाने का उल्लेख किया गया है। जो संसोधित होना चाहिये।
शिक्षाकर्मियों को अध्यापक संवर्ग में संविलियन कर पूर्व कार्यकाल की प्राप्त वेतन वृद्वियों को स िमलित करते हुये नवीन वेतनमान की गणना की जानी चाहिये। अध्यापकों के अनुसार सरकार तो देना चाहती है पर अधिकारियों ने छठवें वेतनमान में पेच फसा दिया हैं।
और उनका दावा है कि अगर आदेशों में संसोधन नही किया गया तो भारी विसंगति उत्पन्न हो जायेगी। अध्यापकों ने म.प्र. के मुखिया माननीय शिवराज सिंह चौहान से छठवें वेतनमान के विसंगति रहित आदेश जारी करने की मांग की है।

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