कर्तव्य संस्थान ने बांटी आदिवासियों में मानस पाठ की प्रतियां

shailendra gupta
शिवपुरी।  रामचरित मानस एक संस्कृति सामाजिक ग्रंथ है अपनी रचना के 400 वर्षों बाद भी शबरी वंशज आदिवासियों तक इसका ना पहुंचना आश्चर्यजनक दु:खद घटना है। सन् 1988 से जिले के प्रत्येक ग्राम में मानस पहुंचाने का संकल्प लेकर कर्तव्य संस्थान ने इस बसंत पंचमी तक 65 आदिवासियों को मानस भेंट किए है।

बसंत पंचमी के इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे समाजसेवा आई.यू.खान जिन्होंने मानस प्राप्तकर्ता आदिवासी युवक-युवतियों के माता-पिता का स्वागत करते हुए उन्हें धन्य कहा। वहीं आदिवासी रामायणियों से कहा कि वे प्रत्येक ग्रामवासियों को इस महान ग्रंथ से संस्कारित करें।
समाजसेवी आई.यू.खान के इस प्रेरक दिशा निर्देश पर कर्तव्य संस्थान ने दशहरे के अवसर पर जिले के शेष रहे 600 आदिवासी ग्राम मजरों में मानस भेंट समारोह कर 25 वर्षों से चले आ रहे प्रयास की पूर्णाहुति करने का संकल्प लिया है। कर्तव्य संस्थान सचिव हरगोविन्द दुबे ने बताया कि प्रसिद्ध सामाजिक चिंतक व समाजसेवी घनश्याम सिंह चंदेल का निधन हुआ, उनकी इच्छानुसार त्रयोदशा पर उनके पुत्र मृगेन्द्र सिंह चंदेल ने माता श्रीमती पुष्पा चंदेल की ओर से 51 मानस आदिवासियों को भेंट करने का निश्चय किया और वे सभी आदिवासियों में वितरित की गई।
श्री दुबे ने बताया कि 300 रूपये प्रत्येक मानस इकाई के मान से सर्वहारा आदिवासी वर्ग के उत्थान के लिये कार्य करने वाले स्व.घनश्याम सिंह चंदेल के परिजनों द्वारा इस परंपरा को आगे जारी करने के लिए कर्तव्य संस्थान के हरगोविन्द दुबे, जे.पी.शर्मा, केदारनाथ गुप्ता, डॉ.प्रमोद खरे, गायत्री परिवार राजेन्द्र भारती, रिशि दुबे,राजेन्द्र, गोपीचन्द्र वशिष्ठ, जीवन लाल रावत, शंभू पाठक, इंजीनियर रमेश धाकड़, महेश, कैलाश शर्मा, राजेन्द्र शास्त्री, श्रीमती उमा मिश्रा, दर्शन वशिष्ठ, अजीत बत्रा, श्याम लाल सगर, रजनी खरे, रामप्रसाद शर्मा व सहरिया मुक्ति मोर्चा संस्थापक संजय बैचेन ने सराहना की है।

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