सत्संग ही ला सकता है जीवन में परिवर्तन : ज्ञानानंद जी महाराज

shailendra gupta
शिवपुरी। जीवन में यदि बदलाव या परिवर्तन लाना है तो इसके लिए सत्संग से बेहतर अन्य कोई माध्यम नहीं, स्वयं गीता में भी सत्संग   की महत्वता पर जोर दिया गया है, गीता धर्म ग्रंथ नहीं, जीवन ग्रंथ है आज विश्व में जीवन के लिए अपने आप में हर क्षेत्र के विस्तार का ग्रंथ है,

कुरूक्षेत्र में श्रीकृष्ण ने दोनों सेनाओं के मध्य गीता का उपदेश दिया, तनाव, दबाब, ऊबसाब की तीन स्थितियां है इनका कोई उपचार नहीं है लेकिन गीता में इनका उपचार है प्रभु की सीधी दृष्टि चाहिए हो तो अर्जुन बनना पड़ेगा, विनम्र रहना पड़ेगा, अहंकारी व्यक्ति कभी शांत नहीं दिखेगा, महाभारत की लड़ाई का कारण द्रोपदी का अंधे का बेटा अंधा कहना नहीं था लड़ाई का कारण था दुर्योंधन का अहंकार, इसलिए अहंकार को त्यागकर सत्संग को जीवन में लाऐं। सत्संग के इस ज्ञान का भाव प्रकट कर रहे थे राष्ट्रसंत गीता मनीषी स्वामी श्री ज्ञानानन्द जी महाराज जो स्थानीय गांधी पार्क मैदान में धर्मप्रेमीजनों को गीता का उपदेश अपने सारगिर्भत आर्शीवचनों में श्रवण करा रहे थे। इस दौरान महाराजश्री जिला जेल के वरिष्ठ उपाधीक्षक व्ही.एस.मौर्य के आह्वान पर जिला जेल परिसर भी पहुंचे और यहां कैदियों के जीवन की मनोदशा बदलने पर गीता की सार्थकता को प्रकट किया।

महाराजश्री ज्ञानानन्द ने कैदियों के बीच कहा कि जेल में रहकर इंसान को कभी स्वयं को अकेला नहीं समझना चाहिए क्योंकि यहां विचार किया जा सकता है और यदि विचार सही हो तो जीवन भी बदला जा सकता है हमारे द्वारा भी हरियाणा की हिसार जेल में प्रवचन हुए, जहां कैदी गीता ज्ञान से इस तरह प्रभावित हुए तो कि आज वहां प्रतिदिन सुबह और शाम 256 कैदी गीता का पाठ व श्लोक से ध्यान करते है। 

महाराजश्री ज्ञानानन्द ने कहा कि जेल में आना कहीं ना कहीं बुद्धि का विकार है जिसके चले क्रोधवश किए अपराध की सजा यहां भुगतनी पड़ती हैलेकिन यहां आकर भी यदि उसी क्रोध में जलोगो तो जीवन में कभी अच्छा इंसान नहीं बन पाओगे, इसलिए जेल में रहकर भलाई का कार्य करें, अच्छे विचार और सद्प्रेरणा वाले कार्यों को ग्रहण करें, जेल में आने वाले मुनि महाराज व धर्मग्रंथों का अध्ययन करें, यदि यह सब कर लिया तो कभी जेल के द्वार आना ही नहीं पड़ेगा। 

जीवन में राम और सुदामा का नाम तो अच्छे में लिया जाता है लेकिन कोई भी अपने पुत्र का नाम रावण या कंस या विभीषण नहीं रखता इसका यह मतलब यह नहीं कि यह सब ज्ञानी नहीं थे इनमें ज्ञान तो था लेकिन इन्होंने अपने ज्ञान का दुरूपयोग जिसके कारण आज इन्हें सराहा नहीं जाता जबकि सुदामा अति गरीब थे फिर भी आदर केसाथ उनका स्मरण किया जाता है। 

कार्यक्रम में पूर्व विधायक वीरेन्द्र रघुवंशी, पूर्व विधायक माखन लाल राठौर, केमिस्ट एसोसि. संरक्षक कैलाश अग्रवाल, अजय स्वामी, सिंधिया निज सचिव रमेश शर्मा व वरिष्ठ नागरिक सेवा मिशन के राजेन्द्र शर्मा ने संयुक्त रूप से महाराजश्री की पूजा-अर्चना व आर्शीवाद प्राप्त किया। इस दौरान जेलर श्री मौर्य ने महाराजश्री की आगवानी की व पुष्प माला के साथ स्वागत किया। कार्यक्रम में श्रीकृष्ण केन्द्रीय समिति महासचिव राधेश्याम शर्मा थनाई पानीपत, आशीष शर्मा, अभिषेक शर्मा, हितेश, रामकिशन सोनी, उ मेद ओझा, राधेश्याम सोनी, आदित्य शिवपुरी, विजय परिहार, मुरारी व्यास, लल्ला पहलवान आदि भी मौजूद रहे जिन्होंने महाराजश्री के प्रवचनों का धर्मलाभ लिया। कार्यक्रम में श्रीकृष्ण मेडीकल स्टोर कमलागंज की ओर से प्रतिदिन प्रसाद वितरित किया गया।


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