शिवपुरी। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी पूरे जिले भर में बुराई का प्रतीक रावण के पुतले का दहन परंपरागत उत्साह के साथ किया गया। विजय दशमी पर्व पर शहर के अनेक स्थानों पर रावण के पुतले तैयार किए और आतिशबाजी के बीच रावण के पुतलों में मु य अतिथियों द्वारा आग लगाकर रावण के अहंकार को जलाकर राख कर दिया।
इसी तारत य में नगर में अनेक स्थानों पर रावण के पुतलों का दहन हुआ, लेकिन मु य कार्यक्रम सिद्धेश्वर मंदिर प्रांगण, काली माता मंदिर प्रांगण और न्यूब्लॉक में हंस बिल्डिंग के पास आयोजित हुए। एक ओर जहां पंजाबी परिषद द्वारा सिद्धेश्वर मंदिर प्रांगण में तथा काली माता मंदिर में वैश्य समाज द्वारा 40 फुट ऊंचे रावण के पुतलों का दहन किया गया। वहीं हंस बिल्डिंग चौराहे पर श्री शिवगोपाल शिवहरे परमार्थ समिति द्वारा 25 फुट ऊंचे रावण के पुतले के दहन भारी भीड़ के बीच किया गया। यह दहन इसलिए आकर्षण का केन्द्र बना क्योंकि प्रतिकात्मक रूप से समिति ने महंगाई और भ्रष्टाचार के रावण का दहन किया।
सिद्धेश्वर, कालीमाता मंदिर एवं न्यूब्लॉक में पुतला दहन के पूर्व जोरदार आतिशबाजी की गई। जिसे देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। इसके बाद रावण के पुतले की पूजा की गई। उसके बाद अतिथियों ने पुतले में आग लगाई और पुतला पटाखों की आवाज के साथ धंू धंू कर जलने लगा।
इसके बाद समिति के सदस्यों ने एक दूसरे को दशहरे की शुभकामनाएं दी फिर प्रसाद का वितरण किया गया। जलमंदिर आनंदपुर ट्रस्ट द्वारा निकाले गए चल समारोह में एक रथ पर भगवान राम के साथ लक्ष्मण और हनुमान सवार थे दूसरे रथ पर राक्षस रावण सवार था। यह चल समारोह शहर के विभिन्न मार्गाे से होते हुए सिद्धेश्वर मेला ग्राउण्ड पहुंचा। जहां राम और रावण में भयंकर युद्ध हुआ। इसके बाद ागवान राम ने तीर छोड़कर सबसे पहले कुंभकरण के पुतले में आग लगाई इसके बाद लक्ष्मण ने मेघनाथ के पुतले में आग लगाई और फिर भगवान राम ने रावण के पुतले पर तीर छोड़ दिया जिससे रावण धमाकों की आवाज के साथ जल उठा।
पुतला दहन के दौरान सिद्धेश्वर मैदान में स्थानीय जन प्रतिनिधि, अधिकारी व गणमान्य नागरिकों सहित भारी सं या में शहरवासी मौजूद थे। इसके बाद राम और रावण अपने-अपने रथों पर सवार होकर नरसिंह मंदिर दशहरा समिति द्वारा काली माता मंदिर पर तैयार किए गए रावण के दहन के लिए पहुंचे और काली माता मंदिर प्रांगण पर भी राम और रावण के बीच घमासान हुआ। इसके बाद भगवान राम ने अपने तीर से रावण को आग लगा दी। जिससे रावण का सारा अहंकार जलकर खाक हो गया।


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